सुलग रहा है नियमगिरी, वेदांता ने कहा इस चोटी के बाक्साइट पर हम निर्भर नहीं

चुनाव की आहट के साथ ही ओडिशा में नियमगिरी की पहाड़ी के आसपास विरोध का धुआं सुलगने लगा है। जाहिर है नियमगिरी की चोटी पर बाक्साइट के भंडार हैं और एल्यूमिनियम दिग्गज वेदांता कम्पनी उसके साए में बैठकर एलूमिना का बड़ा कारोबार कर रही है। ऐसे में जनजातीय समुदायों की वफादारी जीतने के लिए तीन तरफ से कोशिशें हो रही हैं। नियमगिरी के आसपास के पर्यावरण को बचाने के लिए सक्रिय गैर सरकारी संगठन, राजनीतिक दल और वेदांता के बीच एक अजीबोगरीव कशमकश वहां चल रही है। 

Money Bhaskar

Mar 20,2019 06:28:00 PM IST

नई दिल्ली। चुनाव की आहट के साथ ही ओडिशा में नियमगिरी की पहाड़ी के आसपास विरोध का धुआं सुलगने लगा है। जाहिर है नियमगिरी की चोटी पर बाक्साइट के भंडार हैं और एल्यूमिनियम दिग्गज वेदांता कम्पनी उसके साए में बैठकर एलूमिना का बड़ा कारोबार कर रही है। ऐसे में जनजातीय समुदायों की वफादारी जीतने के लिए तीन तरफ से कोशिशें हो रही हैं। नियमगिरी के आसपास के पर्यावरण को बचाने के लिए सक्रिय गैर सरकारी संगठन, राजनीतिक दल और वेदांता के बीच एक अजीबोगरीव कशमकश वहां चल रही है।

कम्पनी ने साफ कहा है कि उसे नियमगिरी की पहाड़ी का बाक्साइट नहीं चाहिए

ऐसे में सबसे दिलचस्प रुख वेदांता ने अपनाया है। कम्पनी ने साफ कहा है कि उसे नियमगिरी की पहाड़ी का बाक्साइट नहीं चाहिए। उसका काम लांजीगढ़ से लेकर छत्तीसगढ़ तक की बेल्ट में पाए जाने वाले बाक्साइट से चल जाएगा। ऐसे में विरोध प्रदर्शनों की क्या जरुरत है।

वर्तमान में कंपनी 2.3 मिलियन एलूमिना का उत्पादन कर रही है, जिसके लिए तीन गुना बाक्साइट चाहिए

वेदांता के एक प्रवक्ता ने कहा कि नियमगिरी में जो बाक्साइट खनिज उपलब्ध कम्पनी की जरुरतें पूरी करने के लिए काफी नहीं है। नियमगिरी की चोटी से ढाई मिलियन टन बाक्साइट ही सालाना मिल सकता है जबकि कम्पनी की जरुरत 18 मिलियन टन तक हो जाएगी। आज की स्थिति में कम्पनी 2.3 मिलियन एलूमिना का उत्पादन कर रही है जिसके लिए तीन गुना बाक्साइट चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत में एल्यूमिनियम के लिए संभावनाएं अपार हैं। दूसरे देशों में धातु उत्पादन में एल्यूमिनियम का उपयोग 7 से 10 प्रतिशत के बीच है जबकि भारत में इस अहम धातु का उपयोग सिर्फ 2 प्रतिशत ही हो पा रहा है। विदेशों में अनेक क्षेत्रों ने एल्यूमिनियम ने स्टील की जरुरत को रिप्लेस कर दिया है। भारत में भी इसका तेजी से इस्तेमाल बढ़ रहा है। वैसे भी बाक्साइट और अन्य खनिज निकालने का काम ओडिशा माइनिंग कार्पोरेशन करता है जिससे ये कम्पनियां खनिज खरीदती हैं।

नियमगिरी से मोह भंग होने के बावजूद वेदांत ने स्थानीय समुदायों का प्यार जीतने के प्रयास तेज कर दिए हैं। जनजातीय समुदायों के बच्चों की शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और उनकी सांस्कृतिक पहचान की वापसी के लिए कम्पनी सीएसआर पर निवेश कर रही है। इतना ही नहीं, दूरदराज के एक गांव में ढोखरा कला के कारीगरों का पुनर्वास किया गया है जो 4000 साल पुरानी इस कला को फिर से जिंदा कर रहे हैं। इसके कारीगर गांव से पलायन कर गए थे। उन्हें सहारा देकर फिर से गांव वापस लाया गया है ताकि वे कांसे नए शिल्प में ढाल सकें।

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