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अप्रैल-जनवरी में 7.7 लाख करोड़ के स्तर पर फिस्कल डेफिसिट, बजट टारगेट का 121.5%

वित्त वर्ष 2018-19 में अप्रैल-जनवरी के दौरान भारत का (fiscal deficit) 7.7 लाख करोड़ रुपए के स्तर पर पहुंच गया।

Fiscal deficit touches 121.5 pc of full-year target in January

वित्त वर्ष 2018-19 में अप्रैल-जनवरी के दौरान भारत का फिस्कल डेफिसिट (fiscal deficit) 7.7 लाख करोड़ रुपए के स्तर पर पहुंच गया, जो 6.34 लाख करोड़ रुपए के बजट टारगेट का 121.5 फीसदी है। सरकार द्वारा मंगलवार को जारी आंकड़ों में यह बात सामने आई है।
 

 

नई दिल्ली. वित्त वर्ष 2018-19 में अप्रैल-जनवरी के दौरान भारत का फिस्कल डेफिसिट (fiscal deficit) 7.7 लाख करोड़ रुपए के स्तर पर पहुंच गया, जो 6.34 लाख करोड़ रुपए के बजट टारगेट का 121.5 फीसदी है। फिस्कल डेफिसिट बढ़ने की मुख्य वजह रेवेन्यू कलेक्शन में कमी रही। सरकार द्वारा मंगलवार को जारी आंकड़ों में यह बात सामने आई है।

 

बजट में सरकार ने बढ़ा दिया था फिस्कल डेफिसिट का टारगेट

इस महीने की शुरुआत में 2019-20 के लिए पेश किए गए अंतरिम बजट में सरकार ने छोटे किसानों की इनकम स्कीम के लिए 20 हजार करोड़ रुपए की फंडिंग स्कीम के चलते चालू वित्त वर्ष के फिस्कल डेफिसिट के टारगेट को बढ़ाकर जीडीपी (GDP) का 3.4 फीसदी कर दिया था। हालांकि पहले बजट टारगेट 3.3 फीसदी था। फिस्कल डेफिसिट (fiscal deficit) सरकार के एक्सपेंडिचर और रेवेन्यू के बीच का अंतर है।

 

रेवेन्यू रिसीट्स रहीं 11.81 लाख करोड़ रु

कंट्रोलर जनरल ऑफ अकाउंट्स (CGA) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2018-19 में जनवरी तक सरकार की कुल रेवेन्यू रिसीट्स 11.81 लाख करोड़ रुपए या रिवाइस एस्टीमेट का 68.3 फीसदी रहा, जबकि बीते साल समान अवधि के दौरान यह आंकड़ा 72.8 फीसदी रहा था।

 

रेवेन्यू में आई कमी

रिवाइस एस्टीमेट के मुताबिक सरकार को चालू वित्त वर्ष के दौरान 17.29 लाख करोड़ रुपए का रेवेन्यू मिलने का अनुमान है, जबकि मूल बजट में यह आंकड़ा 17.25 लाख करोड़ रुपए था।
वहीं टैक्स रेवेन्यू रिवाइस एस्टीमेट का 68.7 फीसदी रहा, जबकि बीते वित्त वर्ष की समान अवधि के दौरान यह 76.5 फीसदी रहा था।

 

एक्सपेंडिचर बढ़ने का अनुमान

सीजीए डाटा के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष में जनवरी के अंत तक सरकार का कुल एक्सपेंडिचर 20.01 लाख करोड़ रुपए या रिवाइस एस्टीमेट का 81.5 फीसदी रहा। चालू वित्त वर्ष के दौरान कुल खर्च रिवाइस एस्टीमेट में बढ़ाकर 24.57 लाख करोड़ रुपए कर दिया गया, जो पहले 24.42 लाख करोड़ रुपए था।

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