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सरकार ने जांच एजेंसियों को सौंपी 1800 शेल कंपनियों की लिस्ट, तेज होगा एक्शन

सरकार ने जांच एजेंसियों को 1800 शेल कंपनियों की लिस्ट सौंपी है, जिनकी जांच की जानी हैं।

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नई दिल्ली. सरकार ने शेल कंपनियों पर एक्शन तेज करते हुए आगे की जांच के लिए लगभग 1800 संदिग्ध शेल कंपनियों की लिस्ट रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज और फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट को सौंपी है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने यह जानकारी देते हुए कहा कि जांच रिपोर्ट मिलने के बाद इनके खिलाफ आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी।

 

 

बहीखातों की होगी जांच

अधिकारी ने कहा, 'रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज द्वारा इन कंपनियों के बहीखातों की जांच की जाएगी और जांच एजेंसियों की रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार उन पर आगे की कार्रवाई शुरू करेगी।'

अधिकारी ने कहा कि सरकार जल्द ही शेल कंपनियों की नई लिस्ट जारी कर सकती है, जो पहले ही नियम विरुद्ध फंड का फ्लो सुनिश्चित करने वाली 2.24 लाख शेल कंपनियों को डी-रजिस्टर कर चुकी है। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि नई लिस्ट में लिमिटेड लायबिलिटी कंपनीज पर ध्यान दिया जाएगा।

 

 

एक साल में तेजी से बढ़ा है एलएलपी

अधिकारी ने कहा, 'शुरुआती जांच में पता चला है कि लगभग 15-20 फीसदी एलएलपी (लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप्स) निष्क्रिय कंपनियां हैं।' अधिकारी ने कहा कि बीते एक साल के दौरान एलएलपी की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है और यह आंकड़ा मार्च में उच्चतम स्तर पर पहुंच गया।

 

 

तेज हुआ है एलएलपी का रजिस्ट्रेशन

अधिकारी ने कहा कि मार्च में लगभग 3,000 एलएलपी का रजिस्ट्रेशन हुआ था और फिलहाल 1 लाख से ज्यादा एलएलपी मौजूद हैं।

अधिकारी ने कहा, 'एलएलपी स्ट्रक्चर के अंतर्गत कंप्लायंस और रेग्युलेटरी आवश्यकताएं न्यूनतम हैं। एक एलएलपी को सिर्फ एक एनुअल रिटर्न फाइल करना होता है और एक साल का स्टेटमेंट ऑफ अकाउंट और सॉल्वेंसी होती है। इसके बाद फाइलिंग्स की जरूरत तभी पड़ती है, जब एलएलपी पार्टनर्स, रिटायरमेंट, इस्तीफे और पतों में बदलाव होता है।'

 

 

 

जीरो बैलेंस वाले अकाउंट्स में कहां से आए करोड़ों

वित्त मंत्रालय ने पहले कहा था कि कई ऐसे अकाउंट्स की पहचान हुई है, जिसमें नोटबंदी के पहले निगेटिव बैलेंस था। लेकिन नोटबंदी के बाद से इन अकाउंट्स के जरिए करोड़ों का लेन-देन हुआ। ऐसे ही एक अकाउंट में नोटबंदी के बाद 2484 करोड़ रुपए का लेन-देन हुआ।

एक और अकाउंट का पता लगा जिसमें नोटबंदी के बाद 2134 करोड़ रुपए का लेन-देन हुआ। बयान में यह भी कहा गया है कि राज्य सरकारों को भी सलाह दी गई है कि ऐसे ट्रांजैक्शन को मंजूरी न दें।

 

3.09 लाख बोर्ड ऑफ डायरेक्ट अयोग्य घोषित

सरकार ने कहा था कि कंपनी एक्ट 2013 के तहत 3.09 लाख बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स को अयोग्य घोषित किया जा चुका है। ये ऐसी कंपनियों से जुड़े थे, जो लगातार 3 फाइनेंशियल ईयर से एनुअल रिपोर्ट या फाइनेंशियल स्टेटमेंट देने में सफल नहीं रहीं।

इनमें से 3000 डायरेक्टर्स ऐसे थे जो अलग-अलग 20 से ज्यादा कंपनियों में डायरेक्टर थे। बयान में कहा गया है कि इनमें से कई कंपनियां मल्टी लेयरिंग में शामिल हैं, ऐसे में यह भी जांच किया जा रहा है कि कहां-कहां कॉरपोरेट स्ट्रक्चर का उल्लंघन किया गया है।

 

नए नियम लागू किए गए

- डमी डायरेक्टर्स की समस्या पर लगाम लगाने के लिए नए नियम लागू किए गए हैं। अब नए DIN (डायरेक्टर्स आइडेंटिफिकेशन नंबर) के लिए अप्लाई करते समय पैन और आधार कार्ड की बायोमेट्रिक मैचिंग की जाएगी। वित्त मंत्रालय ने कहा इस कदम के जरिए फर्जी या डमी डायरेक्टर्स पर रोक लगाई जा सकेगी। 

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