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45 साल बाद कोल सेक्टर में बड़ा रिफॉर्म, किसी को भी कोयला बेच सकेंगी प्राइवेट खनन कंपनियां

सरकार ने कोयला सेक्टर के 1973 में हुए नेशलाइजेशन के बाद सबसे बड़े रिफॉर्म को मंजूरी दी है।

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नई दिल्ली. सरकार ने कोयला सेक्टर के 1973 में हुए नेशलाइजेशन के बाद सबसे बड़े रिफॉर्म को मंजूरी दी है। मंगलवार को कैबिनेट ने प्राइवेट कंपनियों की कमर्शियल माइनिंग को मंजूरी दे दी। सीसीईए के इस फैसले का ऐलान करते हुए कोयला और रेलवे मिनिस्टर पीयूष गोयल ने कहा कि इस रिफॉर्म से कोयला सेक्टर की क्षमता में सुधार होने की उम्मीद है और सेक्टर मोनोपोली से कॉम्पिटीशन के दौर में प्रवेश करेगा।

बढ़ेगा इन्वेस्टमेंट, पैदा होंगे नए रोजगार

- गोयल ने कहा, "इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और सेक्टर में बेहतर टेक्नोलॉजी लाने में मदद मिलेगी। इन्वेस्टमेंट बढ़ने से कोयला खनन क्षेत्रों में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार में इजाफा होगा। इसका फायदा विशेष रूप से माइनिंग सेक्टर को मिलेगा और संबंधित क्षेत्रों के आर्थिक विकास में मदद मिलेगी।"

- "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता हुई कैबिनेट कमिटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स ने कोल माइन्स (स्पेशल प्रोविजंस) एक्ट, 2015 और माइन्स एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेग्युलेशंस) एक्ट, 1957 के अंतर्गत कोयले की बिक्री के लिए कोल माइन्स/ब्लॉक्स के ऑक्शन की मेथडोलॉजी को मंजूरी दे दी है।"

 

-ऑक्शन के माध्यम से बेच सकेंगी कोयला

- अभी तक कोयला खनन कंपनियां कैप्टिव (या निजी इस्तेमाल के लिए) पावर जेनरेशन के लिए ऑक्शन में हिस्सा लेती थीं, लेकिन अब वे ई-ऑक्शन में भाग लेकर प्राइवेट डॉमेस्टिक और ग्लोबल खनन कंपनियों को बिक्री कर सकेंगी।

 

कोयला सेक्टर का सबसे बड़ा रिफॉर्म

- केंद्रीय मंत्री ने कहा, "कमर्शियल कोल माइनिंग को प्राइवेट सेक्टर के लिए खोलना 1973 में नेशनलाइजेशन के बाद से कोयला सेक्टर के लिए एक बड़ा रिफॉर्म है।" भारत में फिलहाल 300 अरब टन तक कोयले के भंडार हैं।

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