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पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान पर, 3 तरीकों से राहत दे सकती है सरकार

पेट्रोल डीलज की बढ़ती कीमतों को काबू करने के सरकार के पास 3 विकल्‍प ही बचे हैं...

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नई दिल्‍ली। देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच चुकी हैं। राजधानी दिल्‍ली में इस समय (मंगलवार 22 मई 2018 को) पेट्रोल 76.87 रुपए के लेवल पर पहुंच गए। वहीं डीजल की कीमतकें 68.08 रुपए के लेवल पर पहुंच गईं। रिपोर्ट्स की मानें तो देश में पेट्रोल डीजल की कीमतें अपनी रिकॉर्ड ऊंचाई पर हैं। रविवार को ही दिल्ली में पेट्रोल की कीमतों ने सितंबर 2013 के रिकॉर्ड स्तर को पार कर लिया था। डीजल तो काफी पहले ही सारे रिकॉर्ड तोड़ चुका है।

 

एनर्जी से जुड़े एक्‍सपर्ट की मानें तो पेट्रोल डीजल की कीमतों में आगे भी राहत मिलने की उम्‍मीद कम है। इसके मुताबिक, ईरान को अमेरिका का ताजा बयान, सीरिया के हालात और डिमांग में स्‍टेबिलिटी आने वाले समय में भी कीमतों को नीचे नहीं आने देंगी। ऐसे में सवाल उठता है कि आने वाले दिनों में लोगों को पेट्रोल और डीजल की कीमतों से कैसे राहत मिलेगी। 

 

3 फॉर्मूले से कम हो सकती हैं कीमतें 
ऐसे में जब पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान में जा रही हैं, तो सिर्फ 3 तरीके ही बचते हैं जो आम लोगों को पेट्रोल-डीजल की कीमतों से निजात दिला सकते हैं।  मोदी सरकार, राज्‍य सरकारों और पेट्रोलियम प्रोडक्‍ट की मार्केटिंग करने वाली कंपनियां के पास इसकी चाबी है। आइए जानते हैं कि आखिर कैसे हो सकता है यह। 

 

नंबर-1: मोदी सरकार एक्‍साइ कम करे 

केंद्र सरकार पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर एक्‍साइज ड्यूटी वसूलती है। यह दर पेट्रोल पर 19.48 रुपए और डीजल पर 15.33 रुपए लीटर है। अगर सरकार एक्‍साइज ड्यूटी घटाए तो लोगों को थोड़ी राहत मिल सकती है। इससे पहले पिछले साल अक्‍टूबर में सरकार ऐसा कर चुकी है। तब पेट्रोल पर 2 रुपए की एक्‍साइज ड्यूटी कम की थी। इससे उपभोक्‍ताओं को राहत हुई थी। सरकार एक बार फिर से कमी करके लोगों को राहत दे सकती है। 

 

नंबर-2:  राज्‍य सरकारें वैट घटाएं 
दूसरा विकल्‍प यह है कि राज्‍य सरकारें पेट्रोल पर लगने वाला वैट कम करें। मौजूदा समय में राज्‍य सरकारें डीजल पर करीब 16 रुपए और डीजर पर करीब 10 रुपए का वैट वसूल रही हैं। बता दें कि अक्‍टूबर में केंद्र सरकार की अपील पर भाजपा शासित कुछ राज्‍यों ने वैट घटाया था। ऐसे में अगर इस बार भी राज्‍य सरकारें वैट कम करती हैं तो लोगों को फौरी राहत मिल सकती है। 


नंबर-3:  पेट्रोलिमय कंपनियां सहें घाटा 
पेट्रोल की कीमतों पर काबू करने का तीसरा फॉर्मूला पेट्रोलियम कंपनियों के पास है। अगर वह घाटा उठाने को राजी हों तो कीमतों में कमी आ सकती है। बीतें दिनों कर्नाटक चुनाव से पहले अघोषित तौर पर ऐसा देखने को मिला भी था। हालांकि ऐसा करने पर इन कंपनियों को नुसान उठाना पड़ सकता है। इसके चलते उनका मार्केट कैप और वैल्‍यू भी प्रभावित होगी। 

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