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खास खबर: आम आदमी क्यों सहे पेट्रोल-डीजल का सारा बोझ, जब सरकार के पास है रास्ता

पेट्रोल-डीजल की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर हैं। दिल्‍ली में पेट्रोल 76.87 और डीजल 68.08 रुपए प्रति लीटर बिक रहा है..

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नई दिल्‍ली। पेट्रोल-डीजल की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर हैं। राजधानी दिल्‍ली में मंगलवार को पेट्रोल 76.87 रुपए और डीजल 68.08 रुपए प्रति लीटर बिक रहा था। ऊंची कीमतों के चलते सरकार पर लगातार इस बात का दबाव है कि वह एक्साइज ड्यूटी में कटौती करे। हाल में पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के बयान से संकेत मिला है कि सरकार एक्‍साइज ड्यूटी घटाकर थोड़ी राहत दे सकती है। अक्‍टूबर 2017 में सरकार ऐसा कर भी चुकी है। 2014 में क्रूड की कीमतें नीचे जाने के बाद मोदी सरकार ने 1 दर्जन से ज्‍यादा बार पेट्रोल-डीजल पर एक्‍साइज ड्यूटी बढ़ाई थी। अब कीमतें ऊपर जाने के बाद वह खामोश है। 

 

एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि कीमतों का सारा बोझ उपभोक्‍ताओं पर डालना सही नहीं है। एक्‍साइज ड्यूटी कम करने का यही समय है। हालांकि बड़ा सवाल यह है कि ऐसे समय में जब सरकार राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने की जीतोड़ कोशिश कर रही है तो एक्‍साइज ड्यूटी कम करने की गुंजाइश कहां तक है। एक विकल्‍प यह हो सकता है कि सरकार बैठकर क्रूड की कीमतें कम होने का इंतजार करे। पर क्‍या अंतराष्‍ट्रीय हालात ऐसे हैं कि इंतजार किया जा सकता है। ऐसा पहली बार भी नहीं हुआ जब सरकार के सामने इस तरह का संकट आया है, उसके पास आखिर लॉन्‍च टर्म का प्‍लान क्‍या होना चाहिए। पेट्रोलियम प्रोडक्‍ट की बड़ी कीमतों ने आम लोगों के मन में कई सवाल पैदा कर दिए हैं। मनीभास्‍कर की खास खबर में पेट्रोल डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी और इससे अन्‍य पहलुओं की पड़ताल करते हैं। 

 

 

3 महीने में कहां पहुंची कीमत ?  

 

#1- रिटेल प्राइस: अगर बीते 3 महीनों की बात करें तो पेट्रोल की खुदरा कीमतों में करीब 5 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोत्तरी देखने को मिली है। इंडियन ऑयल की वेबसाइट के मुताबिक, 1 मार्च को राजधानी दिल्‍ली में पेट्रोल की कीमतें 71.57 रुपए प्रति लीटर पर थीं, ये अब बढ़कर 76.87 रुपए प्रति लीटर पर पहुंच चुकी हैं। 1 मार्च को डीजल की कीमतें 62.25 रुपए प्रति लीटर पर थीं, जो अब बढ़कर 67.82 रुपए प्रति लीटर के लेवल पर आ गई हैं। 

 

#2- इंटरनेशनल प्राइस: क्रूड की कीमतों में भी लगातार तेजी देखी गई है। मार्च की शुरुआत में कीमतें 65 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थीं। तेजी से बदले अंतरराष्‍ट्रीय हालात, कोरिया संकट, ट्रेड वॉर, ईरान संकट के चलते बढ़ी डिमांग, ओपेक और गैर ओपेक देशों की ओर से एक साथ प्रोडक्‍शन कट के चलते कीमतें लगातार बढ़ती गई। यह मई के दूसरे हफ्ते में 80 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गया, इसका सीधा असर बाजार पर पड़ा। 

 

 

