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Home » Economy » PolicyIndia's debt up 50% to Rs 82 lakh crore in Modi era

मोदी सरकार ने बढ़ाई ऐसी मुसीबत, आने वाली कई सरकारें चुकाएंगी कीमत

मोदी राज में देश पर बढ़ा 28 लाख करोड़ रुपए का कर्ज

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नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की अगुआई सरकार भले ही अपने कार्यकाल की उपलब्धियों का बखान करती रहती है, लेकिन उनके दौर में एक ऐसी मुसीबत बढ़ गई है जिसकी कीमत आने वाली कई सरकारों को चुकानी पड़ेगी। मोदी सरकार के साढ़े चार साल के कार्यकाल के दौरान सरकार की कुल देनदारियां 49 फीसदी बढ़कर 82 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गई है। हाल में सरकारी कर्ज (Government Debt) पर जारी स्टेटस पेपर के 8वें एडिशन से यह बात सामने आई है।

 

केंद्र सरकार पर कुल सरकारी कर्ज 82 लाख करोड़ रु

सरकारी उधारी पर वित्त मंत्रालय (Finance Ministry) के डाटा में सितंबर, 2018 के आंकड़ों से तुलना की गई है। इसके मुताबिक सितंबर, 2018 तक केंद्र सरकार पर कुल 82.03 लाख करोड़ रुपए का कर्ज हो गया था, जबकि जून, 2014 तक सरकार पर कुल 54.90 लाख करोड़ रुपए का कर्ज था। इस प्रकार मोदी सरकार के दौरान भारत पर मौजूद कुल कर्ज लगभग 28 लाख करोड़ रुपए बढ़ गया है।

 

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पब्लिक डेट में सरकारी कर्ज बढ़ा

इस अवधि के दौरान पब्लिक डेट में सरकारी कर्ज की हिस्सेदारी 51.7 फीसदी बढ़कर 48 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 73 लाख करोड़ रुपए हो गया। इसकी मुख्य वजह आंतरिक कर्ज 54 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 68 लाख करोड़ रुपए होना रही।

 

 


 

52 लाख करोड़ रुपए हुआ मार्केट लोन

साढ़े चार साल के मोदी राज में मार्केट लोन 47.5 फीसदी बढ़कर 52 लाख करोड़ रुपए हो गया। वहीं जून, 2014 तक गोल्ड बॉन्ड्स के माध्यम से जुटाया गया कर्ज शून्य था, जबकि गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम से जुटाए गए कर्ज का आंकड़ा 9,089 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। 

 

सरकार हर साल जारी करती है रिपोर्ट

केंद्र सरकार ने सरकारी कर्ज पर जारी स्टेटस रिपोर्ट में भारत सरकार के कुल कर्ज की स्थिति पर विस्तृत विश्लेषण दिया। वित्त मंत्रालय ने कहा कि सरकार वर्ष 2010-11 से ही सरकारी कर्ज पर वार्षिक स्टेटस रिपोर्ट जारी कर रही है। इस रिपोर्ट में सरकार के फाइनेंशियल डेफिसिट फाइनेंसिंग ऑपरेशन का पूरा ब्योरा मौजूद है।

 

 
मीडियम टर्म में कर्ज में गिरावट का ट्रेंड

हालांकि पेपर में कहा गया, ‘केंद्र सरकार की कुल देनदारियों में मीडियम टर्म के लिहाज से गिरावट का ट्रेंड दिख रहा है और सरकार के कर्ज पोर्टफोलियो में जोखिम प्रोफाइल का अलग से उल्लेख किया जाता है।’
रिपोर्ट के मुताबिक, ‘सरकार अपने फिस्कल डेफिसिट की फाइनेंसिंग के लिए मार्केट लिंक्ड उधारी का इस्तेमाल करती रही है। पारंपरिक संकेतकों से पता चलता है कि सरकारी कर्ज की स्थिति डेट सस्टेनेबिलिटी के पैरामीटर पर सहज स्थिति में और इसमें धीरे-धीरे सुधार हो रहा है।’

 

 
फिस्कल डेफिसिट पर मिल सकती है राहत

भले ही देश का कर्ज बढ़ रहा है, लेकिन चालू वित्त वर्ष में फिस्कल डेफिसिट के मोर्चे से कुछ राहत मिलने का अनुमान है। नवंबर, 2018 तक चालू वित्त वर्ष के शुरुआती 8 महीनों में फिस्कल डेफिसिट 7.17 लाख करोड़ रुपए या पूरे साल के 6.24 लाख करोड़ रुपए के टारगेट का 114.8 फीसदी रहा।

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