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खास खबर-अब ज्यादा रिटर्न का झांसा दे नहीं लूट पाएंगी कंपनियां, आ रहा है ये कानून

पोंजी स्‍कीम में अपनी गाढ़ी कमाई गवां चुके निवेशकों की अब सरकार ने सुध ली है।

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नई दिल्ली। शारदा स्‍कैम, ईमू फॉर्मिंग से लेकर क्रिप्‍टोकरंसी तक की पोंजी स्‍कीम में अपनी गाढ़ी कमाई गवां चुके निवेशकों की अब सरकार ने सुध ली है। तैयारी यह है कि बिना जरूरी मंजूरी और रेग्‍युलेशन के चल रही पोंजी स्‍कीम के खिलाफ अब सख्‍त कानून लाया जाएगा। इसके तहत सरकार अनरेग्‍युलेटेड डिपॉजिट स्‍कीम पर लगाम लगा सकेगी। इसके साथ ही मुमकिन है कि सरकार इसके रेग्‍युलेशन के जरिए रेवेन्‍यू जुटाने का सोर्स खड़ा कर सके। मंगलवार को कैबिनेट ने अनरेग्युलेटेड डिपॉजिट स्कीम बिल और चिटफंड (संशोधन) बिल को मंजूरी दे दी। अब बिल संसद में जाएगा और वहां से पारित होने के बाद यह कानून की शक्‍ल ले लेगा। 

 
सरकार क्‍यों ला रही है यह कानून 
मौजूदा समय में बिना कायदे-कानून का पालन किए अनरेग्युलेटेड डिपॉजिट स्कीम के जरिए कुछ संस्थाएं या लोग अब आम निवेशकों को ठगने में लगे हैं। वहीं, देश में क्रिप्टोकरंसी का भी चलन लगातार बढ़ रहा है और आरबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक रोजाना 2500 लोग इसकी ट्रेडिंग में लगे हैं। इन दोनों तरह की एक्टिविटी पर सरकार की ओर से रेग्युलेशन नहीं है, जिससे निवेशकों का पैसा डूबने का खतरा बना रहता है। सरकार अब ऐसी हर एक्टिविटी पर नजर रखने के उद्देश्‍य से इस तरह की योजनाओं को लेकर जल्द विधेयक लाने जा रही है। विधेयक लाने का उद्देश्‍य जहां आम निवेशकों की जमा राशि को सुरक्षित रखना है। विधेयक आने के बाद से आम निवेशक बैंक के अलावा अन्य फाइनेंशियल प्रोडक्ट में अपने पैसे ज्यादा व्यवस्थित तरीके से निवेश कर सकेंगे।
 
बिल के पास होने के बाद क्‍या होगा.....
 
1. आपके निवेश पर सरकार की होगी नजर
सरकार का उद्देश्‍य है कि नए कानून के जरिए आम आदमी के हर निवेश पर नजर रखना है, जो बैंक या इस तरह की संस्थाओं से अलग कियी अन्य फाइनेंशियल प्रोडक्ट में किया जाता है।  नई व्यवस्था के जरिए चिटफंड कानून में भी बदलाव होगा, जिससे पोंजी स्कीम्स पर रोक लगाई जा सके। अभी तक ऐसी स्कीम चलाने वाली संस्थाएं या लोग रेग्युलेशन न होने का फायदा उठाकर ठगी करने में सफल हो जाते हैं। वे नियामक अंतरों का लाभ उठाकर ठगी करने में सफल हो जाते हैं। 
इसके अलावा एक ऑनलाइन डाटाबेस बनेगा जिसमें देश में डिपॉजिट स्कीम्स से जुड़ी हर इन्फॉर्मेशन इकट्ठा करने और उन्हें शेयर करने की व्यवस्था होगी। उन ट्रेडिंग एक्सचेंज को भी रेग्युलेशन के दायरे में लाने की बात हो रही है, जिसके जरिए बिटक्वॉइन जैसी क्रिप्टोकरंसी में ट्रेडिंग होती है। 
 
2. अवैध कमाई पर लगेगी रोक 
सरकार का ऐसा मानना है कि बहुत से लोग अपनी अवैध कमाई को छुपाने के लिए भी इस तरह की पोंजी स्कीम चलाते हैं या उनमें निवेश करते हैं। वहीं, क्रिप्टोकरंसी में भी ट्रेडिंग में इस्तेमाल होने वाले पैसों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में नए कानून का उद्देश्‍य इस तरह के गैर कानूनी डिपॉजिट को भी कंट्रोल करना है। बता दें कि सरकार ने देश में ब्लैकमनी पर कंट्रोल करने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं। 
 