कंपनियां क्यों तेजी से बढ़ा रही हैं दाम  ?
असल में तेल कंपनियों ने कर्नाटक चुनाव के लिए मतदान होने से पहले करीब तीन हफ्ते से पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर रखा था। 12 मई को कर्नाटक में मतदान हुआ। उसके बाद 14 मई को तेल कंपनियों ने फिर से कीमतों की रोज समीक्षा शुरू कर दी। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 19 दिन तक बदलाव नहीं करने से तेल कंपनियों को करीब 500 करोड़ रुपए के नुकसान का अनुमान है। क्‍योंकि, अंतरराष्‍ट्रीय बाजार में कच्‍चे तेल की कीमतों में तेजी और डॉलर के मुकाबले रुपए के कमजोर होने से उनकी लागत में इजाफा हुआ। ऐसे में कर्नाटक चुनाव के पहले वाले मार्जिन पर जाने के लिए तेल कंपनियां तेजी से दाम बढ़ा सकती हैं। 

 

 

कैसे 39 का पेट्रोल हो जाता है 76 रुपए लीटर

 

 पेट्रोल-डीजल की बात करें तो उस पर लगने वाला टैक्स उसकी वास्तविक कीमत से ज्यादा होता है। मसलन अगर 78-79 डॉलर प्रति बैरल क्रूड का प्राइस है और डॉलर के मुकाबले रुपया 68 की रेंज में है तो 1 लीटर पेट्रोल की कीमत दिल्ली में करीब 39-40 रुपए होगी। इसमें डीलर कमीशन भी शामिल है। वहीं, इस पर 27 फीसदी वैट यानी 11 रुपए रु का टैक्स इसके अलावा  23.40 रुपए के आस-पास एक्साइज ड्यूटी लगेगी। यानी कुल टैक्स का 60 फीसदी एक्साइज ड्यूटी होगी। इस तरह से 39 रुपए का पेट्रोल करीब 76 रुपए का हो जाएगा। इसी तरह से डीजल के मामले में भी आम आदमी को वास्तविक के बराबर ही टैक्स देना होता है जो सरकार के खजाने में जाता है।    

 

कितना बढ़ा टैक्‍स  ?
अगर सितंबर 2014 के बाद से बात करें तो अब तक सिर्फ डीजल पर 17.33 रुपए प्रति लीटर अतिरिक्‍त टैक्‍स बढ़ाया जा चुका है। इसमें पिछले साल अक्‍टूबर में मात्र 2 रुपए की कमी की गई है। टैक्‍स में यह कमी पेट्रोल में भी की गई थी। माना जा रहा है कि मात्र 2 रुपए की इस कमी से सरकारी खजाने को 26,000 करोड़ रुपए का नुकसान होगा। अब भी जितनी कीमत पर पेट्रोल बिक रहा है, उसमें आधे से ज्‍यादा हिस्‍सा टैक्‍स का ही है, जो सरकार वसूलती है। अगर दिल्‍ली की बात करे कि बिना टैक्‍स के 19 अप्रैल को पेट्रोल की कीमतें मात्र 35.20 रुपए पड़ रही हैं, जबकि यह 74.10 रुपए के आसपास बिक रहा था। 

 

आगे पढ़ें- कीमतों में कमी करने के विकल्‍प ​के बारे में

 

 

कीमतों में कमी करने के विकल्‍प 
 

#1- लॉन्‍ग टर्म: सरकार एनर्जी के सस्‍ते, लंबे और टिकाऊ श्रोतों जैसे सोलर, विंड और न्‍यूक्लियर एनर्जी के साथ इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर शिफ्ट हो। इससे एक ओर जहां पेट्रोलियम की डिमांड कम होगी, वहीं दूसरी ओर इम्‍पोर्ट पर निर्भरता कम होगी।     

 

#2- मिड टर्म: बॉयोफ्यूल (एथेनॉल) का ज्‍यादा से ज्‍यादा यूज। भारत में अब भी 2 फीसदी के आसपास एथेनॉल पेट्रोल-डीजल में मिलाया जा रहा है। जबकि सरकारी मंजूरी 10 फीसदी है। अमेरिका जैसे देश में करीब 20 फीसदी तक एथेनॉल मिलाया जाता है। हालांकि भारत में इससे जुड़ी इंडस्‍ट्री नहीं होने के कारण इस दिशा में खास प्रगति नहीं हो पाई है।  

