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बिना डिग्री और पूंजी के इस कारोबार को कर आसानी से कमा सकते हैं 7-8 लाख रु, तेजी से फल-फूल रहा यह व्यापार

व्यापार चलता है एक फीसदी कमीशन पर

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नई दिल्ली। अपने बेटे-बेटियों की शादी के लिए इच्छुक दो परिवारों को मिलाकर आप एक साल में 7-8 लाख रुपये आसानी से कमा सकते हैं। इन दिनों मैरेज ब्यूरो का काम प्रोपर्टी डीलिंग की तरह तेजी से फल-फूल रहा है। शादी कराने वाले ब्रोकर को दोनों परिवार की तरफ से मिलने वाली कमीशन से कमाई होती है। पिछले दो-तीन सालों में साउथ दिल्ली के पॉश इलाकों में मैरेज ब्यूरो की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है।

 लड़का एवं लड़की दोनों ही परिवार से 1-1 फीसदी की कमीशन मिलती है

नेहरू प्लेस में श्यामजी मैरेज ब्यूरो चलाने वाले हरीश अग्रवाल ने बताया कि उन्हें लड़का एवं लड़की दोनों ही परिवार से 1-1 फीसदी की कमीशन मिलती हैं। यानी कि अगर एक करोड़ रुपये की शादी हुई है तो उन्हें दो लाख रुपये मिल जाते हैं। लड़की वाले उन्हें बताते हैं कि शादी के लिए उनका बजट क्या है। मतलब शादी के लिए वे कितने रुपये खर्च करेंगे। मैरेज ब्यूरो वाले इस बात को लड़के वालों को बताते हैं। फिर यह मान लिया जाता है कि यह शादी कितने लाख या करोड़ में होगी। उन्होंने बताया कि संयुक्त परिवार की परंपरा खत्म होने की वजह से शादी के लिए मैरेज ब्यूरो पर लोगों की निर्भरता बढ़ती जा रही है। मैरेज ब्यूरो संचालकों के मुताबिक साउथ दिल्ली में एक करोड़ रुपये की शादी मामूली बात मानी जाती है। लड़के या लड़की का प्रोफाइल लेने के दौरान भी वे फीस चार्ज करते है। ऐसे में साल में चार शादी करा देने पर 8 लाख रुपये तक की कमाई हो जाती है।

बड़े बजट की शादी कराने से पहले वे लड़के का सिबिल स्कोर भी चेक कराते हैं

मैरेज ब्यूरो चलाने वाले अनिल गुप्ता ने बताया कि बड़े बजट की शादी कराने से पहले वे लड़के का सिबिल स्कोर भी चेक कराते हैं। इससे पता चल जाता है कि लड़के का क्रेडिट स्कोर अच्छा है या नहीं। गुप्ता ने बताया कि क्रेडिट इनफॉरमेशन ब्यूरो इंडिया लिमिटेड (सिबिल) की मदद किसी भी व्यक्ति के कर्ज का विस्तृत ब्योरा हासिल किया जा सकता है। क्योंकि कई बार ऐसा देखा जाता है कि बाहर से लड़के वाले पैसे वाले दिखते हैं, लेकिन असलियत में वे कर्ज में होते हैं।

कारोबारी परिवार से ताल्लुक रखने वाले लोग बेटी के ब्याह में काफी खर्च करते हैं और अपनी हैसियत के हिसाब से बेटी को दान भी देते हैं।

 

कारोबारी मुकेश सिंघल ने बताया कि कारोबारी परिवार से ताल्लुक रखने वाले लोग बेटी के ब्याह में काफी खर्च करते हैं और अपनी हैसियत के हिसाब से बेटी को दान भी देते हैं। ऐसे में, वे कोई धोखा खाना नहीं चाहते हैं। उन्होंने बताया कि कर्ज लेने के बढ़ते चलन के बाद से यह पता नहीं चल पाता है कि लड़के वालों के पास जो दिख रहा है, वह सब उसका अपना है या कर्ज पर। रिश्ते की बातचीत के दौरान कोई लड़की वाला खुलकर यह नहीं पूछ सकता है कि लड़के के परिवार पर कितना कर्ज है या फिर वे कोई कर्ज लेकर डिफॉल्टर तो नहीं हो गए हैं।

 

 

आधार कार्ड नहीं होने पर भी सिबिल स्कोर देखा जा सकता है।

 

अगर आप किसी बैंक से किसी व्यक्ति के सिबिल के बारे में जानकारी लेंगे तो सिर्फ उस बैंक से संबंधित जानकारी सामने आएगी। मान लीजिए एसबीआई हमारा सिबिल करता है तो सिर्फ स्टेट बैंक के  लोन या स्टेट बैंक के साथ हमारे क्रेडिट स्कोर की जानकारी मिलेगी। अन्य बैंक का वहां शो नहीं होगा। लेकिन निजी डॉटकॉम के माध्यम से सिबिल कराने पर उस व्यक्ति पर चलने वाले हर प्रकार के कर्ज, व्यक्ति के कर्ज अदायगी के तरीके यहां तक कि क्रेडिट कार्ड के भुगतान में होने वाली देरी की भी पूरी जानकारी मिल जाती है। इसके लिए सिर्फ 500 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। आधार कार्ड नहीं होने पर भी सिबिल स्कोर देखा जा सकता है। लेकिन पैन कार्ड होना अनिवार्य है।


 

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