अप्रैल-दिसंबर में फिस्कल डेफिसिट FY19 के बजट लक्ष्य का 112.4%, रेवेन्यू में कमी का असर

वित्त वर्ष 2018-19 में दिसंबर के अंत तक फिस्कल डेफिसिट (Fiscal deficit) 6.24 लाख करोड़ रुपए के बजट टारगेट की तुलना में 112.4 फीसदी के स्तर तक पहुंच गया। सरकार द्वारा सोमवार को जारी आंकड़ों में यह बात सामने आई है।

moneybhaskar

Feb 04,2019 06:03:00 PM IST

नई दिल्ली. वित्त वर्ष 2018-19 में दिसंबर के अंत तक फिस्कल डेफिसिट (Fiscal deficit) 6.24 लाख करोड़ रुपए के बजट टारगेट की तुलना में 112.4 फीसदी के स्तर तक पहुंच गया। सरकार द्वारा सोमवार को जारी आंकड़ों में यह बात सामने आई है। फिस्कल डेफिसिट बढ़ने की मुख्य वजह रेवेन्यू कलेक्शन में कमी रही। सरकार के खर्च और रेवेन्यू का अंतर फिस्कल डेफिसिट (Fiscal deficit) होता है।

नौ महीनों में 7.01 लाख करोड़ रु हुआ फिस्कल डेफिसिट

वित्त वर्ष 2018-19 में दिसंबर तक शुरुआती नौ महीनों में फिस्कल डेफिसिट 7.01 लाख करोड़ रुपए रहा। वहीं एक साल पहले समान अवधि के दौरान यह आंकड़ा बजट अनुमान (Budget Estimate) का 113.6 फीसदी रहा था। सरकार ने वित्त वर्ष 2018-19 में जीडीपी की तुलना में फिस्कल डेफिसिट 3.3 फीसदी या 6.24 लाख करोड़ रुपए का लक्ष्य तय किया था, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह 3.53 फीसदी रहा था।

2019-20 के लिए 3.4 फीसदी फिस्कल डेफिसिट का लक्ष्य

2019-20 के अंतरिम बजट में फिस्कल डेफिसिट को ऊपर की ओर रिवाइज करते हुए जीडीपी की तुलना में मामूली बढ़ाकर 3.4 फीसदी कर दिया गया है। इसकी एक वजह छोटे किसानों के वास्ते घोषित इनकम स्कीम के लिए किए गए 20,000 करोड़ रुपए का अतिरिक्त आवंटन थी।

रेवेन्यू रिसीट्स में कमी

कंट्रोलर जनरल ऑफ अकाउंट्स (CGA) द्वारा जारी डाटा के मुताबिक 2018-19 में दिसंबर तक सरकार की रेवेन्यू रिसीट्स बजट अनुमान की तुलना में 10.84 लाख करोड़ रुपए या 62.8 फीसदी रही, जबकि बीते साल समान अवधि के दौरान यह आंकड़ा 66.9 फीसदी रहा था। सरकार ने चालू वित्त वर्ष के दौरान 17.25 लाख करोड़ रुपए का लक्ष्य तय किया था। इसे 2019-20 के अंतरिम बजट में बढ़ाकर 17.29 लाख करोड़ रुपए कर दिया गया। वहीं टैक्स रेवेन्यू बजट अनुमान का 63.2 फीसदी था, जबकि बीते साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 73.4 फीसदी रहा था।

कुल व्यय रहा 18.32 लाख करोड़ रु

सीजीए डाटा के मुताबिक दिसंबर के अंत तक सरकार का कुल व्यय 18.32 लाख करोड़ रुपए या बजट अनुमान का 75 फीसदी रहा था। चालू वित्त वर्ष के दौरान कुल व्यय रिवाइज एस्टीमेट्स में बढ़ाकर 24.57 लाख करोड़ रुपए कर दिया गया, जबकि पहले यह आंकड़ा 24.42 लाख करोड़ रुपए था।

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