Home » Economy » PolicyGovt To issue sovereign gold bonds, 2018-19 in five tranches

नवरात्र में 1 ग्राम से 4 किलो तक के गोल्ड बांड खरीदने का मौका, सरकार की है स्कीम

सोना खरीदना नवरात्र में अच्छा माना जाता है, अब सरकार दे रही मौका

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नई दिल्ली. नवरात्र में यूं तो सोना खरीदना अच्छा माना जाता है। ऐसे में सरकार आपको नवरात्र में आपको गोल्ड बांड (Gold Bond) खरीदने का मौका दे रही है। सरकार ने रिजर्व बैंक (RBI) के साथ परामर्श के बाद Gold Bond Scheme, 2018-19 जारी करने का फैसला किया है। इसके लिए 15 अक्टूबर से 19 अक्टूबर तक की तारीख तय कर दी गई है। इस स्कीम के तहत 1 ग्राम से 4 किलोग्राम तक के गोल्ड बांड खरीदे जा सकते हैं। हालांकि इसके लिए अभी कीमतों का खुलासा नहीं किया गया है।

 

 

सरकार ने जारी की टाइमलाइन

-सरकार ने सोमवार को एक बयान जारी कर बांड की दूसरी से छठी सीरीज की टाइमलाइन का ऐलान किया, जो अक्टूबर से फरवरी तक तय की गई है। इसकी पहली सीरीज पहली ही जारी हो चुकी है।

-दूसरी सीरीज के लिए 15 से 19 अक्टूबर तक आवेदन कर सकते हैं और 23 अक्टूबर को बांड जारी कर दिए जाएंगे।

-तीसरी सीरीज के लिए 5 नवंबर से 9 नवंबर तक आवेदन कर सकते हैं और 13 नवंबर को बांड जारी किए जाएंगे।

-चौथी सीरीज के लिए 24 दिसंबर से 28 दिसंबर के बीच आवेदन कर सकते हैं और 1 जनवरी, 2019 को बांड जारी कर दिए जाएंगे।

-पांचवीं सीरीज के लिए 14 जनवरी से 18 जनवरी तक आवेदन कर सकते हैं और 22 जनवरी, 2019 को बांड जारी कर दिए जाएंगे।

-छठी सीरीज के लिए 4 फरवरी से 8 फरवरी तक आवेदन कर सकते हैं और 12 फरवरी, 2019 को बांड जारी हो जाएंगे।

 

 

कैसे तय होगी बांड की कीमत

भारत बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन लिमिटेड की ओर से पिछले 3 दिन 999 प्योरिटी वाले सोने की दी गई कीमतों के आधार पर इस बांड की कीमत रुपए में तय होती है। स्कीम के तहत इनिशियल इन्वेस्टमेंट पर 2.5 फीसदी का सालाना ब्याज मिलेगा।

आगे भी पढ़ें -खरीद सकते हैं कितना सोना

 

 

खरीद सकते हैं 4 किलो तक सोना

स्कीम के अंतर्गत बांड 1 ग्राम और उसके गुणकों में हैं। इस बांड में न्यूनतम 1 ग्राम के लिए इन्वेस्टमेंट किया जा सकता है और एक व्यक्ति वित्त वर्ष (अप्रैल-मार्च) में अधिकतम 4 किलोग्राम के लिए निवेश कर सकता है।

सरकार द्वारा जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक इंडिविजुअल व एचयूएफ के लिए प्रति वित्त वर्ष अधिकतम सीमा 4 किलोग्राम और ट्रस्ट व इस तरह की अन्य एंटिटीज के लिए 20 किलोग्राम है।

 

 

ऐसे कर सकते हैं खरीद

सरकार द्वारा जारी इश्यू और सेकंडरी मार्केट से की गई खरीद के लिए सालाना सीमा लागू होगी। इन बांड्स में निवेश करने वाले इन्वेस्टर्स को फिजिकल या डिमैटीरिलाइज्ड फॉर्म में होल्डिंग का विकल्प दिया गया है।

फाइनेंस मिनिस्ट्री का कहना है कि इन बांड्स की बिक्री बैंक, स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, अधिकृत पोस्ट ऑफिस और स्टॉक एक्सचेंज एनएसई व बीएसई के जरिए की जाएगी।

 

 

गोल्ड में निवेश करने का विकल्प

सॉवरेन गोल्ड बांड फिजिकल गोल्ड में निवेश करने का विकल्प है। इस स्कीम को लगभग दो साल पहले लॉन्च किया गया था। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा सरकार की ओर से बॉन्ड जारी किया जाता है। स्कीम का मुख्‍य उदेश्य फिजिकल गोल्ड की डिमांड को कम करना है। साथ ही लोगों को फिजिकल गोल्ड की बजाए दूसरे विकल्प के जरिए निवेश की ओर मोड़ना भी है।

आगे पढ़ें-गोल्ड बांड में निवेश क्या हैं फायदे

 

 

गोल्ड बांड में निवेश के ये हैं फायदे

 

#सोना संभालने का कोई झंझट नहीं

गोल्‍ड बांड खरीदने पर फि‍जि‍कल रूप में सोना संभालने का कोई झंझट नहीं रह जाएगा। इसका इस्‍तेमाल लोन लेने के लि‍ए जमानत के तौर पर कि‍या जा सकता है। बॉन्‍ड पर सालाना 2.50 फीसदी का रिटर्न मि‍लने का आश्‍वासन। वापसी पर व्‍यक्‍ति‍यों को पूंजी लाभ पर कर में छूट भी मि‍लेगी। वहीं, इसमें धोखाधड़ी का डर नहीं होता है। गोल्ड बॉन्ड में किसी तरह की धोखाधड़ी और अशुद्धता की संभावना नहीं होती है।

 

 

#निवेश के साथ बचत भी

सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए गोल्ड बांड को डिजिटल फॉर्म में सुरक्षित रखा जा सकता है। वहीं, दूसरी ओर इसे अपने घर या डीमैट अकाउंट में भी रखा जा सकता है। इससे तरह लॉकर पर होने वाला खर्च भी बच जाएगा।

 

 

#मिल सकता है लोन

जरूरत पड़ने पर गोल्ड बांड के एवज में बैंक से लोन भी लिया जा सकता है। गोल्ड बॉन्ड पेपर को लोन के लिए कोलैटरल के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। यह पोस्ट ऑफिस की नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट की तरह होता है।

 

 

#कैपिटल गेन टैक्स की भी हो सकती है बचत

गोल्ड बांड की कीमतें सोने की कीमतों में अस्थिरता पर निर्भर करती है। सोने की कीमतों में गिरावट गोल्ड बॉन्ड पर नकारात्मक रिटर्न देता है। इस अस्थिरता को कम करने के लिए सरकार लंबी अवधि वाले गोल्ड बॉन्ड जारी कर रही है। इसमें निवेश की अवधि 8 साल होती है, लेकिन आप 5 साल के बाद भी अपने पैसे निकाल सकते हैं। पांच साल के बाद पैसे निकालने पर कैपिटल गेन टैक्स भी नहीं लगाया जाता है।

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