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Home » Economy » PolicyWomen's Day special: Increasing trend in India is the trend of borrowing by women; 48% increase in the last three years

Women Day Special: रईसी के लिए यहां की महिलाएं लेती हैं सबसे ज्यादा कर्ज

महिला दिवस विशेष: भारत में बढ़ रही है महिलाओं द्वारा कर्ज लेने की प्रवृत्ति, बीते तीन साल में 48 फीसदी का हुआ इजाफा 

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नई दिल्ली. 
अमीर बनने की ख्वाहिश, कार, टू-व्हीलर और लक्जरी लाइफस्टाइल जीने का ट्रेंड भारत की महिलाओं में भी बढ़ने लगा है। वे अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए लोन लेने में संकोच नहीं कर रही हैं। यही वजह है कि बीते तीन सालों 2015 से 2018 के बीच कर्ज लेने वाली महिलाओं की संख्या में 48 फीसदी का इजाफा हो गया है। उन्होंने पुरुषों को भी पीछे छोड़ दिया है। पुरुषों की कर्ज लेने की दर में महज 35 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। यह जानकारी ट्रांसयूनियन सिबिल द्वारा कराए गए एक अध्ययन में सामने आई है। 

 

यहां की महिलाएं सबसे ज्यादा ले रही है कर्ज 


रिपोर्ट के मुताबिक उधार लेने के लिए महिलाएं प्रति वर्ष लगभग 86 लाख नए खाते खोल रही हैं। इनमें से 66 प्रतिशत महिलाएं दक्षिणी भारत के  तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक से हैं। सबसे ज्यादा तमिलनाडु में 27 फीसदी, केरला में 13, महाराष्ट्र में 9, कर्नाटक में 7 और अन्य राज्यों में 34 प्रतिशत है। यहां महिलाएं स्वावलंबी होने के साथ अपने व्यापार को बढ़ाने और अपनी निजी जरूरतों को पूरा करने के लिए कर्ज लेने में हिचकिचाती नहीं हैं। वे नए उद्यम स्थापित करने के लिए बिजनेस लोन को तरजीह दे रही हैं। 

 

सबसे ज्यादा गोल्ड लोन की डिमांड 


महिलाओं में सोने के प्रति अभी भी आकर्षण बरकरार है। वे या तो सोना खरीदने के लिए लोन लेती है या फिर इसे गिरवी रखकर अपने शौक पूरे करती हैं। गोल्ड लोन (या लोन अंगेस्ट गोल्ड) अभी भी 5.64 करोड़ खातों के साथ सबसे आगे है। हालांकि 2018 में इसमें 13 प्रतिशत की गिरावट आई है। इसके बाद बिजनेस लोन का नंबर आता है। 

 


 

इस आंकड़े से समझे क्यों लोन ले रही है महिलाएं 


वर्ष 2017-18 में  बिजनेस के अलावा कंज्यूमर लोन सबसे ज्यादा 31 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। यानी महिलाओं का झुकाव खरीदी की तरफ ज्यादा है। वे नए मोबाइल फोन, फ्रिज, फर्नीचर आदि के लिए लोन ले रही हैं। इसके बाद  पर्सनल लोन में 19 प्रतिशत और फिर टू-व्हीलर में 14 प्रतिशत कर्ज की बढ़ोतरी हुई है।

 

छोटे उद्योग चलाने वाली महिला मालिकों वाले राज्य आगे 

 

ट्रांसयूनियन सिबिल की सीओओ हर्षला चंदोरकर कहती हैं कि महिलाओं की ओर से  कर्ज संबंधी मांग में वृद्धि से क्रेडिट उद्योग के सामने एक नया अवसर आया है। यह इंडस्ट्री अब और ज्यादा उत्पाद महिलाओं के हिसाब से बना सकती है। उनके मुताबिक यह देखना वाकई उत्साहजनक है कि बिजनेस लोन की ज्यादातर डिमांड ऐसे राज्यों से आ रही है, जहां महिला एमएसएमई मालिकों की संख्या सबसे अधिक है। सरकार की महिला केंद्रित वित्तीय नीतियों ने भी इस वृद्धि को और आगे ले जाने में मदद की है। 

 

 

कर्ज चुकाने में भी अव्वल 


ट्रांसयूनियन सिबिल की वाइस प्रेसीडेंट और हैड ऑफ डायरेक्ट टू कंज्यूमर इंटरएक्टिव सुजाता अहलावत कहती है कि यह देखना वाकई बहुत उत्साहजनक है कि आज अधिक से अधिक महिलाएं  कर्ज  हासिल करने की कोशिश कर रही हैं। यही नहीं, उनके संबंधी जागरूकता में भी वृद्धि हो रही है।  लगभग 38 प्रतिशत महिला उधारकर्ता नियमित तौर पर अपने सिबिल स्कोर की निगरानी कर रही हैं। यानी वे वक्त पर न सिर्फ कर्ज चुका रही हैं बल्कि नए कर्ज भी ले रही हैं। 

 

ज्यादा उम्र के साथ जिम्मेदारी भी बढ़ी 


कर्ज के लिए अमूमन 750 क्रेडिट स्कोर की जरूरत होती है लेकिन भारतीय महिलाओं का स्कोर इससे ज्यादा 770 है। महिलाएं बढ़ती उम्र के साथ इसमें और सजग हो रही है। 35 वर्ष तक की महिलाओं का स्कोर औसत क्रेडिट स्कोर 773 था, जबकि 35 से 45 वर्ष की उम्र के बीच की महिलाओं का स्कोर 776 था, और 45 वर्ष से अधिक आयु वालों का उच्चतम औसत स्कोर 785 था।  देश में तमिलनाडु और केरल ऐसे राज्य हैं, जहां औसत स्कोर 781 है। 

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