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जिसके पास हो पर्याप्त फंड और एअर इंडिया को चलाने की क्षमता, लगा सकता है बिडः सरकार

नई दिल्ली. जिस कंपनी या एंटिटी के पास पर्याप्त फंड हो और एअर इंडिया को चलाने की क्षमता हो, वह सरकारी एअरलाइंस एअर इंडिया की 76 फीसदी हिस्सेदारी के लिए बिड लगा सकती है। डीआईपीएएम सेक्रेटरी नीरज ने गुप्ता ने गुरुवार को यह जानकारी दी।

पीएसयू डिसइन्वेस्टमेंट प्रोग्राम में वेंचर कैपिटल फंड्स के भाग लेने के संबंध में गुप्ता ने कहा कि ऐसे फंड्स सरकार के स्वामित्व वाली एसेट्स के लिए डॉमेस्टिक कंपनियों के साथ करार कर सकते हैं। 

 

 

फाइनेंस है प्रमुख क्राइटीरिया 
डिपार्टमेंट ऑफ इन्वेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट (डीआईपीएएम) में सेक्रेटरी ने कहा, ‘एअर इंडिया के मामले में हम टेकओवर के लिए सिर्फ एयरलाइन के नाम पर विचार नहीं कर रहे हैं। इसके लिए फाइनेंस प्रमुख क्राइटीरिया है और उसमें टेकओवर व ऐसी एसेट को चलाने की क्षमता होनी चाहिए।’

 

 

बीते महीने जारी किया था इन्फोर्मेशन मेमोरैंडम 
बीते महीने सरकार ने प्रेलिमिनेरी इन्फोर्मेशन मेमोरैंडम जारी करके एअर इंडिया की 76 फीसदी हिस्सेदारी के लिए बिडर्स को इन्वाइट किया था, जिसमें मैनेजमेंट कंट्रोल का ट्रांसफर भी शामिल है। गुप्ता ने एसोचैम के एक कार्यक्रम में कहा, ‘हमने एयरलाइन के लिए छोटा खाका खींचा था कि कैसे डॉमेस्टिक एयरलाइन को कंसोर्टियम की इलिजिबिलिटी में फिट किया जा सकता है, किसे नेटवर्थ की जरूरत है और एअर इंडिया के वास्ते बिडिंग के लिए कितने फंड की जरूरत है।’

 

 

एअर इंडिया पर 49,000 करोड़ का कर्ज
प्रस्तावित डिसइन्वेस्टमेंट में प्रॉफिट में चल रही एअर इंडिया एक्सप्रेस और ज्वाइंट वेंचर एआईएसएटीएस भी शामिल होगी। एआईएसएटीएस, एअर इंडिया और सिंगापुर की एसएटीएस लि. का बराबर हिस्सेदारी वाला ज्वाइंट वेंचर है। एअर इंडिया पर कुल 49,000 करोड़ रुपए का कर्ज है, जो डिसइन्वेस्टमेंट के बाद एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस पर घटकर 33,000 करोड़ रुपए रह जाएगा।
बिड डॉक्यूमेंट के तहत बिडर्स की मिनिमम नेटवर्थ 5,000 करोड़ रुपए हो और पिछले पांच साल में तीन साल में प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (पीएटी) दर्ज किया हो। बिड जमा करने की आखिरी तारीख 14 मई है। 

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