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इस ऐप से ब्लाइंड लोगों को बिना किसी सहारे चलने में मिलेगी मदद, इसका पायलट प्रोजेक्ट 2020 में होगी शुरू

यह ऐप इर्द-गिर्द आने वाली चीजों के बारे में बताता रहेगा

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नई दिल्ली। जापान के टोक्यो शहर में एक ऐसा ऐप तैयार किया गया है जिससे ब्लाइंड लोगों को बिना किसी के सहारे चलने-फिरने में मदद मिलेगी। खास बात यह है कि इस ऐप को तैयार एक ऐसी महिला ने किया है जो खुद देख नहीं सकती है। जापान की चिएको असाकावा इन दिनों आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के जरिए दृष्टिहीनों का जीवन बदलने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने नव-कॉग नाम से ऐप बनाया है। यह आवाज से कंट्रोल होने वाला स्मार्टफोन ऐप है। इसकी मदद से दृष्टिहीन किसी बिल्डिंग के भीतर चल सकते हैं। इसे जल्द ही डेवलप कर लॉन्च कर दिया जाएगा। इसका पायलट प्रोजेक्ट 2020 में टोक्यो में शुरू होगा।

असाकावा की 14 साल की उम्र में एक दुर्घटना में आंखों की रोशनी चली गई थी। इसके बाद उनका कहीं आना-जाना, पढ़ना-लिखना सब मुश्किल हो गया था। उन्होंने बड़ी मुश्किल से कंप्यूटर साइंस में पढ़ाई की।दृष्टिहीन होने के बावजूद असाकावा ने पीएचडी की। वर्तमान में वह आईबीएम में फेलो और कार्नेगी मेलॉन यूनिवर्सिटी की फैकल्टी मेंबर हैं। आज असाकावा की उम्र 60 साल है और अब उन्होंने एक ऐसा एप बना दिया है जिससे दृष्टिहीन कहीं भी,  किसी भी जगह आसानी से आ-जा पाएंगे। 

 

 

 

आगे पढ़ें : यह ऐप ऐसे करेगी दृष्टिहीन की मदद

 

यह ऐप ऐसे करेगी दृष्टिहीन की मदद

 

पैदल चलने के दौरान एआई दृष्टिहीन लोगों के इर्द-गिर्द आने वाली चीजों के बारे में बताता रहेगा। मान लीजिए आप ऐसी जगह जाते हैं जहां साइन बोर्ड या रेस्तरां में मेन्यू नहीं पढ़ सकते, तो वहां यह आपकी मदद करेगा। असाकावा का दावा है,  एआई के कारण आज से 30 साल बाद दिव्यांगता लोगों के लिए समस्या कम हो जाएगी।

 

इससे पहले भी कर चुकी हैं असाकावा यह काम

डिजिटल ब्रेल तैयार करने में असाकावा का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने 1990 के दशक में वॉयस ब्राउजर विकसित किया था जिससे दृष्टिहीनों के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल काफी आसान हो गया है।

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इस प्रोजेक्ट को काफी सराहा जा रहा है 


इस ऐप को चलाने के लिए बिल्डिंग में 10-10 मीटर की दूरी पर ब्लूटूथ सिग्नल छोड़ने वाले बीकन लगाए जाते हैं। इससे बिल्डिंग के भीतर जगह की मैपिंग होती है। अभी अमेरिका के कई शहरों और जापान की राजधानी टोक्यो में नव-कॉग की टेस्टिंग चल रही है। असाकावा कहती हैं, हो सकता है इस एप से दृष्टिहीनों की समस्या पूरी तरह खत्म ना हो, लेकिन यह उनके लिए काफी मददगार होगा। पायलट प्रोजेक्ट में जो लोग एप का इस्तेमाल कर रहे हैं उन्होंने इसे काफी सराहा है। नई जगहों पर भी उन्हें चलने-फिरने में आसानी होती है।



 

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