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शिंकनसेन बुलेट ट्रेन देने से पहले भारत को सुरक्षा कवच देगा जापान

बुलेट ट्रेन देने से पहले जापान भारत को सेफ्टी टेक्नोलॉजी सिखाएगा

Japan will give security cover to India before Shinkansen bullet trains

नई दिल्ली।  बुलेट ट्रेन देने से पहले जापान भारत को सेफ्टी टेक्नोलॉजी सिखाएगा। जापान को भारत की सेफ्टी टेक्नोलॉजी को लेकर चिंता सता रही है। भारत में 2023 तक बुलेट ट्रेन चलाने का प्रस्ताव है, लेकिन सरकार वर्ष 2020 तक ही बुलेट ट्रेन चलाना चाहती है। हर साल भारत में लगभग 100 ट्रेन दुर्घटना होती है। इसके लिए रेलवे की लचर इंफ्रास्ट्रक्चर व्यवस्था को जिम्मेदार ठहराया जाता है। पिछले पांच सालों में ट्रेन दुर्घटना में 560 लोगों की जान गई हैं। सेफ्टी टेक्नोलॉजी के मामले में हाल ही में भारत के रेलवे मंत्रालय ने जापान इंटरनेशनल कॉपरेशन एजेंसी (जेआईसीए) के साथ समझौता किया है। समझौते के तहत जेआईसीए भारत में अपने एक्सपर्ट भेजगा।

 

शिंकनसेन कंपनी से भारत लेगा बुलेट ट्रेन

भारत जापान के 18 शिंकनसेन बुलेट ट्रेन की खरीदारी करने जा रहा है। इसकी कीमत 7000 करोड़ रुपये होगी। एक ट्रेन में 10 कोच होंगे। यह ट्रेन 350 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से चलने में सक्षम है। भारत में पहला बुलेट ट्रेन मुंबई-अहमदाबाद में चलने के लिए प्रस्तावित है। बुलेट ट्रेन में इस सफर के लिए 3000 रुपये तक किराया हो सकता है। बुलेट ट्रेन के मामले में जापान में शिंकनसेन का कोई मुकाबला नहीं है। 1964 में शिंकनसेन ने बुलेट ट्रेन की शुरुआत टोक्यो से की थी। बुलेट ट्रेन का विश्व में सबसे बड़ा नेटवर्क शिंकनसेन का है।

 

चीन व फ्रांस में भी चलती है बुलेट ट्रेन

बुलेट ट्रेन सर्विस चीन, जर्मनी और फ्रांस में भी हैं, लेकिन जापान को फर्स्ट मूवर एडवांटेज हासिल है। 1964 में शुरुआत के बाद जापान में बुलेट ट्रेन का नेटवर्क 2600 किलोमीटर से अधिक हो चुका है। जापान के कई बड़े शहर, मसलन टोक्यो, टोकाइडो, ओसाका, क्योटो और योकोहामा इस नेटवर्क का हिस्सा हैं। जापान के 50 साल से शिंकनसेन के इतिहास में अब तक दस अरब यात्री सफर कर चुके हैं।

 

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