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बिज़नेस न्यूज़ » Economy » Policy1 अप्रैल से बदल जाएगी कंपनियों की अकाउंटिंग, सरकार ने नोटिफाई किए नए स्टैंडर्ड

1 अप्रैल से बदल जाएगी कंपनियों की अकाउंटिंग, सरकार ने नोटिफाई किए नए स्टैंडर्ड

नई दिल्ली. कंपनियों के लिए 1 अप्रैल से अपनी अकाउंटिंग में खासा बदलाव करना होगा और उन्हें ज्यादा डिटेल के साथ अपने रेवेन्यू के बारे में बताना होगा। सरकार द्वारा गुरुवार को नोटिफाई किए गए नए इंडियन अकाउंटिंग स्टैंडर्ड (आईएनडी एएस) 115 में इससे जुड़े कई प्रावधान किए गए हैं। 

एक्सपर्ट्स के मुताबिक आईएनडी एएस से रेवेन्यू की ज्यादा पारदर्शी अकाउंटिंग में मदद मिलेगी और इसका टेक्नोलॉजी, रियल एस्टेट और टेलिकॉम सहित विभिन्न सेक्टर्स में काम कर रही कंपनियों पर असर पड़ेगा।


फाइनेंशियल स्टेटमेंट में देनी होगी ज्यादा डिटेल

मिनिस्ट्री के नोटिफिकेशन के मुताबिक नए अकाउंटिंग स्टैंडर्ड का उद्देश्य इन सिद्धांतों को स्थापित करना है कि एक एंटिटी को अपने फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स में कस्टमर के साथ एक कॉन्ट्रैक्ट से मिलने वाले रेवेन्यू और कैश फ्लो के नेचर, अमाउंट, टाइमिंग और अनिश्चितता के बारे में उपयोगी जानकारी देनी चाहिए।


अनुमानित आय का देना होगा ब्योरा

इसमें कहा गया कि स्टैंडर्ड में एंटिटी के लिए ‘कस्टमर्स को गुड्स या सर्विसेज को ट्रांसफर किए जाने से उस अमाउंट का वर्णन करने जिससे इन गुड्स या सर्विसेज के एक्सचेंज से उससे होने वाली अनुमानित आय जाहिर हो’ को अनिवार्य किया गया है।

एक बार इनके लागू होने के बाद दो अन्य स्टैंडर्ड आईएनडी एएस 18 और 11 वापस ले लिए जाएंगे, जो रेवेन्यू और कंस्ट्रक्शन कॉन्ट्रैक्ट्स से संबंधित हैं।

अग्रणी कंसल्टैंसी ईवाई इंडिया ने कहा कि आईएनडी एएस 115 का एंटिटीज पर असर खासा व्यापक होगा और रेवेन्यू के संबंध में खासा बदलाव देखने को मिल सकता है।


सटीक और पारदर्शी होगी अकाउंटिंग

आईसीएआई पूर्व प्रेसिडेंट मनोज फडणीस ने कहा कि नए अकाउंटिंग स्टैंडर्ड्स से ‘ज्यादा सटीक और पारदर्शी अकाउंटिंग’ में मदद मिलेगी। हालांकि उन्होंने कहा कि कंपनियों को अगले फाइनेंशियल ईयर के पहले क्वार्टर में स्टैंडर्ड को लागू करने में खासी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

 

इन सेक्टर्स पर सबसे ज्यादा होगा असर

ईवाई इंडिया के नेशनल लीडर और पार्टनर (फाइनेंशियल अकाउंटिंग एडवाइजरी सर्विसेज) संदीप खेतान ने कहा कि आईएनडी एएस 115 से विशेषकर ईपीसी, टेक्नोलॉजी, माइनिंग व मेटल, रियल एस्टेट, टेलिकॉम और ई-कॉमर्स जैसे सेक्टर्स की कंपनियों के रेवेन्यू में खासा बदलाव होने जा रहा है।

 

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