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दिलेर बेगम का महल बन गया सबसे बड़ा इलेक्ट्रिाॅनिक मार्केट, 4000 से अधिक दुकानें

अरबों के कारोबार वाले इस बाजार में मिलते हैं हर प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक्स सामान

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वर्षा पाठक

नई दिल्ली। दिलेर बेगम समरू का महल भारत का सबसे बड़ा इलेक्ट्राॅनिक बाजार बन गया है। हम बात कर रहे हैं पुरानी दिल्ली के चांदनी चौक स्थित इलेक्ट्राॅनिक माॅर्केट भागीरथ पैलेस की। कभी आलीशान दिखने वाला यह महल आज बाजार में तब्दील हो गया है। इस बाजार में 4,000 से अधिक इलेक्ट्राॅनिक्स दुकानें हैं जहां अरबों रुपए का कारोबार होता है। भागीरथ मार्केट के प्रधान भारत आहूजा Moneybhaskar.com से कहते हैं,  ‘भागीरथ पैलेस इलेक्ट्राॅनिक्स आइटम्स की होलसेल और रिटेल का सबसे बड़ा बाजार है। 200 साल पहले यह बाजार बेगम समरू का महल हुआ करता था। इस महल की झलक आज भी यहां देख सकते हैं। महल की दीवारें, छत की आकृति को हूबहू देखा जा सकता हैं।’

 

इन सामानों की करें खरीदारी 

इस बाजार में चीनी लाइट से लेकर साउंड बॉक्स, स्विच, झूमर, माेबाइल फोन्स एक्सेसरीज, फैन समेत हर प्रकार के इलेक्ट्राॅनिक्स सामान की खरीदारी सस्ते दामों पर कर सकते हैं।

 

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इन चार सिनेमा हाॅल्स के गेट से होती है इस बाजार में एंट्री

इस बाजार में एंट्री करने के लिए चार गेट हैं। आपको यह जानकार हैरानी होगी कि यहां एंट्री के लिए सिनेमा हाॅल के एंट्री गेट से होकर गुजरना पड़ता है। हालांकि भीड़ और संकीर्ण गली होने की वजह से अधिकतकर लोग इसे समझ नहीं पाते हैं। इन चार सिनेमा हाॅल्स में से तीन बंद हो चुके हैं लेकिन एक सिनेमा हाॅल आज भी चल रहा है।

ये चार सिनेमा हाॅल्स हैं, जुबली, मैजिस्टिक, कुमार और मोती। इसमें जुबली, मैजिस्टिक और मोती बंद हाे चुके हैं, कुमार सिनेमा हाॅल चल रहा है।

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बाजार की चाट पापड़ी भी मशहूर

बाजार की चाट पापड़ी भी मशहूर

अगर आप भागीरथ मार्केट जाते हैं तो यहां आप चाट-पापड़ी खाना ना भूलें। यहां की चाट-पापड़ी पूरे चांदनी चौक में सबसे मशहूर है।

बेगम समरू के बारे में

बेगम समरू अपनी खूबसूरती और दिलेरी की वजह से मशहूर थी। बेगम के पति की मौत के बाद सरधना जागीर की बागडोर मुगल बादशाह शाहआलम द्वितीय ने बेगम समरू के हाथों में सौंप दी थी। बादशाह का यह फैसला सही साबित हुआ। गुलाम कादिर ने जब बादशाह के खिलाफ बगावती तेवर दिखाए तो बेगम ने उसके दांत खट्टे कर दिए। अगले ही साल बेगम ने गोकुलगढ़ के सरदार नजफ कुली खां के साथ हुए युद्ध में बादशाह की जान बचाई थी। इससे खुश होकर बादशाह ने बेगम को 'जय-बुल निसा' और 'मेरी सबसे प्यारी बेटी' जैसे खिताब से नवाजा था।

 

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