 

#3- शार्ट टर्म : सरकार एक्‍साइज ड्यूटी में कमी करे। राज्‍य सरकारें वैट घटाएं या फिर ऑयल कंपनियां घाटा सहें। या फिर सरकार सब्सिडी के पुराने फार्मूले को फिर से लागू करे।  मौजूदा समय में सबसे ज्‍यादा इसी की उम्‍मीद की जा रही है। 

 

 

पर मोदी सरकार के यहां हाथ बंधे हैं  
सरकार चाहे तो कीमतों में कटौती कर सकती है। इसके लिए उसे एक्‍साइज समेत पेट्रोल की मार्केटिंग और सेल्‍स के दौरान लगने वाले अलग-अलग टैक्‍स के रेट में कमी करनी होगी। यह कदम सरकार का पुराना मर्ज उभार सकती है। यानी पेट्रोलियम पदार्थों पर टैक्‍स कटौती का सीधा असर खजाने पर पड़ेगा। पेट्रोल-डीजल पर एक्‍साइज ड्यूटी और अन्‍य दूसरे टैक्‍स से सरकार को मौजूदा वित्‍त वर्ष में करीब 2.5 लाख करोड़ रुपए की आमद होने का अनुमान है। यह पिछले वित्‍त वर्ष के मुकाबले करीब 77 फीसदी अधिक है। सरकार पहले ही राजकोषीय घाटे को पाटने की जीतोड़ कोशिश कर रही है। ऐसे में अगर वह टैक्‍स हटाती है तो अपने लक्ष्‍य से पीछे हो जाएगी। इसके चलते उसके पास बहुत स्‍कोप नहीं बचता दिख रहा है।

 

क्‍या कहते हैं एक्‍सपर्ट 
 

1- उपभोक्‍ता पर नहीं डाल सकते पूरा बोझ 
रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के चीएफ इकोनॉमिस्‍ट डीके जोशी ने moneybhaskar.com को बताया कि ऐसे समय में जब तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं तो सरकार इसका पूरा बोझ उपभोक्‍ताओं पर नहीं डाल सकती है। सरकार को डीजल पेट्रोल पर एक्‍साइज ड्यूटी में कटौती करनी चाहिए। जब अंतरराष्‍ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें गिर रहीं थी तब सरकार ने एक्‍साइज ड्यूटी बढ़ाई थी। अब जब कीमतें बढ़ रही है तो सरकार को एक्‍साइज ड्यूटी में कटौती करके उपभोक्‍ताओं को राहत देनी चाहिए। हालांकि सरकार के सामने इससे वित्‍तीय मोर्च पर चुनौतियां खड़ी होंगी। इससे सरकार के लिए वित्‍तीय घाटे को नियंत्रित करना मुश्किल होगा। अब यह सरकार पर है कि वह इसे कैसे मैनेज करती है। सरकार को उपभोक्‍ताओं को राहत देने के लिए कहीं न कहीं तो सैक्रीफाइस करना ही होगा। 


 

आगे पढ़ें- उन वजहों के बारे में, जिनके चलते कीमतें बढ़ रही हैं...  

 

 

इन वजहों से बढ़ रही कीमतें 

#1-ईरान संकट: अमेरिका ने ईरान के साथ 2015 में की गई परमाणु डील तोड़ ली है। इसके चलते सप्‍लाई में अवरोध का खतरा पैदा हो गया है। इसके चलते क्रूड की कीमतें ऊपर जा रही हैं। इसका असर भारत में दिख रहा है। 

 

#2-अमेरिका का रुख: चीन के साथ ट्रेड वॉर, सीरिया में जारी तनाव, रूस के साथ अनबन जैसे अमेरिका के कई कदमों के चलते अंतराष्‍ट्रीय स्‍तर पर जियो पॉलिटिकल टेंशन बढ़ने का खतरा हो गया है। सप्‍लाई बाधित होने की आशंका लगातार क्रूड की कीमतों को बढ़ा रही है। यहां तक की ईरान के साथ परमाणु डील तोड़ने का कसूरवार भी कहीं न कहीं पश्चिमी देश अमेरिका को ही मान रहे हैं। एनर्जी एक्‍सपर्ट नरेंद्र तनेजा भी मौजूदा कीमतों में बढ़ोतरी का कूसरवार अमेरिका को ही मान रहे हैं।   

