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टेलीफोन पर मिल जाते थे करोड़ों के लोन, मोदी ने संसद में किया खुलासा

प्रधानमंत्री Narendra Modi ने NPA की समस्या की जड़ कांग्रेस को बताया है।

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नई दिल्ली. बैंकिंग सिस्टम की NPA की समस्या से इंडियन इकोनॉमी बुरी तरह हिली हुई है। यह मुद्दा जब संसद में उठा तो प्रधानमंत्री Narendra Modi ने सीधे कांग्रेस को ही निशाने पर ले लिया। पीएम ने कहा कि इस समस्या की जड़ में कांग्रेस है और उनके दौर में तो करोड़ों के लोन महज टेलीफोन पर ही मिल जाया करते थे। उन्होंने इसे ‘टेलीफोन बैंकिंग’ नाम दे दिया।

 

 

सरकारी बैंकों के फंसे हुए 8.6 लाख करोड़ रुपए के कर्ज

सरकारी बैंकों की एनपीए की समस्या इतनी बड़ी है कि एक्सपर्ट इससे उबरने में कई साल लगने की बात कर रहे हैं। वित्त वर्ष 2017-18 में सरकारी बैंकों का घाटा 79,000 करोड़ रहा और 8.6 लाख करोड़ रुपए कर्ज के रूप में फंसे हुए हैं।

 

 

कांग्रेस के दौर में शुरू हुई एनपीए की कहानी

लोकसभा में अविश्‍वास प्रस्‍ताव के जवाब देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि देश में एनपीए की समस्या की जड़ में कांग्रेस है, जिसकी कहानी कांग्रेस सरकार के दौरान वर्ष 2008 में हुई। उन्‍होंने कहा कि यह खेल 2014 तक चलता रहा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान सरकारी बैंकों से पार्टी के करीबियों को बड़ी संख्या में लोन देने का काम शुरू किया। इसके चलते देश के सामने एनपीए की एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई।

 

 

देश पर भारी पड़ रही ‘टेलीफोन बैंकिंग’

पीएम ने कहा कि 2009-14 के बीच बैंकों पर दबाव बनाकर 52 लाख करोड़ रुपए के लोन दिलवा दिए गए,  जबकि इसके पहले 60 साल में केवल बैंकों ने 18 लाख करोड़ रुपए का लोन दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेताओं के टेलीफोन सीधे बैंक मैनेजर्स के पास जाते थे और और करीबी कारोबारियों को सिफारिश के साथ बड़े लोन दे दिए जाते थे। उन्‍होंने कहा कि इस समय तक देश में इंटरनेट बैंकिंग की शुरुआत नहीं हुई थी, लेकिन कांग्रेस की सरकार ने इस घोटाले को अंजाम देने के लिए ‘टेलीफोन बैंकिंग’ का सहारा लिया।


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वसूली के वक्त दे दिए जाते थे नए कर्ज

एनपीए के इस पहलू को उजागर करते हुए पीएम ने कहा कि इस दौरान जब कर्ज लौटाने का समय आता था तब कर्ज वसूलने की जगह कारोबारियों को नया कर्ज दे दिया जाता था। इसके चलते सरकारी बैंकों के ऊपर लगातार कर्ज का बोझ बढ़ता चला गया।


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बैलेंसशीट छिपाने के लिए हुए फैसले

उन्‍होंने कहा कि एनपीए बढ़ने की एक वजह यह भी है कि यूपीए सरकार में ऐसे फैसले लिए गए जिससे एनपीए की समस्या बैंकों की बैलेंसशीट से छिपी रहे और इस लैंडमाइन का किसी को पता न चल सके। पीएम मोदी ने दावा किया कि एनडीए सरकार ने उनके कार्यकाल के दौरान बैंक के एनपीए की वास्तविक स्थिति की समीक्षा की गई। इसके बाद नए सिरे से बैंकों को दुरुस्त करने के लिए गंभीरता से सुधार कार्यक्रम की शुरुआत की गई।


 

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