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2 हजार के नोट को वापस लेने का प्रस्ताव नहीं, सरकार ने संसद में दी जानकारी

सरकार ने शुक्रवार को कहा कि 2000 रुपए के नोट को वापस लेने का कोई प्रस्ताव नहीं है।

Govt says No proposal to withdraw Rs 2000 notes

 

नई दिल्ली. सरकार ने शुक्रवार को कहा कि 2000 रुपए के नोट को वापस लेने का कोई प्रस्ताव नहीं है। रिजर्व बैंक (RBI) ने नवंबर, 2016 में डिमोनेटाइजेशन का ऐलान करते हुए हाई वैल्यू वाले 500 रुपए और 1000 रुपए के नोटों को वापस ले लिया था। 2000 के नोटों के विदड्राल से संबंधित एक सवाल के जवाब में वित्त राज्य मंत्री पी राधाकृष्णन ने लोकसभा में कहा, ‘अभी ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है।’

 

उन्होंने कहा कि स्पेशल बैंक नोट्स (एसबीएन) या तो आरबीआई द्वारा सीधे या बैंक ब्रांचेस या पोस्ट ऑफिसेस द्वारा करंसी चेस्ट मेकैनिज्म से प्राप्त किए जाते हैं और यह अथेंटिफिकेशन और निश्चित संख्या के वेरिफिकेशन पर निर्भर करते हैं। उन्होंने कहा, ‘इस प्रॉसेस को पूरा कर लिया गया है। करंसी वेरिफिकेशन एंड प्रोसेसिंग सिस्टम (सीवीपीएस) में ऑनलाइन प्रोसेस्ड नोट्स को नष्ट कर दिया गया है।’

 

 

पिछली सरकार ने बड़ी मात्रा में बांटे थे कर्ज

एक अन्य सवाल के जवाब में वित्त राज्य मंत्री शिव प्रताप शुक्ला ने कहा कि पब्लिक सेक्टर के बैंकों (पीएसबी) ने 2008 से 2014 की अवधि के दौरान तेजी से कर्ज बांटे थे। आरबीआई के डाटा के मुताबिक, उस दौरान ग्रॉस एडवांसेस 18.2 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 52.16 लाख करोड़ रुपए के स्तर पर पहुंच गए।

 

 

एसेट क्वालिटी रिव्यू से बड़ी संख्या में सामने आए NPA के मामले

उन्होंने कहा, ‘संकटग्रस्त संपत्तियों के मामलों में तेज बढ़ोत्तरी की वजह बढ़-चढ़कर लेंडिंग, विलफुल डिफॉल्ट/लोन फ्रॉड/कुछ मामलों में करप्शन और आर्थिक मंदी रही थी। बैंकों की बैलेंसशीट्स साफ सुथरी करने के लिए 2015 में शुरू किया गया एसेट क्वालिटी रिव्यू (एक्यूआर) से बड़ी संख्या में एनपीए के मामले सामने आए।’

उन्होंने कहा कि इससे ऐसे लोन एनपीए के दायरे में आ गए, जो लोन रिस्ट्रक्चरिंग की सुविधा के चलते इससे बचे हुए थे। इससे पीएसबी की क्लीनिंग की पहल से नए एनपीए सामने आए और बैंकों का घाटा बढ़ गया।

 

 

बैंकों को बढ़ानी बड़ी प्रोविजनिंग 

उन्होंने कहा, ‘एक समय वित्त वर्ष 2017-18 की तीसरी तिमाही में पीएसबी ने कुल 36,725 करोड़ रुपए का प्रॉफिट दर्ज किया था, वहीं एनपीए की पहचान की पारदर्शी प्रक्रिया के चलते पीएसबी को 54,822 करोड़ रुपए की प्रोविजनिंग करनी पड़ी। इससे संबंधित तिमाही में बैंकों को कुल 18,098 करोड़ रुपए का घाटा हुआ। ’

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