 

#3-ओपोक और रूस का प्रोडक्‍शन कट: कीमतें 50 डॉलर से नीचे जानें के बाद से ही ओपेके और अन्‍य देश कीमतों को ऊपर ले जाने की कोशिश कर रहे थे। हालांकि के दिनों में इसमें सहमति बन गई है। इसके चलते जहां एक तरफ जहां क्रूड के प्रोडक्‍शन में कमी आ रही है तो वहीं दूसरी ओर जियो पॉलिटिकल टेंशन डिमांड में कमी नहीं होने दे रहा है। कमजोर प्रोडक्‍शन और मजबूत डिमांड कीमतों को नीचे नहीं आने दे रहे हैं। 


 

आगे पढ़ें- भविष्‍य के क्‍या हैं संकेत  ?  

 

 

भविष्‍य के क्‍या हैं संकेत  ? 

#1-क्रूड 
85 डॉलर का बैरियर पार कर सकता है क्रूड  
एक्‍सपर्ट का मानना है कि क्रूड की कीमतें मौजूदा के 80 डॉलर प्रति डॉलर के लेवल से आगे बढ़कर 85 डॉलर का बैरियर तोड़ सकता है। केडिया कमोडिटी के डायरेक्टर अजय केडिया के मुताबिक, आने वाले दिनों में क्रूड 85 से 86 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है। ग्लोबल एजेंसी मॉर्गन स्टैनली के अनुसार क्रूड का कंसर्न अभी 2 साल और बना रहेगा और 2020 में यह 90 डॉलर प्रति बैरल का स्तर पार कर सकता है। मतलब साफ है, पेट्रोलियम को लेकर मोदी सरकार पर दबाव आगे भी बना रहेगा। 


#2-पेट्रोल-डीजल 
90 रुपए प्रति लीटर पार हो सकता है पेट्रोल 
अजय केडिया का कहना है कि क्रूड मौजूदा लेवल से आगे कम से कम 7 से 8 फीसदी महंगा हो सकता है। वहीं, कंसर्न बढ़ा तो 10 फीसदी महंगा हो सकता है। ऐसे में पेट्रोल-डीजल के भाव 6 रुपए से 8 रुपए प्रति लीटर तक बढ़ सकते हैं। अगर पेट्रोल में 6 से 8 रुपए की बढ़ोत्तरी होती है तो मुंबई में इसकी कीमतें 90 रुपए प्रति लीटर के पार जा सकती हैं। मुंबई में अभी पेट्रोल  84.70 रुपए प्रति लीटर है। वहीं, दिल्ली में पेट्रोल 80 रुपए प्रति लीटर पार कर जाएगा। दिल्ली में अभी पेट्रोल की कीमत 76.87 रुपए प्रति लीटर है। 


कीमतें बढ़ने का असर 

1#-आम लोगों की जेब होगी ढ़ीली : दरअसल पेट्रोल की कीमतों से आम लोगों की जेब सीधी ढ़ीली होती है। मौजूदा समय में करीब 80 फीसदी यात्री वाहन पेट्रोल से चलते हैं। ऐसे में रोजाना आधार पर इसका उसर उनकी जेब पर पड़ना तय होता है।  

 

#2- ज्‍यादातर चीजों के कीमतें बढ़ सकती हैं: डीजल की कीमतें सीधा जरूरी चीजों को महंगा कर सकती है। देश में करीब 80 फीसदी माल ढुलाई अब भी ट्रकों के जरिए होती है। ट्रकों में ईंधन का एक मात्र विकल्‍प डीजल है। बीते 4 महीनों की बात करें तो अब तक यह करीब 10 रुपए प्रति लीटर महंगा हो चुका है। कीमतें नहीं कम हुई तो ट्रांसपोर्ट कॉस्‍ट बढ़ेगी और इसका सीधा असर वस्‍तुओं की कीमतों पर पड़ना तय है। 

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