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2.25 लाख शेल कंपनियों को मोदी सरकार का नोटिस, जांच में हो सकता है बड़ा खुलासा

ऐसी 2.25 लाख शेल कंपनियों को नोटिस दिया जा चुका है, जिनमें इलीगल एक्टिविटी का आशंका है।

Govt has served notices to around 2.25 lakh companies

नई दिल्‍ली। मोदी सरकार ने मनी लॉन्ड्रिंग को लेकर बड़ा एक्शन किया है। इसके तहत ऐसी 2.25 लाख शेल कंपनियों को नोटिस दिया जा चुका है, जिनमें इलीगल एक्टिविटी का आशंका है। इस बारे में यूनियन मिनिस्टर पीपी चौधरी ने जानकारी दी है। उनका कहना है कि किसी भी कंपनी की स्वायत्तता निवेशकों के हितों की कीमत पर नहीं हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि इन कंपनियों की स्क्रूटनी में  राजनीतिक दलों और व्यक्तियों के बारे में कुछ बड़े खुलासे हो सकते हैं।

 

 

असल में यह केंद्र सरकार द्वारा शेल कंपनियों खिलाफ अभियान का अगला चरण है, जिसमें इन 2.25 लाख शेल कंपनियों का रजिस्‍ट्रेशन कैंसिल किया जा सकता है। माना जा रहा है कि इस कदम से शेल कंपनियों के जरिए काले धन को सफेद करने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाया जा लगा सकेगा। सरकार की ओर से कहा गया है कि उद्देश्‍य है कि कंपनियों के फंक्शनिंग में यह तय किया जा सके कि‍ मनी लॉन्ड्रिंग या दूसरे अनैतिक गतिविधियों के लिए इनका मिसयूज न हो सके। 

 

लंबे समय से बिजनेस एक्टिविटी नहीं 
सरकार की ओर से कहा गया है कि जो 2.25 लाख कंपनियां सरकार के निशाने पर हैं, उनमें लंबे समय से बिजनेस एक्टिविटीज नहीं हो रही हैं। इन कंपनियों ने लंबे समय तक फाइनेंशियल स्‍टेटमेंट या एनुअल रिटर्न फाइल नहीं किया है। ऐसे में आशंका है कि इनका इस्तेमाल काले धन को सफद करने के लिए किया जा रहा है। इससे पहले वित्‍त वर्ष 2017-18 में रजिस्‍ट्रार्स ऑफ कंपनीज (आरओसी) शेल कंपनियों की पहचान कर 2,26,166 कंपनियों का रजिस्‍ट्रेशन कैंसिल कर चुकी है। शेल कंपनियों के खिलाफ यह कदम कंपनीज एक्‍ट, 2013 के तहत उठाया गया। 

 

नोटबंदी के बाद शुरू हुआ था अभियान
केंद्र सरकार ने नवंबर 2016 में नोटबंदी के बाद शेल कंपनियों की पहचान कर उनके खिलाफ एक्‍शन लेने का अभियान शुरू किया था। सरकार का मानना है कि शेल कंपनियों के जरिए काले धन को सफेद करने का काम किया जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी काले धन के खिलाफ अभियान के तहत शेल कंपनियों का नेटवर्क खत्‍म करने की बात कही है।

 

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