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खास खबर: फिर लौटा महंगे कर्ज का दौर, क्‍या चुनावी साल में बढ़ाएगा मोदी की परेशानी

रिजर्व बैंक रेपो रेट में 0.25 फीसदी की वृद्धि कर दी है।

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नई दिल्‍ली। रिजर्व बैंक रेपो रेट में 0.25 फीसदी की वृद्धि कर दी है। इससे आने वाले समय में बैंक कर्ज की दर में और इजाफा करेंगे। साफ है कि भारत की अर्थव्‍यवस्‍था में महंगे कर्ज का दौर फिर लौट आया है। ऐसे समय में जब बैंकों की क्रेडिट ग्रोथ में थोड़ा सुधार दिख रहा है, इन्‍वेस्‍टमेंट गतिविधियों में तेजी आई है। कंस्‍ट्रक्‍शन सेक्‍टर भी नोटबंदी की मार से उबर कर मजबूती की राह पर है।  महंगे कर्ज का दौर आम आदमी से लेकर इंडस्‍ट्री पर क्‍या असर दिखाएगा।

एचडीएफसी बैंक के चीफ इकोनॉमिस्‍ट अभीक बरुआ का कहना है कि एमएसपी बढ़ने और तेल कीमतों में इजाफा जैसे जोखिम बने हुए हैं, ऐसे में रिजर्व बैंक आने वाले महीनों में दरों में और इजाफा कर सकता है। ऐसे में सवाल यह है कि चुनावी साल में महंगा कर्ज मोदी सरकार के लिए किस तरह की चुनौतियां खड़ी कर सकता है। खासकर तब तक मोदी सरकार तेज ग्रोथ के साथ लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के साथ सरकार में आई है। 

 


इंडस्‍ट्री को लगेगा झटका 

इंडस्‍ट्री एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि ऐसे समय में जब अर्थव्‍वस्‍था में रिकवरी दिख रही थी और निवेश की गतिविधियों में तेजी आ रही थी, तब जरूरत इस बात की थी ऊंची ग्रोथ बनाए रखने के लिए इंडस्‍ट्री को समर्थन दिया जाता। इंडस्‍ट्री चैंबर फिक्‍की के प्रेसिडेंट रमेश शाह का कहना है कि रेपो रेट में 0.25 फीसदी की वृद्धि रिजर्व बैंक के आक्रामक रवैये का संकेत देती है, जबकि इकोनॉमी को रिकवरी की गति बनाए रखने के लिए समर्थन की जरूरत है। 

 

शाह का कहना है कि ऐसे समय में जब बैंक बढ़ते एनपीए की वजह से कर्ज को लेकर सतर्क हो गए हैं और इंडस्‍ट्री के लिए कर्ज मिलना मुश्किल होता जा रहा है। खासकर एमएसएमई सेगमेंट के स्थिति और खराब होगी और उनके लिए कर्ज लेना और मुश्किल हो जाएगा। अनुमान है कि एमएसएमई सेक्‍टर के लिए कर्ज की कमी जीडीपी का लगभग 11 फीसदी है। एमएसएमई सेगमेंट को सस्‍ता और आसान कर्ज देकर ही कमी को पूरा किया जा सकता है। 

 

 

निर्यातकों की बढ़ जाएगी लागत 

एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि निर्यात सेक्‍टर पहले से ही खराब दौर से गुजर रहा है। रिजर्व बैंक ने वैश्विक कारोबार में संरक्षणवाद बढ़ने पर चिंता जताई है। ऐसे में रेपो रेट बढ़ने से निर्यातकों की लागत बढ़ जाएगी। खासकर इंजीनियरिंग प्रोडक्‍ट का निर्यात करने वाले निर्यातकों की लागत बढ़ जाएगी। ये ज्‍यादातर एसएमआई सेगमेंट में हैं। ईईपीसी इंडिया के चेयरमैन रवि सहगल का कहना है कि स्‍टील की कीमतें बढ़ने और जीएसटी रिफंड समय से मिलने से वे पहले से ही दबाव में हैं। 

