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Home » Economy » PolicySBI predicts GDP growth at 6.7% in FY18 and 7.6% in Q4

SBI ने FY18 में 6.7% GDP ग्रोथ का जताया अनुमान, कहा- इकोनॉमी में शुरू हुई रिकवरी

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने फाइनेंशियल ईयर 2018 के लिए देश की जीडीपी ग्रोथ 6.7 फीसदी रहने का अनुमान जताया है।

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नई दिल्ली। पब्लिक सेक्टर में देश के सबसे बड़े लेंडर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने फाइनेंशियल ईयर 2018 के लिए देश की जीडीपी ग्रोथ 6.7 फीसदी रहने का अनुमान जताया है। रिपोर्ट के अनुसार चौथी तिमाही यानी जनवरी से मार्च के दौरान जीडीपी ग्रोथ 7.6 फीसदी रह सकती है, जिसकी वजह से पूरे फाइनेंशियल ईयर में ग्रोथ 6.7 फीसदी पहुंच जाएगी। बैंक के पब्लिकेशन इकोरैप में यह अनुमान जताया गया है। 

 

 

31 मई को जारी होंगे आंकड़ें
केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (CSO) जीडीपी से जुड़े आंकड़े 31 माई को जारी करेगा। इसमें फाइनेंशियल ईयर 2018 और चौथी तिमाही के जीडीपी आंकड़े जारी किए जाएंगे। अक्‍टूबर से दिसंबर की तीसरी तिमाही में जीडीपी 7.2 फीसदी रही थी।

 

बता दें कि केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (CSO) ने चौथी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 7.1 फीसदी रहने का अनुमान जताया था। वहीं, पूरे फाइनेंशियल के लिए ग्रोथ 6.6 फीसदी रहने का अनुमान जताया था। रिपोर्ट में एसबीआई ने चौथी तिमाही में जीवीए के 7.5 फीसदी रहने का अनुमान जताया है जबकि सीएसओ के अनुसार यह 6.9 फीसदी रह सकता है। सीएसओ ने फाइनेंशियल ईयर 2018 में जीवीए के 6.4 फीसदी रहने का अनुमान जताया था जबकि एसबीआई की रिपोर्ट के अनुसार यह 6.5 फीसदी रह सकता है। 

 

कॉरपोरेट GVA 9% रहने का अनुमान
इकोरैप  की रिपोर्ट के अनुसार कॉरपोरेट जीवीए में स्मार्ट ग्रोथ की वजह से चौथी तिमाही में मैन्युफैक्चरिंग जीवीए में 9 फीसदी ग्रोथ दिख सकती है। रिपोर्ट के अनुसार कॉरपोरेट जीवीए जो फाइनेंशियल ईयर 2017 से गिरना शुरू हुआ था, उसमें फाइनेंशियल ईयर 2018 की दूसरी छमाही से रिकवरी है। रिपोर्ट में एग्रीकल्चर सेक्टर में भी अच्छी ग्रोथ से जीडीपी को फायदा होने की बात कही गई है। वहीं, सर्विस सेक्टर की ग्रोथ 8 फीसदी के आस-पास रहने की उम्मीद जताई गई है जो सीएसओ के अनुमान से कम है। 

 

इकोनॉमी में सुधार के संकेत  
रिपोर्ट के अनुसार हमारे कंपोजिट लीडिंग इंडीकेटर (CLI) इंडेक्स को चौथी तिमाही में इकोनॉमिक एक्टिविटी में टर्निंग प्वॉइंट के संकेत मिले हैं। CLI इंडेक्स का मूवमेंट ऊपर की ओर से है, जिससे साफ है कि इकोनॉमिक एक्टिविटी सुधार के रास्ते पर है। एसबीआई का CLI इंडेक्स 18 लीडिंग इंडीकेटर का बास्केट है। रिपोर्ट के अनुसार चौथी तिमाही में कॉरपोरेट अर्निंग में सुधार रहा है। यह अर्निंग सीजन पिछले कुछ तिमाही से बेहतर रहा है। कंपनियों में मुनाफा दिख रहा हे। जिससे साफ है कि इकोनॉमी पटरी पर  आ रही है। 

 

फिक्‍की ने FY18 के लिए 6.6% दिया है अनुमान
इंडस्‍ट्री बॉडी फिक्‍की के अनुसार जनवरी से मार्च 2018 की तिमाही में भारत की GDP ग्रोथ 7.1 फीसदी रह सकती है। वहीं फाइनेंशियल ईयर 2017-18 के दौरान भारत की GDP 6.6 फीसदी रह सकती है। फिक्की ने फाइनेंशियल ईयर 2019 के लिए भारत की जीडीपी 7.4 फीसदी रहने का अनुमान जताया है। सर्वे में इसकी रेंज 6.9 फीसदी से लेकर 7.5 फीसदी के बीच मानी गई है।

 

मूडीज: तेल की कीमतें और राजकोषीय घाटा है चिंता 
मूडीज इन्‍वेस्‍टर्स सर्विस ने 2018 के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 7.5 फीसदी से घटाकर 7.3 फीसदी कर दिया है। रेटिंग एजेंसी ने कहा है कि भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था में  रिकवरी है लेकिन तेल की बढ़ती कीमतें और राजकोषीय दबाव बढ़ने से इसकी रफ्तार धीमी होगी। हालांकि, मूडीज ने 2019 के लिए 7.5 फीसदी ग्रोथ रेट के अनुमान को बरकरार रखा है। 
रेटिंग एजेंसी ने अपने 'ग्‍लेाबल मैक्रो आउटलुक 2018-19' में कहा कि भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था निवेश और खपत दोनों ही मोर्चों पर सुधर रही है। लेकिन अंतरराष्‍ट्रीय बाजार में कच्‍चे तेल की ऊंची कीमतें और वित्‍तीय दबाव बढ़ने से ग्रोथ की रफ्तार धीमी होगी। 

 

आगे पढ़ें, और क्या कहा मूडीज ने .........

 

 

MSP और मानसून से ग्रोथ को मिलेगा सपोर्ट 
मूडीज ने कहा है कि फसलों के लिए अधिक न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य (एमएसपी) और सामान्‍य मानसून के चलते ग्रामीण क्षेत्रों में खपत बढ़ेगी, जिससे ग्रोथ को बूस्‍ट मिलने की उम्‍मीद है। दूसरी ओर, निजी निवेश में धीरे-धीरे रिकवरी बनी रहेगी। इन्‍सॉल्‍वेंसी और बैंकरप्‍सी कोड लागू होने से बैंकों और कॉरपोरेट की बैलेंस सीट का मसला धीरे-धीरे हल होगा। वहीं, जीएसटी अभी धीरे-धीरे सेटल हो रहा है इसके चलते अगली कुछ तिमाहियों तक इसका दबाव ग्रोथ पर दिखाई देगा। हालांकि उम्‍मीद है कि एक साल में यह मामला सेटल हो जाएगा। 

 

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