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नोटबंदी पर मोदी सही या मनमोहन, 5 प्वाइंट में समझें

एक्सपर्ट की राय

benefits or losses due to demonetisation

नई दिल्ली।  नोटबंदी के 2 साल पूरे हो गए हैं। आज के दिन यानी 8 नवंबर को ही दो साल पहले मोदी सरकार ने नोटबंदी का फैसला किया था। मोदी सरकार दो साल के बाद नोटबंदी का एक बड़ा सुधार बता रही है। सरकार का दावा है कि नोटबंदी की वजह से बड़े पैमाने पर कैश फॉर्मल इकोनॉमी में आया है। बैंक अकाउंट में बिना हिसाब का पैसा  जमा कराने वालों से टैक्स वसूल किया जाएगा। वहीं पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने नोटबंदी के कदम को बीमार सोच वाला और मनहूस कदम बताया है उनका कहना है कि इससे देश की अर्थव्वस्था को नुकसान हुआ और छोटे कारोबारियों को के सामने बड़ा संकट पैदा हो गया। आज हम एक्सपर्ट के जरिए बता रहे हैं कि नोटबंदी पर मोदी सरकार का दावा कितना सच है और मनमोहन सिंह का दावे के मायने क्या हैं। 

 

संगठित क्षेत्र का हुआ विस्तार 

 

एचडीएफसी बैंक के चीएफ इकोनॉमिस्ट अभीक बरुआ ने moneybhakar.com को बताया कि नोटबंदी के बाद अर्थव्यवस्थाा में संगठित क्षेत्र का विस्तार हुआ है। यानी पहले अर्थव्यवस्था का फॉर्मलाइजेशन हुआ है। पहले जो लोग असंगठित क्षेत्र में काम कर रहे थे अब वे अर्थव्यवस्था की मुख्यधारा से जुड़े गए हैं। इससे ऐसी कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों को भी फायदा हुआ है जो संगठित क्षेत्र में आ गई हैं। इन कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों को पीएफ और पेंशन जैसी सुविधाएं मिलने लगी हैं। असंगठित क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों के कर्मचारियों को यह सुविधाएं नहीं मिलती हैं। 

 

सिस्टम में आ गया पूरा पैसा 

 

अभीक बरुआ का कहना है कि रिजर्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक नोटबंदी के पहले जितनी कीमत के नोट सिस्टम में था लगभग उतनी ही कीमत के नोट  बैंकिंग सिस्टम में वापस आ गए हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि फिर काला धन कहां गया। सरकार का आकलन था कि कुल नोट का 10 से 15 फीसदी सिस्टम में वापस नहीं आएगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ है। लेकिन यह माननाा कि जो पैसा बैंकिंग सिस्टम में आया है वह पूरी तरह से वैध है गलत है। सरकार लाखों संदिग्ध ट्रांजैक्शन की जांच कर रही है। आने वाले समय में यह पता चलेगा कि इसमें से कितना पैसा वैध या कितना पैसा अवैध। 

 

टैक्स बेस बढ़ा 

 

अभीक बरुआ का कहनाा है कि नोटबंदी का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ है कि टैक्स बेस बढ़ा है। टैक्स जीडीपी रेशियो में भी 1 फीसदी का इजाफा हुआ है। इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने वालों की संख्या बढ़ी है। इसके अलावा डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन भी बढ़ा है। हालांकि टैक्स मोर्चे पर नोटबंदी का पूरा फायदा दिखने में समय लगेगा। इसका कारण यह है कि नोटबंदी के दौरान सिस्टम में आए पैसे की जांच पड़ताल अभी जारी है। इसकी जांच पूरी होने पर ही नोटबंदी के बारे में सही निष्कर्ष निकाला जा सकता है। 

 

कैश में काम करने वालों को हुआ नुकसान 

 

नोटबंदी की वजह से इंडस्ट्री को नुकसान भी हुआ है। इसका कारण यह है कि बहुत से लोग कैश में काम कर रहे थे। नोटबंदी के बाद कैश में काम करना संभव नहीं रह गया। इसकी वजह से तमाम लोगों की नौकरियां गईं। कारोबारियों ने डर की वजह से काम रोक दिया या काम का विस्तार नहीं किया। हालांकि अब इसका असर खत्म हो चुका है। 

 

लंबी अवधि में होगा फायदा 

 

अभीक बरुआ का कहना है कि आर्थिक सुधारों का फायदा लंबी अवधि में होता है और राजनीतिक तौर पर यह सरकारों के लिए फायदेमंद नहीं होता है। नोटबंदी की वजह से देश में टैक्स नियमों का अनुपालन बढ़ रहा है और लंबी अवधि में इसका फायदा अर्थव्यवस्था का होगा। 

 

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