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ऑयल कंपनियों को 8600Cr रु देगी सरकार, फ्यूल सब्सिडी से हुए लॉस की करेगी भरपाई


नई दिल्ली. सरकार मार्च में समाप्त तिमाही के दौरान सब्सिडाइज फ्यूल बेचने से हुए नुकसान के एवज में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों इंडियन ऑयल (इंडियन ऑयल), भारत पेट्रोलियम (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (एचपीसीएल) को 8600 करोड़ रुपए का भुगतान करेगी। एक सरकारी अधिकारी ने न्यूज एजेंसी कोजेन्सिस को यह जानकारी दी।

 

एलपीजी पर कैश सब्सिडी के तौर पर दिए गए 7200 करोड़ रु

एक अधिकारी ने कहा कि 8600 करोड़ रुपए सब्सिडी लॉस में से 7200 करोड़ रुपए घरेलू एलपीजी पर कैश सब्सिडी के तौर पर दिए गए थे,जबकि 1400 करोड़ रुपए सब्सिडाइज केरोसिन की बिक्री पर अंडर रिकवरी है। अधिकारी ने कहा कि वित्त वर्ष 2017-18 की पहली तीन तिमाहियों की तरह इस तिमाही में सरकार द्वारा ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को पूरी भरपाई की जाएगी।

इस खबर के बाद तीन ऑयल कंपनियों के स्टॉक्स में तेजी दर्ज की गई। आईओसी में 1.58 फीसदी, बीपीसीएल में 1.43 फीसदी और एचपीसीएल में लगभग 1 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई।

 

 

केरोसिन और एलपीजी पर दी जाती है सब्सिडी

तीनों फ्यूल रिटेलर कंपनियों पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम के अंतर्गत केरोसिन और सब्सिडाइज कुकिंग गैस की बिक्री पर अस्थायी लॉस का सामना करना पड़ता है। आम तौर पर सरकार इन सब्सिडी लॉस के एवज में तीनों कंपनियों को भरपाई करती है।

अक्टूबर-दिसंबर के दौरान सब्सिडाइज फ्यूल की बिक्री पर कुछ कम लगभग 8374 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था। इसमें से 1209 करोड़ रुपए केरोसिन पर अंडर रिकवरी, जबकि 7165 करोड़ रुपए कुकिंग गैस पर दी गई कैश सब्सिडी के मद में हुआ था।

केरोसिन की बिक्री सब्सिडाइज कीमत पर की जाती है, जबकि घरेलू गैस की बिक्री मार्केट प्राइस पर होती है और सब्सिडी की रकम ऑयल मार्केटिंग कंपनियों द्वारा कंज्यूमर्स के अकाउंट में जमा की जाती है। सरकार सब्सिडी के एवज में किए गए भुगतान के लिए कंपनियों को मुआवजे की भरपाई करती है।

 

एफवाई 18 में एलपीजी बिक्री पर 23,400 करोड़ रु की सब्सिडी

जनवरी-मार्च क्वार्टर में तीन सरकारी ऑयल रिटेलर्स ने एलपीजी के लिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के अंतर्गत 6800 करोड़ रुपए का भुगतान कंज्यूमर्स को किया, जबकि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत 400 करोड़ रुपए का भुगतान किया।

अधिकारी ने कहा कि मार्च में समाप्त वित्त वर्ष के दौरान केरोसिन की बिक्री पर 4700 करोड़ रुपए की सब्सिडी का बोझ पढ़ा, वहीं एलपीजी की बिक्री पर 23,400 करोड़ रुपए का बोझ पड़ा। वहीं इसकी तुलना में 2016-17 में सरकार पर कुछ कम 19,728 करोड़ रुपए का बोझ पड़ा था।

2017-18 में सब्सिडी में बढ़ोत्तरी की मुख्य वजह पिछले साल की तुलना में क्रूड ऑयल और पेट्रोलियम फ्यूल की कीमतों में बढ़ोत्तरी रही।


 

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