बिज़नेस न्यूज़ » Economy » Policy50 और 200 रु के नोट इस्‍तेमाल करने में नेत्रहीन हो रहे परेशान, कोर्ट ने कहा सरकार निकाले रास्‍ता

50 और 200 रु के नोट इस्‍तेमाल करने में नेत्रहीन हो रहे परेशान, कोर्ट ने कहा सरकार निकाले रास्‍ता

सरकार 50 व 200 के नोटों का परीक्षण करें क्‍योंकि इनका इस्‍तेमाल करने में नेत्रहीनों को दिक्‍कत का सामना करना पड़ रहा है।

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नई दिल्‍ली. दिल्‍ली हाई कोर्ट ने केन्‍द्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से कहा है कि वह 50 और 200 के नोटों का परीक्षण करें क्‍योंकि इनका इस्‍तेमाल करने में नेत्रहीनों को दिक्‍कत का सामना करना पड़ रहा है। कोर्ट ने कहा है कि इसी तरह की दिक्‍कत जारी हुए नए सिक्‍कों के इस्‍तेमाल करने में भी हो रही है। इस मामले की अगली सुनवाई 16 फरवरी को होगी।

 

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मुख्‍य न्‍यायधीश ने दिया निर्देश

दिल्‍ली हाई कोर्ट की कार्यकारी मुख्‍य न्‍यायधीश जस्टिस गीता मित्‍तल और जस्टिस सी हरि शंकर ने केन्‍द्र और आरबीआई से कहा है कि वह इन नई करेंसी का परीक्षण करें। नोटबंदी के बाद जहां 50 के नए नोट जारी किए गए हैं, वहीं 200 रुपए की करेंसी पहली बार जारी की गई है। नोटबंदी के बाद से सरकार ने यह दोनों करेेंसी जारी की हैं। कोर्ट ने कहा है कि इन नोटों के साइज और टैक्‍टाइल मार्क के सहारे इन नोटों को पहचानने में नेत्रहीनों को दिक्‍कत हो रही है।

 

 

सरकार और आरबीआई एक साथ बैठें

कोर्ट ने कहा है कि यह एक गंभीर मुद्दा है, जिसके हल के लिए आपको पहल करनी है। इसलिए सरकार और आरबीआई दोनों एक साथ बैठें, और मामले का हल निकालें। क्‍योंक‍ि नेत्रहीनों को इनको पहचानने में दिक्‍कत हो रही है। कोर्ट ने कहा है कि इसके लिए किसी ऐसे व्‍यक्ति की मदद लेनी चाहिए जिसको इन विषय की जानकारी हो।

 

नोट का साइज बदलने का कारण पूछा

कोर्ट ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल संजय जैन से पूछा आखिर क्‍यों नोटों का साइज बदला गया। पहले से प्रचलित नोटों के साइज को बदलने का कारण क्‍या है। इस पर जैन ने कहाकि सरकार ने सभी ऑस्‍पेक्‍ट को ध्‍यान में रख कर यह फैसला किया है।

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