ट्रेड वार से भारत को मिलेंगे नए अवसर, बन सकता है ट्रेडिंग-मैन्युफैक्चरिंग हबः जेटली

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि ग्लोबल ट्रेड वार से भले ही शुरुआत में अस्थिरता नजर आ सकती है, लेकिन धीरे-धीरे इससे भारत को नई संभावनाएं मिलेंगे। इससे भारत आगे बड़ा ट्रेडिंग और मैन्युफैक्चरिंग बेस बन सकता है। वित्त मंत्री ने पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स के एनुअल सेशन को वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से संबोधित करते हुए ये बातें कहीं।

moneybhaskar

Sep 28,2018 03:21:00 PM IST

नई दिल्ली. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि ग्लोबल ट्रेड वार से भले ही शुरुआत में अस्थिरता नजर आ सकती है, लेकिन धीरे-धीरे इससे भारत को नई संभावनाएं मिलेंगी। इससे भारत आगे बड़ा ट्रेडिंग और मैन्युफैक्चरिंग बेस बन सकता है। वित्त मंत्री ने पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स के एनुअल सेशन को वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से संबोधित करते हुए ये बातें कहीं।

रातोंरात देश से भागने के रास्ते हुए बंद

जेटली ने कारोबारियों से इथिकल प्रैक्टिसेस अपनाने की अपील करते हुए कहा कि कंपनियों को अपने बकाया करों का भुगतान करना चाहिए, क्योंकि इनसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी कोड (IBC) के लागू होने से रातोंरात देश से भागने के रास्ते बंद हो गए हैं। उन्होंने कहा कि कुछ ग्लोबल ट्रेंड्स से भारत पर नकारात्मक असर पड़ा है, लेकिन भविष्य में तेज विकास के लिए देश को नए मौके भी मिलेंगे।

ट्रेड वार से खुले कई नए बाजार

जेटली ने कहा, ‘ट्रेड वार से शुरुआत में अस्थिरता पैदा हुई, लेकिन इससे कई नए बाजार सामने आए हैं। इससे भारत के लिए एक बड़ा ट्रेड और और मैन्युफैक्चरिंग केंद्र बनने के रास्ते खुलेंगे। इसलिए हमें हालात को बहुत नजदीक से देखना होता है। पता नहीं कि चुनौती कब मौका बन जाए।’

विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका और चीन के बीच चल रही मौजूदा ट्रेड वार से भारत में बनने वाली मशीनों, इलेक्ट्रिक उपकरणों, वाहनों एवं कलपुर्जों, रसायन, प्लास्टिक एवं रबर उत्पादों को अमेरिकी बाजार में नई पहचान मिल सकती है।

कच्चे तेल की बढ़ती कीमत इकोनॉमी के लिए बड़ी चुनौती

जेटली ने कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को भी इकोनॉमी के लिए बड़ी चुनौती बताया, क्योंकि कच्चे तेल के लिए भारत लगभग पूरी तरह इंपोर्ट पर निर्भर है और अपनी जरूरत का 81% आयात करता है। भारत दुनिया में क्रूड का तीसरा सबसे इंपोर्टर है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमतें बढ़ने से घरेलू स्तर पर ईंधन भी महंगा हुआ है। उल्लेखनीय है कि पिछले पांच सप्ताह में मानक ब्रेंट क्रूड का दाम 71 डॉलर से बढ़कर 80 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है।

कारोबार में इथिकल प्रैक्टिसेस अपनाने की जरूरत

वित्त मंत्री ने कहा, ‘इन चुनौतियों के बने रहने के बावजूद, मुझे पूरा भरोसा है कि आने वाले दिन और साल ग्रोथ के लिहाज से भारत के लिए बेहतर अवसर लाएंगे।’ जेटली ने कहा, ‘जिन लोगों पर कर बनता है, उन्हें इसे चुकाना चाहिए। कर नहीं चुकाने वालों का बोझ करदाताओं पर नहीं डाला जाना चाहिए। इसलिए सबसे प्रमुख इथिकल प्रैक्टिस में से एक यह होगा कि जो लोग कर दायरे के बाहर हैं, उन्हें कर के दायरे में लाया जाए।’’

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