Home » Economy » Policyबिजली का बिल न जमा करने वालों की सरकार एक SMS से काट देगी कनेक्‍शन - The electricity connection cut baya SMS This is the gover

बिल जमा नहीं किया तो एक SMS पर कटेगी बिजली, ये है सरकार की तैयारी

बिजली चोरी करने वालों और बिल जमा न करने वालों से निपटने की सरकार ने तैयारी कर ली है।

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नई दिल्‍ली. बिजली चोरी करने वालों और बिल जमा न करने वालों से निपटने की सरकार ने तैयारी कर ली है। अब ऐसा नहीं चलेगा कि लोग बिल भी जमा न करें और बिजली भी जलाते रहें। सरकार ने इससे निपटने के लिए हाईटेक तरीका खोज निकाला है। 


क्‍या है ये तरीका

मध्‍य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (MPPKVCVVCL) के इंजीनियर्स ने एक डिवाइज तैयार की है। यह डिवाइस बिजली के खंभे में लगाई जाएगी। इसमें एक सर्किट लगाया गया है जिसमें मोबाइल का सिम लगाया जाएगा। यह डिवाइस बिजली के पोल से हर कनेक्‍शन पर नजर रखेगी। जिसका भी बिल जमा नहीं होगा उसकी बिजली की आपूर्ति अधिकारी एक एसएमएस (SMS) से काट सकेंगे। बिल जमा होने के बाद उपभोक्‍ता की बिजली एक SMS से चालू भी कर दी जाएगी। SMS से बिजली काटने और बिजली जोड़ने का यह अधिकार चुनिंदा अध्‍ािकारियों को ही होगा। 

 

अभी तक क्‍या है तरीका

अभी तक बिजली काटने का तरीका काफी कठिन था। पहले अध्‍ािकारी रिकार्ड खोजते थे कि किसका बिल नहीं जमा है। बाद में उस घर पर लाइनमैन भेज कर बिजली का कनेक्‍शन काटने के लिए भेजा जाता था। कई बार लाइनमैन के जाने पर लोग झगड़ा करने लगते थे, और कनेक्‍शन नहीं काटने देते थे। 

 

पायलेट प्रोजेक्‍ट में मिली सफलता

इस डिवाइस का शुरू में मध्‍य प्रदेश के जबलपुर और नरसिंहगढ़ में पायलेट प्रोजेक्‍ट में सफलता मिली है। जबलपुर में विभाग ने 150 डिवाइज को इंस्‍टाल किया था, और नरसिंहगढ़ में 40 डिवाइस को लगाया था। दोनों ही जगहों पर परिणाम अच्‍छे मिले हैं, इसके बाद इनकी संख्‍या बढ़ाई जा रही है। इस पायलेट प्रोजेक्‍ट को मध्‍य प्रदेश के अलावा महाराष्‍ट्र और राजस्‍थान में भी चलाया जा रहा है। जल्‍द ही इसे अन्‍य राज्‍यों में भी शुरू किया जाएगा। 

 

 

कितनी आएगी लागत

अभी इस डिवाइस की लागत करीब 8500 रुपए है। एक बिजली के पोल पर अगर 10 कनेक्‍शन हैं तो प्रति उपभोक्‍ता लागत 850 रुपए रह जाएगी। अभी औसतन एक बिजली का कनेक्‍शन काटने में करीब 400 रुपए की लागत आती है, अगर इस डिवाइस का दो बार भी इस्‍तेमाल किया गया तो इसकी लागत निकल जाएगी। इंजीनियर्स का कहना है कि इस डिवाइस की लाइफ करीब 5 साल है। जिसके चलते इसका इस्‍तेमाल फायदेमंद है। हालांकि जबलपुर में इस डिवाइस के प्रयोग में पता चला है कि इसकी लागत करीब 4 माह में ही निकल आई है। 


 

आगे पढ़े : और कहां हो सकता है इस डिवाइस का इस्‍तेमाल 

 

 

स्‍ट्रीट लाइट को जलाने और बंद करने में हो सकता है इसका इस्‍तेमाल 

 

इंजीनियर्स का कहना है कि इस डिवाइस का इस्‍तेमाल स्‍ट्रीट लाइट के जलाने और बंद करने में हो सकता है। अभी यह सिस्‍टम पूरे देश में मैनुअल ही है। लेकिन इस डिवाइस से इसे मैनेंट किया जा सकता है। इससे बिजली की बर्बाद भी रुकेगी। इसके अलावा यह डिवाइस उन जगहों पर भी इस्‍तेमाल हो सकती है जहां समय के हिसाब से बिजली की आपूर्ति की जरूरत हो। 

 

इनाम भी पा चुकी है यह डिवाइस

यह डिवाइस डिजिटल इंपावरमेंट फाउनडेशन 2017 में इनाम भी पा चुकी है। इसको अर्ली स्‍टेज कैटेगरी में इनाम के लिए चुना गया था। 

 

बिजली रोकने की भी तैयारी

 

सरकार इससे पहले बिजली चोरी रोकने की तैयारी शुरू कर चुकी है। इसके तहत हर ट्रांसफार्मर से कितनी बिजली की आपूर्ति की जा रही है इसको जानने के लिए मीटर लगा रही है। इसके यह पता चल रहा है कि किस इलाके में कितनी बिजली की आपूर्ति की जा रही है। अब हर पोल पर कितनी बिजली खर्च हुई यह भी पता लग जाएगा। इस के बाद अब बिजली चोरी करना कठिन हो जाएगा। 

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