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ब्लैकमनी पर फेल हुआ मोदी का प्लान तो हाथ से निकल जाएंगी 780 बेनामी संपत्तियां

बेनामी संपत्ति के खिलाफ कानून ही मोदी सरकार के लिए बन सकता है मुसीबत।

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नई दिल्‍ली. नोटबंदी के दौरान लागू किया गया बेनामी एक्‍ट मोदी सरकार का ब्‍लैकमनी के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार रहा है। पीएम नरेन्‍द्र मोदी खुद इस बारे खुलकर बोलते हैं। लेकिन अब यही बेनामी प्रॉपर्टी एक्‍ट सरकार के लिए मुसीबत बन सकता है। इसे लागू होने के डेढ साल बाद भी इसके लिए लीगल बॉडी का गठन नहीं किया जा सका है। इसके चलते इस एक्‍ट के तहत अटैच की गईं प्रापर्टी लीगल डिस्‍प्‍यूट में फंस सकती है, जिससे सरकार की बदनामी होगी। 

 
780 अटैच प्रापर्टी के अवैध हो जाने का खतरा
अटैच की गईं करोड़ों रुपए की 780 बेनामी संपत्तियों के जल्‍द ही अवैध हो जाने का खतरा है, क्‍योंकि सरकार ने अभी तक इसके लिए न्‍यायिक प्राधिकारी को नॉमित नहीं किया है। यह काम पिछले डेढ़ साल से लंबित पड़ा है। केन्‍द्र सरकार ने 1988 के बेनामी प्रॉपर्टी ट्रॉजैक्‍शन एक्‍ट 1988 को पुनर्जीवित करके नवंबर 2016 में इसे लागू किया था। इसी महीने नोटबंदी भी की गई थी। नोटबंदी के दौरान 500 और 1000 रुपए नोट को रद कर दिया गया था। 
 
 
PMLA की तरह की बनाना थी अथॉरिटी 
बेनामी एक्‍ट के सेक्‍शन 7 के तहत बेनामी संपत्ति रखने वालों को 7 साल तक की जेल और प्रॉपर्टी की फेयर मार्केट वैल्‍यू के 25 फीसदी तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है। इसके लिए केन्‍द्र सरकार को 3 सदस्‍यीय एजूडकेटिंग अथॉरिटी का गठन करना था। यह उसी तरह होना था जैसा PMLA के तहत किया गया था। इस अथॉरिटी को अटैच की गई प्रॉपर्टी को वेलीडेट करना था। 
 
 
डेढ़ साल से नहीं बनी है यह अथॉरिटी 
पिछले डेढ़ साल से नहीं बनी है यह अथॉरिटी, ऐसे में सरकार अटैच होने वाली प्रॉपर्टी के मामले एडहॉक बेसिस पर डील कर रही है। अभी यह काम प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉड्रिंग एक्‍ट (PMLA) के सहारे ही यह काम हो रहा है, जहां पहले से ही काफी काम है और स्‍टॉफ की कमी है। 
 
 
बाद में दिक्‍कत बन सकते हैं बेनामी संपत्ति वाले मामले
फाइनेंस मिनिस्‍ट्री के एक अधिकारी के अनुसार अगर बेनामी संपत्ति वाले केस तय समय में नहीं निपटाए जाते हैं तो बाद में बड़े कानूनी पचड़े शुरू हो सकते हैं और सरकार की पोजीशन खराब हो सकती है। इस अधिकारी के अनुसार पीएम मोदी कालेधन के खिलाफ बेनाम संपत्ति एक्‍ट को लेकर काफी ज्‍यादा महत्‍व देते हैं, ऐसे में यह बाद में दिक्‍कत की बात हो सकती है। 

 
860 केस अभी तक पकड़े गए
आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार अभी तक इस एक्‍ट के तहत 860 केस पकड़े गए हैं, जिनमें से केवल 80 के बारे में ही फैसला हो सका है। इस प्रकार अभी भी 780 केस लंबित हैं। इन केसों में करोड़ों रुपए की संपत्ति अटैच है। इनमें कई केस हाई प्रोफाइल हैं, जिनमें नेताओं, ब्‍यूरोक्रेट सहित अन्‍य लोगों से जुड़े केस हैं। अब इस बात की चिंता हो रही है यह हाई वैल्‍यू सेन्सटिव केस टाइम बार हो सकते हैं, क्‍योंकि नियम है कि अटैच संपत्ति मामले को 1 साल के अंदर वेलिडेट किया जाना चाहिए। PMLA ने हाल ही में डिपॉर्टमेंट ऑफ रेवेन्‍यू और सीबीडीटी से कहा है कि वह अब नए मामले न भेजे और नई अथॉरिटी के गठन तक इंतजार करे। अथॉरिटी ने कहा है कि उसने सरकार से कहा है कि जब तक नई बॉडी का गठन नहीं हो जाता है और उसका स्‍टॉफ पूरा नहीं किया जाता है तब तक इन मामलों को समय से निपटाना कठिन है। 
 

 

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