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FMCG सेक्टर को गांवों से मिलेगा बूस्ट, FY19 में 4% तक बढ़ सकती है इनकमः क्रिसिल


मुंबई.  ग्रामीण क्षेत्र में डिमांड बढ़ने से वित्त वर्ष 2018-19 में फास्‍ट मूविंग कंज्‍यूमर गुड्स (FMCG) सेक्‍टर की टॉप लाइन ग्रोथ 3 से 4 फीसदी बढ़कर 11 से 12 फीसदी हो सकती है। देश में इस सेक्‍टर का साइज करीब 3.4 लाख करोड़ रुपए का है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने यह अनुमान व्‍य‍क्‍त किया है। 

 

2018 में रही थी 8 फीसदी ग्रोथ 

FMCG की रेवेन्‍यू में ग्रोथ वित्त वर्ष 18 में करीब 8 फीसदी रही थी, जबकि वित्त वर्ष 19 में यह 11 से 12 फीसदी रह सकती है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के अनुसार इसका सबसे बड़ा कारण ग्रामीण क्षेत्र में मांग का बढ़ना है। इसके अलावा कंपनियां नए नए उत्‍पाद भी लॉन्च कर रही हैं। इससे कंपनियों का आपरेटिंग प्रॉफिट बढ़ेगा, जिससे उनकी क्रेडिट प्रोफाइल सुधरेगी। 

 

 

MSP और अच्‍छे मानसून से हालात बेहतर

सरकार की तरफ से कृषि उपज के लिए मिनिमम सपोर्ट प्राइज (MSP) को बढ़ाया गया है और मानसून भी अच्‍छा रहा है। इसके अलावा नॉन एग्रीकल्‍चर रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। इससे ग्रामीणों की डिस्‍पोजेबल इनकम बढ़ी है, जिससे डिमांड बढ़ेगी। 

 

 

हर्बल उत्‍पाद भी लॉन्च कर रहे

वही कंपनियों की तरफ से लगातार नए नए उत्‍पाद लॉन्च किए जा रहे हैं। इनमें आयुर्वेद और हर्बल के उत्‍पाद भी शामिल हैं। इससे भी डिमांड बढ़ने की उम्‍मीद है। ग्रामीण बाजार कंपनियों की बिक्री में करीब 40 से 45 फीसदी हिस्‍सेदारी रखता है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र में डिमांड बढ़ने से कंपनियों की वित्त वर्ष 2018-19 में टोटल इनकम 15 से 16 फीसदी बढ़ सकती है। 2018 में इसमें 10 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई थी। क्रिसिल के अनुसार वित्त वर्ष 2016 और वित्त वर्ष 2017 में यह ग्रोथ 5 फीसदी के आसपास रही थी। 

 

 

शहरों में 8 फीसदी रहेगी रेवेन्‍यूू ग्रोथ

वहीं शहरी क्षेत्र में 2019 में रेवेन्‍यू ग्रोथ 8 फीसदी रहने की उम्‍मीद है। मिड साइज और मीडियम साइज की कंपनियों को ज्‍यादा फायदा रहने की उम्‍मीद है, क्‍योंकि उनके GST रिजीम में उनके पास बेहतर आपरेटिंग इफीशियंसी मानी जा रही है। इसके चलते ऐसी कंपनियों की ग्रोथ 15 से 17 फीसदी रहने की उम्‍मीद है। 

 

 

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