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कर्ज में डूबे टेलीकॉम सेक्टर को बड़ी राहत, कैबिनेट ने रिलीफ पैकेज को दी मंजूरी

कर्ज के बोझ से परेशान टेलीकॉम सेक्‍टर के लिए कैबिनेट ने बुधवार को राहत पैकेज को मंजूरी दे दी।

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नई दिल्‍ली. प्राइस वार के चलते कर्ज के बोझ से दबे टेलीकॉम सेक्‍टर के लिए कैबिनेट ने बुधवार को राहत पैकेज को मंजूरी दे दी। अब कंपनियां स्‍पेक्‍ट्रम की फीस 10 की जगह 16 किस्‍तों में दे सकेंगी। इसके अलावा कंपनियां अब एडीशन स्‍पेक्‍ट्रम को अपने पास रख सकेंगी। इन दोनों फैसलों से कर्ज में डूबी कंपनियों का कैश फ्लो बढ़ेगा जिससे वह अपना कामकाज आसानी से चला सकेंगी। रिलायंस जियो की इंट्री के बाद से देश में टेलीकॉम सेक्‍टर प्रासइ वार से जूझ रहा है। इसके चलते टाटा और कुछ और कंपनियां इस कारोबार से बाहर निकल गई हैं। 

 

-कैबिनेट के फैसले के बाद कंपनियों का मर्जर और खरीद बिक्री आसानी से हो सकेगी। 
-कंपनियां अपना स्‍पेक्‍ट्रम अासानी से बेच सकेंगी। 
-टेलीकॉम कंपनियां आसानी से अपनी आसेट भी  बेच सकेंगी। 
-इससे मिले से पैसों से यह कर्ज कोचुकाने में इस्‍तेमाल कर सकेंगी। 

 

 

कैबिनेट के बाद अधिकारियों ने बताया कि इस सेक्‍टर के लिए दो बड़े फैसले लिए गए हैं। यह सेक्‍टर इस वक्‍त करीब 4.6 लाख करोड़ रुपए के कर्ज के बोझ से दबा हुआ है। कैबिनेट के फैसलों में स्‍पेक्‍ट्रम पेमेंट को चुकाने के लिए समय बढ़ाया जाना और स्‍पेक्‍ट्रम की होल्डिंग कैप को बढ़ाने कंपनियों को जहां संचालन में आसानी होगी वहीं इनका कैश फ्लो तुरंत सुधरेगा।

 

 

IMG ने की थी सिफारिश

कैबिनेट ने आज टेलीकॉम सेक्‍टर के लिए जो पैकेज मंजूर किया है उसकी सिफारिश इंटर मिनिस्‍ट्रीरियल ग्रुप (IMG) ने की थी। पिछले साल कर्ज के बोझ से जूझ रहे टेलीकॉम सेक्‍टर को दिक्‍कतों से उबारने के लिए इस ग्रुप का गठन किया गया था। इस ग्रुप से पॉलिसी रिफॉर्म्‍स और स्‍ट्रैटिक इंटरवेंशन पर सुझाव देने के‍ लिए कहा गया था। इस सेक्‍टर में अचानक कॉल रेट घटने से कंपनियों का प्रॉफिट तेजी से कम होने लगा था।

 

 

16 साल में चुकाना होगा स्‍पेक्‍ट्रम फीस 

कंपनियों को स्‍पेक्‍ट्रम फीस चुकाने के लिए अब 16 साल का समय मिलेगा। अभी कंपनियों को यह फीस 10 साल में चुकानी थी। टेलीकॉम कमीशन ने ट्राई की उस सिफारिश को पहले ही मान लिया था जिसमें कंपनियों को हर बैंड में अतिरिक्‍त स्‍पेक्‍ट्रम रखने की छूट दी गई है।

 

 

स्‍पेक्‍ट्रम सीमा हटाने का मिलेगा फायदा 

पहले ट्राई ने टेलिकॉम कमिशन से सिफारिश की थी कि मोबाइल कंपनियों के पास मौजूद एक विशेष बैंड के स्पेक्ट्रम की सीमा को हटा दिया जाना चाहिए। रेग्युलेटर ने 700 मेगाहर्ट्ज, 800 मेगाहर्ट्ज और 900 मेगाहर्ट्ज जैसे इफीसिएंट बैंड में कुल रेडियोवेव होल्डिंग पर 50 फीसदी की कैप लगाने का सुझाव दिया था। इसे कैबिनेट में स्‍वीकार कर लिया गया है। मौजूदा नियमों के तहत कोई भी मोबाइल सर्विस प्रोवाइडर किसी एरिया में 25 फीसदी और एक फ्रीक्वेंसी बैंड में 50 फीसदी से ज्यादा स्पेक्ट्रम नहीं रख सकता है। 

 

 
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