Home » Economy » PolicyJapan sits on 1.3 trillion dollar worth of forgotten money

98 लाख करोड़ रु की दौलत के हैं मालिक, लेकिन बीमारी में भूल गए सब

जापान सरकार के लिए बड़ी मुसीबत बने लाखों करोड़

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नई दिल्ली: जापान में एक अनोखी बीमारी के चलते  लोग अपनी 98 लाख करोड़ की संपत्ति को भूलते जा रहे हैं जिससे यहां की सरकार के सामने दिक्कते खड़ी हो गई हैं। यहां अधिकतर लोग डिमेंशिया नाम की एक बीमारी से ग्रस्त हैं जिसके कारण सरकार को इनकी संपत्तियों के रख-रखाव में काफी परेशानी हो रही है। पीड़ितो द्वारा संपत्ति भूले जाने से न केवल जापानी अर्थव्यवस्था के लिए मुश्किल पैदा हो रही है, बल्कि पीड़ितों के प्रियजनों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है कि इतनी अधिक संपत्ति का रख-रखाव किस तरह किया जाए।

 

एक अंग्रेजी वेबसाइट में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2018 में अलजाइमर से ग्रस्त इन लोगों के संपत्ती की कीमत 1.3 ट्रिलियन डॉलर थी। दाई-इची लाइफ रिसर्च इंस्टीट्यूट इंक ने कहा कि यह कुल अर्थव्यवस्था का एक चौथाई हिस्सा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस समस्या ने जापान को घेर रखा है। बीमारी से पीड़ित इन रोगियों के परिजन को  व्यक्तिगत रूप से संपत्तियों की देखरेख करने में काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। 

 

क्या होते हैं फ्रोजन असेट्स
फ्रोजन असेट्स वह संपत्ति होती है जिसे सरकार की ओर से कर्ज ना चुका पाने के चलते जब्त किया जाता है ऐसी संपत्ति को ना तो आप बेच सकते हैं, ना ही किसी अन्य कार्य में इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। यह संपत्ति उस वक्त तक फ्रोजन रहती है जबतक इस संपत्ति का मालिक इसका कर्ज नहीं चुका देता। 

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फ्रोजन संपत्ति से पड़ सकता है जापानी अर्थव्यवस्था पर गहरा असर
ऐसे में जरूरी है कि पॉलिसी मेकर्स नागरिकों की व्यक्तिगत बचत की सुरक्षा में संतुलन बनाए रखें। और उसी पैसे का इस्तेमाल करके अर्थवयवस्था को आगे बढ़ाएं।  केयो विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर कोहेई कोमामुरा ने कहा कि इससे जापानी अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि हमें  बुजुर्गों की संज्ञानात्मक क्षमताओं को समझने के लिए नए सामाजिक नियम, फाइनेंशियल प्रोडक्ट और फाइनेंशियल एडवाइस सिस्टम की जरूरत है। जापान में जहां एक ओर लोग अपनी बचत को स्टॉक  कर रहे हैं वहां पर यह फ्रोजन असेट्स देश के लिए एक गंभीर समस्या बनी हुई है। जापान के बैंक से मिले एक डेटा के मुताबिक, यहां पर ज्यादातर लोग अपनी 15 फीसदी या उससे ज्यादा की संपत्ति को इक्विटी या बचत ट्रस्ट में लगा देते हैं। 

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सरकार की तरफ से क्या हैं उपाय
जापान के ब्रोक्रेजर और  बैंक इन फ्रोजन असेट्स के बारे में जानकारी हासिल करनी शुरू कर दी है। कुछ वित्तीय संस्थान सरकार की सिफारिश पर चल रहे हैं उनका कहना है कि पीड़ितो को अनुमति है कि वह अपने अकाउंट को दो हिस्सों लीविंग एक्सपेंस और सेविंग्स में बांट सकें। ऐसा करने से बुढ़ापे में पीड़ित आसानी से अपना जीवन जी सकते हैं। सरकार ने एक और प्लान के तहत पांच लाख से अधिक डिमेंशिया से पीड़ित जापानी लोगों के लिए फानेंशियल गार्जियन के तौर पर परिवारजनों , दोस्तों को  नियुक्त किया है। 

 

धोखाधड़ी से सरकार चिंतित
इसके साथ ही सरकार पीड़ितों की तरफ से की गई सेविंग्स के मिसयूज होने के प्रति भी काफी चिंतित है। नेशनल पॉलिसी एजेंसी के आंकड़ों के मुताबिक, 2018 के पहले सात महीनों में धोखाधड़ी के कई केस सामने आए हैं। जिसमें बुजुर्गों के नाम पर कोई और उनके पैसे ले रहे थे।

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