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Home » Economy » PolicyYogi government imposed new cess on liquar and toll for cow protection

शराब पीएंगे तो गाय को भी देना होगा दान, योगी सरकार का नया फरमान

कैबिनेट ने दी मंजूरी, प्रत्येक नगर निकाय-पंचायत में बनेंगी गोशाला

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नई दिल्ली। गायों के संरक्षण को लेकर हमेशा मुखर रहने वाली उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने अब इनके संरक्षण के लिए नई योजना बनाई है। इस योजना के तहत योगी सरकार प्रदेश के सभी नगर निकायों तथा गांवों में अस्थायी गौशाला खोलेगी। इस प्रस्ताव को कैबिनेट ने भी मंजूरी दे दी है। नए प्रस्ताव के अनुसार, गायों के संरक्षण के लिए प्रदेश की योगी सरकार शराब और राज्य के टोलों पर 0.5 फीसदी का अतिरिक्त उपकर लगाएगी। साथ ही सरकार ने उत्पाद शुल्क पर दो फीसदी का उपकर लगाया है। 

 

गोकशी रोकने में मिलेगी मदद
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई। सरकार के प्रवक्ता एवं ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने बताया कि सरकार ने नगर निकाय के साथ ही गांव में भी अस्थाई गोशाला खोलने का निर्णय लिया है। सभी निकाय के साथ ग्राम, क्षेत्र, जिला पंचायत, नगरपालिका, नगर पंचायत और नगर निगमों में आस्थाई गोशाला खोली जाएंगी। सरकार ने आवारा गोवंश की समस्या के समाधान के लिए कदम उठाया गया है। सरकार की प्रतिबद्धता साफ है कि गोकशी नहीं होने दी जाएगी और आवारा पशुओं का नियमन किया जाएगा।

 

ग्राम पंचायतों में बनेंगे गोसंरक्षण सदन

उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायत स्तर पर सरकारी जमीन उपलब्ध होने पर गोसरंक्षण सदन बनेंगे। इसके लिए मनरेगा के माध्यम से ग्राम पंचायत, विधायक, सांसद निधि से निर्माण कराया जाएगा। सरकार ने इसके लिए स्थानीय निकाय को 100 करोड़ रुपया दिया है। जिलों में ग्रामीण क्षेत्रों और नगरीय क्षेत्र में न्यूनतम 1000 निराश्रित पशुओं के लिए आश्रय स्थल बनेगा। इसके वितीय प्रबंधन के लिए आबकारी विभाग दो फीसदी गोकल्याण सेस लगाएगा। इसके साथ ही यूपीडा, निर्माण निगम, यूपीएसआईडीसी व सेतु नगम समेत अन्य लाभकारी संस्थान अपने लाभ का 0.5 फीसदी गोकल्याण के लिओ देंगे। वहीं मंडी परिषद भी अपने लाभ का दो फीसदी इस मद में देगी। शर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि राज्य में किसी भी कीमत पर गोहत्या की अनुमति नहीं दी जाएगी। ये अस्थायी आश्रय गृह गायों, बैलों तथा अन्य जानवरों की देखभाल करेंगे।

स्थानीय निकाय और पंचायत करेंगे प्रबंधन


पशुपालन मंत्री एस पी सिंह बघेल ने कहा कि नीति के तहत सभी गांवों और शहरी क्षेत्रों में अस्थायी गौशाला स्थल होंगे। इनका निर्माण और प्रबंधन ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायतों द्वारा किया जाएगा और शहरी क्षेत्रों में शहरी स्थानीय निकायों द्वारा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसके लिए धन की कोई कमी नहीं होगी। आठ विभाग इसके लिए धन उपलब्ध कराएंगे। आबकारी में अतिरिक्त उप कर और मंडी परिषद निधि में बढ़ोतरी के साथ-साथ टोलों से भी इसके लिए धन दिया जाएगा। मंडी परिषद जो सालाना 17 करोड़ रुपए देती थी, उसका हिस्सा बढ़कर 34 करोड़ हो गया है। इसके अलावा राज्य सरकार ने 75 जिलों में से प्रत्येक में 100 करोड़ रुपए उपलब्ध कराए हैं।

सड़क दुर्घटनाओं में भी आएगी कमी


बघेल ने कहा कि आवारा पशु ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में एक बड़ी समस्या है, जिससे सड़क दुर्घटनाओं में वृद्धि और फसल को नुकसान होता है। उन्होंने कहा कि इन आश्रय घरों के निर्माण के लिए अधिकतम काम सरकारी भूमि पर मनरेगा के माध्यम से किया जाएगा। शहरी स्थानीय निकायों को पशु रखने के लिए प्रति माह 30 रुपए प्रति पशु दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि एक अनुमान के अनुसार, प्रत्येक गांव में 1000 आवारा पशुओं की देखभाल की जाएगी, जबकि ज्यादातर गायों को ब्लॉक, तहसील, जिला, मंडल और राज्य स्तर पर रखा जाएगा। 

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