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सरकार ने RBI से मांगा 13 हजार Cr अतिरिक्त डिविडेंड, फिस्कल डेफिसिट ने बढ़ाया प्रेशर

सरकार राजकोषीय घाटे को कम रखने के लिए तमाम सोर्सेज से फंड जुटाने की संभावनाएं खंगाल रही है।

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नई दिल्ली. सरकार राजकोषीय घाटे को कम रखने के लिए तमाम सोर्सेज से फंड जुटाने की संभावनाएं खंगाल रही है। इस क्रम में सरकार ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से 13 हजार करोड़ रुपए अतिरिक्त डिविडेंड की मांग की है, जो पूर्व में दिए गए 30,659 करोड़ रुपए के अलावा हैं।

गुरुवार को ही इकोनॉमिक अफेयर्स सेक्रेटरी सुभाष चंद्र गर्ग ने कहा था कि सरकार इस महीने सेंट्रल बैंक से अतिरिक्त डिविडेंड मिलने की उम्मीद कर रही है।

 

सरकार ने लोकसभा में दी जानकारी

जून, 2017 में समाप्त वित्त वर्ष के लिए आरबीआई ने अगस्त में 30,659 करोड़ रुपए के डिविडेंड का भुगतान किया था, जो 2015-16 में दिए गए 65,876 करोड़ रुपए के डिविडेंड की तुलना में आधे से भी कम था। वित्त राज्य मंत्री पी राधाकृष्णन ने लोकसभा में दिए एक लिखित जवाब में कहा, ‘सरकार ने आरबीआई द्वारा पूर्व में ट्रांसफर किए गए 30,659 करोड़ रुपए के अलावा सरप्लस 13,000 करोड़ रुपए की मांग की है। ’

 

मालेगाम समिति ने की थी यह सिफारिश

उन्होंने कहा कि अतिरिक्त फंड की मांग मालेगाम समिति की आरबीआई के पूरे सरप्लस को सरकार को ट्रांसफर करने की सिफारिश के तहत की गई है।

 

फिस्कल डेफिसिट कम रखने का है प्रेशर

सरकार पर फिस्कल डेफिसिट को कम रखने का खासा प्रेशर है, जिसके मौजूदा वित्त वर्ष में जीडीपी की तुलना में 3.5 फीसदी के स्तर पर पहुंचने का अनुमान है। हालांकि बजट एस्टीमेट 3.2 फीसदी है। आरबीआई एक्ट, 1934 के तहत सेंट्रल बैंक को बैड और संदिग्ध कर्जों, एसेट डेप्रिसिएशन और स्टाफ के लिए अंशदान व सुपरएनुएशन फंड के मद में प्रोविजंस के बाद सरप्लस फंड को सरकार को देना होता है।


 
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