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जेटली ने पेट्रोल पर ड्यूटी नहीं घटाने के दिए संकेत, कहा-ईमानदारी से टैक्स जमा करें लोग

अरुण जेटली ने रेवेन्यू के सोर्स के तौर पर ऑयल पर निर्भरता खत्म करने के लिए नागरिकों से बकाया टैक्स चुकाने की अपील की है।

Jaitley hints at no cut in excise on oil, asks citizens to pay taxes honestly

नई दिल्ली. केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कमी नहीं करने के संकेत देते हुए कहा कि इससे इकोनॉमी में प्रोडक्टिविटी में कमी आ सकती है। उन्होंने रेवेन्यू के सोर्स के तौर पर ऑयल पर निर्भरता खत्म करने के लिए नागरिकों से अपना बकाया टैक्स ‘ईमानदारी’ से चुकाने का अनुरोध किया। 

 

 

जारी रहेेेेगी GDP ग्रोथ में तेजी 
उन्होंने अपनी एक फेसबुक पोस्ट में लिखा, ‘चौथी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 7.7 फीसदी रही और भारत दुनिया में सबसे तेजी से उभरती इकोनॉमी के तौर पर स्थापित हुआ। एक्सपर्ट्स के मुताबिक अगले कुछ साल तक यही ट्रेंड जारी रहने का अनुमान है।’

 

बढ़ रही हैं जाब 

जॉब क्रिएशन पर जेटली ने कहा, ‘हाल में जारी एक डाटा के विश्लेषण से जाहिर होता है कि कंस्ट्रक्शन सेक्टर की ग्रोथ डबल डिजिट में बनी हुई है। यह एक जॉब क्रिएटिंग सेक्टर है। इन्वेस्टमेंट बढ़ रहा है। घरेलू इन्वेस्टमेंट भी बढ़ रहा है। एफडीआई उच्चतम स्तर पर बना हुआ है।’

 

रोकी जानी चाहिए टैक्स चोरी 

जेटली ने कहा, ‘इसलिए मेरी पॉलिटिकल लीडर्स और ओपिनियन मेकर्स से अपील है कि नॉन टैक्स कैटेगरी में टैक्स चोरी रोकी जानी चाहिए। यदि लोग ईमानदारी से टैक्स चुकाते हैं तो ऑयल प्रोडक्ट्स पर लगने वाले टैक्स पर निर्भरता खासी कम हो जाती है। मीडियम और लॉन्ग टर्म में ड्यूटी में कमी किया जाना खासा काउंटर-प्रोडक्टिव हो सकता है।’

 

टैक्स-जीडीपी रेश्यो में हुआ सुधार 

जेटली ने कहा कि बीते चार साल के दौरान केंद्र सरकार का टैक्स-जीडीपी रेश्यो 10 फीसदी से बढ़कर 11.5 फीसदी हो गया है। इसमें से लगभग आधा यानी जीडीपी का 0.72 फीसदी नॉन ऑयल टैक्स-जीडीपी रेश्यो में बढ़ोत्तरी से आया है।
उन्होंने कहा कि 2017-18 में नॉन ऑयल टैक्स, जीडीपी का 9.8 फीसदा रहा है, जो 2007-08 के बाद किसी भी साल में सबसे ज्यादा रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में दिख रही तेजी से भारत की रेवेन्यू के मामले में स्थिति मजबूत हुई है।  

 

सरकार की छवि हुई मजबूत 

जेटली ने कहा, ‘राजकोषीय सुधार और मैक्रो-इकोनॉमी के लिहाज से जिम्मेदारीपूर्ण व्यवहार से इस सरकार की छवि खासी मजबूत हुई है। हम जानते हैं कि 2013 के दौरान क्या हुआ था। फिस्कल इनडिसीप्लिन से ज्यादा कर्ज लेना पड़ सकता है और जाहिर तौर पर कर्ज की लागत भी बढ़ सकती है।’

 

पी चिदंबरम पर साधा निशाना 

कांग्रेस लीडर पी चिदंबरम की टिप्पणी ‘ऑयल पर टैक्स 25 रुपए तक घटाया जा सकता है’ पर कटाक्ष करते हुए जेटली ने कहा, ‘यह मुश्किल में डालने वाला सुझाव है।’ चिदंबरम का नाम लिए बिना उन्होंने कहा, ‘सम्मानित पूर्ववर्ती ने खुद कभी ऐसा करने का प्रयास नहीं किया।’

 

UPA से विरासत में मिला भारी कर्ज 
उन्होंने कहा, ‘उनका इरादा भारत को भारी कर्ज के जाल में फंसाना है, जो यूपीए सरकार हमें विरासत में सौंप गई है। हमें याद रखना चाहिए कि इकोनॉमी और मार्केट स्ट्रक्चरल रिफॉर्म, राजकोषीय मजबूती और मैक्रो इकोनॉमिक स्टैबिलिटी को रिवार्ड देते हैं।

 

वहीं फिस्कल इनडिसीप्लिन और गैरजिम्मेदाराना व्यवहार का खामियाजा भुगतना पड़ता है। यूपीए के दौर में इकोनॉमी पॉलिसी पैरालिसिस से जूझ रही थी, जो अब एनडीए के दौरान सबसे तेजी से उभरती हुई इकोनॉमी बनी हुई है।’ जेटली ने कहा कि सरकार टैक्स-जीडीपी रेश्यो में सुधार के लक्ष्य पर काम कर रही है। 

 

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