3. सरकार का भी बढ़ेगा रेवेन्यू  
बिटकॉइन से मुनाफे पर टैक्स लगाकर सरकार अपनी कमाई की तो सोच रही है। साथ ही वह इसे रेग्युलेट करने की भी योजना बना रही है। एंजेल ब्रोकिंग के अनुज गुप्ता का कहना है कि फिलहाल सरकार का उद्देश्‍य क्रिप्टोकरंसी को बंद करने का नहीं है। बल्कि इसे सरकार रेग्युलेशन के दायरे में लाना चाहती है। अभी तक बिटकॉइन में ट्रेडिंग विदेशों में स्थित एक्सचेंज से होती है। लेकिन अगर इसे रेग्युलेट किया जाता है तो इंडिया का अपना एक्सचेंज होगा, जिसके जरिए क्रिप्टोकरंसी में ट्रेडिंग की जा सकेगी। यहां के निवेशक डालर की बजाए रुपए में पैसा लगा सकेंगे। वहीं, रेग्युलेट होने के बाद सरकार को इस पर टैक्स भी मिलता रहेगा। अभी बहुत से निवेशक इससे होने वाले मुनाफे को छुपा ले जाते हैं, जिससे सरकार को नुकसान होता है। 
 
क्या कहना है सरकार का
आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग के अनुसार क्रिप्टोकरंसी की ट्रेडिंग को रेग्युलेट करने के लिए सरकार काम कर रही है। इसके लिए पैनल बनाया गया है, जो मार्च के अंत तक अपनी रिपोर्ट देगा, जिसके बाद इसकी रूप-रेखा तैयार हो सकती है। 
 
सरकार की किन एजेंसियों का बढ़ेगा रेग्‍युलेशन 
कानून आने के बाद सेबी, आरबीआई, आईटी डिपार्टमेंट और सीबीडीटी जैसी एजेंसियों की भूमिका बढ़ जाएगी। इन एजेंसियों के जरिए ऐसी स्कीम्स को रेग्युलेट किया जाएगा। 
 
आगे पढ़ें, कैसे फंस जाते हैं निवेशक
 
क्या है पोंजी स्कीम 
पोंजी स्कीम एक तरह से अनरेग्युलेटेड डिपॉजिट योजनाएं हैं, जिन्हें जमा योजनाएं चलाने की अनुमति सेबी या आरबीआई से नहीं है। इनमें अमूमन निवेशकों को ज्यादा कमाई का झांसा दिया जाता है। मसलन अगर बैंक एफडी पर 7 से 8 फीसदी की दर से ब्याज मिल रहा है तो इनमें 18 से 24 फीसदी की दर से सालाना ब्याज का लालच दिया जाता है। इस लालच में पढ़े लिखे लोग भी आ जाते हैं। शारदा चिटफंड घोटाला इन्हीं पोंजी स्कीम में शामिल है। ऐसी कई स्कीम में निवेशकों के अरबों रुपए लेकर कंपनियां फरार हो चुकी हैं।
 
बिटक्वॉइन को भी माना पोंजी स्कीम
भारत सरकार ने बिटक्वॉइन में ट्रेडिंग को लेकर आगाह करते हुए इसकी तुलना पोंजी स्कीम्स से की थी। सरकार का कहना है कि बिटकॉइन की कोई वास्तविक कीमत नहीं होती है। जिस तरह से पोंजी स्कीम में भोले-भाले निवेशक धोखाधड़ी के शिकार होते हैं, उसी तरह से इनमें भी उनका पैसा डूब सकता है। 
 
किस तरह फंस जाते हैं छोटे निवेशक 
-आम तौर पर कई संस्थाएं, कॉरपोरेट अफेयर मिनिस्ट्री से कराए गए रजिस्ट्रेशन को डिपॉजिट जुटाने के लिए कुछ इस तरह से प्रचारित करती है कि स्कीम को सरकार का सपोर्ट है। इसी वजह से लोग इनके झांसे में आ जाते हैं। 
-पोंजी स्कीम पर लगाम के लिए कानून प्राइज चिट्स एंड मनी सर्कुलेशन सकीम (बैनिंग) एक्ट 1978 भी है, लेकिन इस कानून पर अमल की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है। लेकिन ठगी करने वाले किसी राज्य में कंपनी रजिस्टर्ड कराते हैं तो किसी दूसरे राज्य में पैसा जुटाते हैं और उसे किसी अन्य राज्य में निवेश कर देते हैं। ऐसे में सरकारें भी कुछ नहीं कर पाती हैं। 
 

अश्‍योर्ड रि‍टर्न का ऑफर भी पोंजी स्‍कीम माना जाएगा

रि‍एल एस्‍टेट डेवलपर्स की पजेशन तक फि‍क्‍स इनकम वाली स्‍कीम और ज्‍वैलर्स की ईएमआई माफी वाली स्‍कीम पर भी बैन लगा दि‍या जाएगा। इन दि‍नों कई डेवलपर्स इस स्‍कीम के साथ ग्राहकों को लुभा रहे हैं कि मकान का पजेशन मि‍लने तक 12 से 14 फीसदी का अश्‍योर्ड रि‍टर्न मि‍लेगा। यही नहीं बि‍ल्‍डर्स बड़े रि‍टर्न का वादा करते हुए लोगों को नि‍वेश करने के लि‍ए भी आमंत्रि‍त कर रहे हैं। इसी तरह से कई बड़े ज्‍वैलर ग्राहकों को ऑफर देते हैं कि गहना खरीदने पर 11 कि‍स्‍त आपको देनी होगी और एक कि‍स्‍त का भुगतान कंपनी खुद करेगी। यह योजनाएं बस एक तरह का डि‍पॉजि‍ट हैं। 

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