अंग्रेजों की शान कही जाती थी यह कंपनी, मोदी सरकार ने लगा दिया ताला

कभी इस कंपनी को अंग्रेजों की शान कहा जाता था। इस कंपनी में बने हुए पंखे बेको फैन देश में खासे लोकप्रिय थे। इनकी खास बात यह थी कि यह बहुत सस्ते थे और इसीलिए इनकी देश में खासी बिक्री हुआ करती थी। हम 100 साल पुरानी कंपनी बीको लॉरी (Biecco Lawrie) की बात कर रहे हैं। मोदी सरकार ने कुछ महीने पहले ही इस कंपनी को बंद करने का ऐलान किया था। 26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस (Republic Day) के मौके पर हम आपको इसी कंपनी के बारे में बता रहे हैं।

moneybhaskar

Jan 25,2019 05:39:00 PM IST

नई दिल्ली. कभी इस कंपनी को अंग्रेजों की शान कहा जाता था। इस कंपनी में बने हुए पंखे बेको फैन देश में खासे लोकप्रिय थे। इनकी खास बात यह थी कि यह बहुत सस्ते थे और इसीलिए इनकी देश में खासी बिक्री हुआ करती थी। हम 100 साल पुरानी कंपनी बीको लॉरी (Biecco Lawrie) की बात कर रहे हैं। मोदी सरकार ने कुछ महीने पहले ही इस कंपनी को बंद करने का ऐलान किया था। 26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस (Republic Day) के मौके पर हम आपको इसी कंपनी के बारे में बता रहे हैं।

क्यों बंद हुई कंपनी

गौरतलब है कि अक्टूबर, 2018 में ही सरकार ने यह फैसला लिया था। दरअसल Biecco Lawrie लिमिटेड सीपीएसयू थी, जो कई साल से लगातार घाटे में चल रही थी। सरकार ने अक्टूबर में कहा था कि इस कंपनी की नेटवर्थ माइनस (-) 78 करोड़ रुपए थी और 31 मार्च 2018 तक इसका लॉस 143.95 करोड़ रुपए था। इस कंपनी को रिवाइव करने की सरकार की सारी कोशिशें नाकाम रही हैं, इसलिए इसे बंद करने का फैसला लिया गया।

100 साल पहले शुरू हुई थी कंपनी

साल 1919 में इस कंपनी की शुरुआत हुई। उस समय इसका नाम ब्रिटिश इंडिया इलेक्ट्रिक कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड था।
1919 - इस कंपनी ने टी गार्डन मशीन की मैन्युफैक्चरिंग और रिपेयर का काम शुरू किया।
1924 - यहां इलेक्ट्रिकल रिपेयर शॉप लगाई गई।
1932 - इस साल कंपनी ने Biecco Fans की शुरुआत की। इसका उद्देश्य भारत जैसे बड़े मार्केट में पहचान बनाना था। इसलिए सस्ती कीमत पर पंखे बेचने शुरू किए गए।
1939 - इस साल कंपनी ने भारत में पहली बार इलेक्ट्रिक मोटर्स बनाने का काम शुरू किया और जल्द ही भारत की मार्केट में Biecco Motors ने पूरी तरह कब्जा कर लिया।

वर्ल्ड वार में बनाई बड़ी पहचान 

1939 से 42 के बीच हुई दूसरी वर्ल्ड वार के दौरान कंपनी ने अपनी खास पहचान बनाई। यहां बने शेल केस, फूड कंटेनर्स, मिलिट्री के लिए बने केमोफ्लैग सेट काफी इस्तेमाल किया गया और वार के बाद कंपनी की वर्ल्ड वाइड पहचान स्थापित हो गई।  
1950 - कंपनी ने जॉनसन एंड फिलिप्स लिमिटेड, इंग्लैंड के साथ मिलकर 11 केवी स्विचबोर्ड बनाने की शुरुआत की। 

 

 
आजादी के बाद बदले हालात 

साल 1970 में भारत सरकार ने इसका नाम बदल दिया और कंपनी का नाम Biecco Lawrie लिमिटेड रख दिया गया। 
1972 - इसे सरकारी कंपनी बना दिया गया और इसमें IBP Co. Limited और Balmer Lawrie की भागीदारी सुनिश्चित की गई। 
1979 - यह कंपनी पूरी तरह सरकारी बन गई और इसे पेट्रोलियम एंड नेचुरल मिनिस्ट्री के अंडर कर दिया गया। 
2011 - इस कंपनी का कैपिटल रिस्ट्रक्चरिंग किया गया और कंपनी का शेयर होल्डिंग पैटर्न इस प्रकार कर दिया गया। 
राष्ट्रपति : 32.23%
ऑयल इंडस्ट्री डेवलपमेंट बोर्ड, भारत सरकार : 67.23%
अन्य : 0.44 %

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