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बोइंग के सुपर हॉर्नेट जेट पर भारत की नजर, 97 हजार करोड़ तक बढ़ सकती है डील

नई दिल्ली/सिंगापुर.  भारतीय वायुसेना के लिए लड़ाकू विमानों की खरीद में ऑर्डर हासिल करने की होड़ में अमेरिकी एयरक्राफ्ट कंपनी बोइंग भी शामिल हो गई है। सिंगल इंजन वाले 100 विमान सप्लाई करने की दौड़ में पहले लॉकहीड मार्टिन कॉर्प के एफ-16 और साब एबी के ग्रिपेन के बीच ही मुकाबला देखने को मिल रहा था। लेकिन मोदी सरकार के ट्विन (दो) इंजन एयरक्राफ्ट खरीदने पर जोर दिए जाने से बोइंग अब दोनों कंपनियों को टक्कर दे सकती है। फिलहाल, दुनिया में एक मात्र रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयरफोर्स ही सुपर हॉर्नेट का विदेशी कस्टमर है।

 

दोगुनी हो सकती है ऑर्डर की वैल्यू

 

 

- रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मोदी सरकार की योजना में बदलाव के बाद इस ऑर्डर की वैल्यू 15 अरब डॉलर (97,500 करोड़ रुपए) तक पहुंच सकती है। ऑर्डर को इसलिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि सरकार एयरफोर्स के बेड़े को मजबूत बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है।

- मार्टिन कॉर्प और साब एबी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मेक इन इंडिया इनीशिएटिव के तहत स्थानीय कंपनियों के साथ भागीदारी से देश में विमानों के निर्माण की पेशकश की है। इससे इंपोर्ट पर निर्भरता में कमी लाने में मदद मिलेगी।

 

सरकार ने वायुसेना को दिए निर्देश

- फरवरी में सरकार ने वायुसेना से ट्विन इंजन एयरक्राफ्ट के लिए कॉम्पिटीशन शुरू करने और बोइंग के एफ/ए-18 सुपर हॉर्नेट का आकलन करने के लिए कहा था। भारतीय नौसेना ने 8 से 9 अरब डॉलर में 57 फाइटर जेट खरीदने के लिए इस जेट को लिस्ट में शामिल किया है।

 

जल्द एफआरआई जारी कर सकता है रक्षा मंत्रालय

- इस डील के पहले फेज में जल्द ही रक्षा मंत्रालय रिक्वेस्ट फॉर इन्फोर्मेशन (आरएफआई) जारी कर सकता है। जिसके तहत भारत में फाइटर जेट बनाए जाने हैं।

- एक अधिकारी ने बताया कि कॉम्पिटीशन सिंगल और ट्विन इंजिन जेट्स दोनों के लिए खुला होगा, लेकिन लॉकहीड और साब ने नई शर्तों के बारे में कुछ नहीं बताया है।

 

15 साल से वायुसेना में लड़ाकू विमानों की कमी

- बता दें कि भारत में बीते 15 साल से नए लड़ाकू विमानों की जरूरत महसूस की जा रही है। कई बार एलान होने पर भी जरूरत की तुलना में सिर्फ तीन-चौथाई जेट ही वायुसेना के पास मौजूद हैं। 

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