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गाय के गोबर से बनेगा डिस्टेंपर पेंट, कीमत होगी आधी

कई रंगों में उपलब्ध होगा डिस्टेंपर पेंट

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महेंद्र सिंह, नई दिल्ली। अब गाय के गोबर से डिस्टेंपर पेंट बनेगा। इसकी कीमत ब्रांडेड पेंट की तुलना में आधी होगी। मोदी सरकार इस प्रोडक्ट को जल्द ही लांच करने जा रही है। एमएसएमई मंत्रालय के अधीन काम करने वाले खादी ग्रामोद्योग  (केवीआईसी) ने इस तकनीक का सफल प्रयोग किया है। केवाआईसी के चेयरमैन वीके सक्सेना ने बताया कि जल्द ही हम गाय के गोबर से घरों में इस्तेमाल होने वाले डिस्टेंपर पेंट बनाना शुरू करेंगे। और यह डिस्टेंपर पेंट कई रंगों में उपलब्ध होगा। 

उन्होंने बताया कि जयपुर स्थित केवीआईसी की यूनिट केएनएचपीआई ने गोबर से डिस्टेंपर बनाने में सफलता हासिल की है। इसके लिए गाय के अलावा बैल या भैंस के गोबर का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इस पेंट का इस्तेमाल प्रमुख तौर पर घरों को पेंट करने में किया जाएगा। आम तौर पर  गाय के गोबर को पवित्र माना जाता है। ऐसे में इस पेंट की लोकप्रियता तेजी से बढ़ सकती है। 

 

 गोबर से बनेगा कागज 

 

इसके अलावा खादी ग्रामोद्योग (केवीआईसी) की यूनिट केएनएचपीआई ने तो गाय के गोबर (cowdung) से कागज का उत्पादन भी शुरू कर दिया है। अब देश भर में इस प्रकार के प्लांट लगाने की योजना तैयार की जा रही है। कागज बनाने के लिए गोबर के साथ कागज के चिथड़े का इस्तेमाल किया जाता है।

 

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गोबर से वेजिटेबल डाई बनाने का भी काम

 

गोबर से कागज बनाने के साथ वेजिटेबल डाई बनाने का भी काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि गोबर में से कागज बनाने लायक सिर्फ 7 फीसदी मैटेरियल निकलते हैं। बाकी के 93 फीसदी का इस्तेमाल वेजिटेबल डाई बनाने में इस्तेमाल किया जाएगा। ये वेजिटेबल डाई पर्यावरण के अनुकूल होते हैं। इसका निर्यात भी किया जा सकता है।

 

5 रुपये किलो बिकेंगे गोबर

 

यह स्कीम किसानों की आय को दोगुना करने के लिए लाई जा रही है। उन्होंने बताया कि कागज एवं विजिटेबल डाई बनाने के लिए सरकार 5 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से किसानों से गोबर खरीदेगी। एक जानवर एक दिन में 8-10 किलोग्राम गोबर करता है। ऐसे में, किसानों को अपनी मवेशियों से रोजाना कम से कम 50 रुपये तक की अतिरिक्त कमाई हो सकती है।

 

कहां-कहां लगेंगे प्लांट  

 

सक्सेना ने बताया कि इस प्रकार के प्लांट देश भर में लगाने की योजना है। निजी लोगों को इस प्रकार के प्लांट लगाने के लिए सरकार की तरफ से कर्ज मुहैया कराए जाएंगे। उन्होंने बताया कि केवीआईसी ने इस टेक्नोलॉजी  का सफल परीक्षण कर लिया है और केवीआईसी लोगों को टेक्नोलॉजी देने का काम करेगा। उन्होंने बताया कि केवीआईसी के जयपुर स्थित केएनएचपीआई प्लांट में अगले 15-20 दिनों में गोबर से कागज बनाने का काम आरंभ हो जाएगा।

 
15 लाख में लग जाएंगे ये प्लांट

 

गोबर से कागज बनाने वाले प्लांट लगाने में 15 लाख रुपये खर्च होंगे। एक प्लांट से एक माह में 1 लाख कागज के बैग बनाए जा सकते हैं। इसके अलावा वेजिटेबल डाई अलग।

 

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