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WTO मीटिंग: भारत-दक्षिण अफ्रीका आए साथ, 5 मसलों पर उठाएंगे समान कदम

विशेष तौर पर फूड सिक्‍योरिटी को लेकर पब्लिक स्‍टॉकहोल्डिंग प्रोग्राम्‍स के लिए स्‍थायी समाधान निकालने पर सहमति बनी।

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ब्‍यूनस आयर्स. फूड सिक्‍योरिटी प्रोग्राम्‍स पर भारत की गोलबंदी तेज होती जा रही है। रविवार को अर्जेंटीना की राजधानी ब्‍यूनस आयर्स में शुरू हुई वर्ल्‍ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन (WTO) की 11वीं मिनिस्‍टीरियल मीटिंग में भारत और दक्षिण अफ्रीका ने 5 गंभीर मसलों पर समान कदम उठाने पर सहमति जताई। यह सहमति विशेष तौर पर फूड सिक्‍योरिटी प्रोग्राम्‍स को लेकर पब्लिक स्‍टॉकहोल्डिंग प्रोग्राम्‍स के लिए प्रभावी स्‍थायी समाधान निकालने पर जताई गई। इसके अलावा चार अन्‍य मसलों पर भी दोनों देशों ने एक से कदम उठाने की बात कही। इनमें कृषि सब्सिडी घटाने के लिए डॉमेस्टिक सहयोग के विश्‍वसनीय नतीजे, 1998 वर्क प्रोग्राम पर आधारित मौजूदा इलेक्‍ट्रॉनिक कॉमर्स शासनादेश में बदलाव का विरोध, इन्‍वेस्‍टमेंट फैसिलिटेशन का विरोध, एमएसएमई के लिए नए नियम लाने का विरोध और दोहा वर्क प्रोग्राम पर आधारित विकासात्‍मक नतीजों के लिए वर्ल्‍ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन की प्रमुख भू‍मिका की पुष्टि शामिल हैं। 
 

कई मुद्दों पर नहीं बनी आम सहमति 

दक्षिण अफ्रीका के ट्रेड मिनिस्‍टर रॉब डेविस ने कहा कि दक्षिण अफ्रीका और भारत कई मसलों पर सहमत हैं और इनमें से कुछ को लेकर कड़े कदम उठाने की जरूरत है। भारत के कॉमर्स मिनिस्‍टर सुरेश प्रभु से मिलने के बाद डेविस ने कहा कि ऐसे कई मुद्दे और कई प्रस्‍ताव हैं, जिन पर अभी आम सह‍मति नहीं है। फूड सिक्‍योरिटी को लेकर पब्लिक स्‍टॉकहोल्डिंग प्रोग्राम्‍स के लिए स्‍थायी समाधान की जरूरत है ताकि गरीब किसानों और गरीब लोगों के लिए प्रोग्राम लाए जा सकें। 
 

कृषि सब्सिडी घटाने और PSH के नतीजों का न हो आपसी संबंध 

डेविस ने कहा कि ब्राजील जैसे कुछ बड़े औद्योगिक और विकासशील देश मांग कर रहे हैं कि कृषि के लिए डॉमेस्टिक सब्सिडी घटाई जाए लेकिन इसका और पब्लिक स्‍टॉकहोल्डिंग प्रोग्राम्‍स (PSH) के परिणामों का आपस में कोई संबंध नहीं होना चाहिए। इसके लिए स्‍थायी समाधान निकालना अलग मुद्दा है। उन्‍होंने कहा कि दक्षिण अफ्रीका कृषि उत्‍पादों पर एक्‍सपोर्ट प्रतिबंधों के फैसले से भारत की तरह ही सहमत नहीं है। सिंगापुर की अगुवाई में कुछ देश कृषि उत्‍पादों के एक्‍सपोर्ट पर बड़े पारदर्शी उपायों की भी मांग कर रहे हैं। 
 

मौजूदा ई-कॉमर्स प्रोग्राम में नए बदलाव पर नहीं करेंगे सहयोग 

ब्‍यूनस आयर्स में यूरोपीय यूनियन समेत 50 देशों ने ई-कॉमर्स पर नए शासनादेश को अपनाने पर जोर दिया लेकिन दक्षिण अफ्रीकी मंत्री ने कहा कि वह मौजूदा प्रोग्राम में बदलाव पर सहमति नहीं देंगे। बता दें कि ई-कॉमर्स पर मौजूदा 1998 वर्क प्रोग्राम को जारी रखने वाले देशों में भारत के अलावा और 100 देश हैं, जिनमें भारत इसका सबसे मजबूत समर्थक है। डेविस ने यह भी कहा कि हम एमएसएमई के लिए इन्‍वेस्‍टमेंट फैसिलिटेशन और नए नियमों को लेकर भी सहयेाग नहीं करेंगे। 
 

WTO की बनी रहेगी अहम भूमिका 

WTO की भूमिका को अहम बताते हुए डेविस ने कहा कि दक्षिण अफ्रीका और भारत यह विश्‍वास दिलाना चाहते हैं कि WTO बहुपक्षीय व्‍यापार प्रणाली का केन्‍द्र बना रहेगा और यह मीटिंग के दोहा डेवलपमेंट एजेंडा में अनसुलझे मुद्दों का समाधान निकालेगा। 
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