 

 

होम लोन से लेकर बिजनेस लोन तक के लिए ज्‍यादा चुकाना होगा ब्‍याज 

रिजर्व बैंक की मॉनिटरी पॉलिसी मीटिंग से पहले ही देश के लगभग 10 बैंक ने मार्जिनल कास्‍ट पर आधारित लेंडिंग रेट यानी एमसीएलआर में 0.1 फीसदी तक इजाफा कर दिया है। यानी उनका होम लोन से लेकर कार लोन और बिजनेस लोन महंगा हो गया है। रेपो रेट में 0.25 फीसदी वृद्धि के बाद बैंक कर्ज की दर और बढ़ा सकते हैं। इससे होम लोन सहित सभी तरह के लोन के लिए ग्राहकों को ज्‍यादा ब्‍याज देना होगा। होम लोन आम तौर पर लोग 20 से 30 साल के लिए लिया जाता है। ऐसे में लोन महंगा होने पर होम लोन लेने वाले पर इसका अमाउंट के तौर पर बड़ा असर पड़ता है।

 

घर खरीदने वाले अगर महंगे कर्ज की वजह से अपना प्‍लान आगे बढ़ाते हैं तो इससे कंस्‍ट्रक्‍शन सेक्‍टर को भी झटका लग सकता है। इसके अलावा बिजनेस लोन लेने वाले खास कर छोटे कारोबारी के लिए महंगा कर्ज एक बड़ा फैक्‍टर होगा और उसके लिए कारोबार में पूंजी को लेकर चुनौती बढ़ जाएगी। 

 

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रिजर्व बैंक ने 0.25 फीसदी बढ़ाई रेपो रेट 

रिजर्व बैंक ने बुधवार को साढ़े चार साल में पहली बार ब्‍याज दरों में बढ़ोत्‍तरी की। रिजर्व बैंक ने रेपो रेट 0.25 फीसदी बढ़ाकर 6.25 फीसदी कर दिया है। रिवर्स रेपो रेट भी चौथाई फीसदी बढ़कर 6 फीसदी हो गया। रेपो रेट में बढ़ोत्‍तरी से कर्ज लेना महंगा हो जाएगा। आने वाले दिनों में होम लोन, ऑटो लोन और पर्सनल लोन की ईएमआई में बढ़ोत्‍तरी हो सकती है। रिजर्व बैंक ने जनवरी 2014 के बाद पहली बार रेपो रेट में बढ़ोत्‍तरी की है। 

 


मोदी सरकार में पहली बार रेपो रेट बढ़ा


मोदी सरकार के कार्यकाल में यह पहला मौका है जब रिजर्व बैंक ने रेपो रेट बढ़ाया है। RBI गवर्नर उर्जित पटेल की अध्‍यक्षता में होने वाली MPC मीटिंग पहली बार 3 दिन चली है। इससे पहले यह दो दिन की होती रही है। आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल की अगुवाई में छह सदस्यीय मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी (एमपीसी) की 4 जून से मीटिंग शुरू हुई थी।  

 

 

GDP ग्रोथ का अनुमान 7.4 फीसदी 

 

एमपीसी ने 2018-19 के लिए जीडीपी ग्रोथ रेट का अनुमान 7.4 फीसदी पर बनाए रखा है। वहीं 2018 19 की पहली छमाही में जीडीपी ग्रोथ रेट 7.5- 7.6 फीसदी की रेंज में और दूसरी छमाही में 7.3 से 7.4 फीसदी की रेंज मे रहने की अनुमान है। 

 

खुदरा महंगाई 4.7-5.1 फीसदी की रेंज में रखने का लक्ष्‍य 


देश का उपभोक्‍ता मूल्‍य सूचकांक अप्रैल में 4.58 फीसदी था। मार्च में यह 4.28 फीसदी था। रिजर्व बैंक ने अप्रैल-सितंबर 2019 की अवधि के लिए खुदरा महंगाई दर 4.7 से 5.1 फीसदी रहने का अनुमान जताया है। 

 

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