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भारत के इन 5 किलों का रोचक है रहस्य, कम खर्च में घूमने के लिए परफेक्ट डेस्टिनेशन

रोमांचक अहसास के लिए आ सकते हैं यहां

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नई दिल्ली। अगर आप प्राचीन कला और धरोहर को देखना पसंद करते हैं एवं पुरानी कहानियों में दिलचस्पी रखते हैं तो आप भारत के 5 प्रमुख फाेर्ट जरूर घूमें। ये फोर्ट आकर्षण और अद्भूत तो हैं ही, साथ ही इन सभी फोर्ट के साथ रोचक कहानियां जुड़ी हैं। हम आपको ऐसे 5 किलों के बारे में बता रहें हैं जो घूमने के लिए परफेक्ट डेस्टिनेशन है।

 

500 साल पुराना है राजस्थान का मेहरानगढ़ किला :

मेहरानगढ़ किला राजस्थान के जोधपुर में है। इसे राव जोधा ने बनवाया था। इस किले के 7 गेट हैं और सभी गेट राजा के किसी युद्ध में जीतने पर स्मारक के तौर पर बनवाया गया था। इस किले के अंदर मोती महल, शीश महल जैसे भवनों को बहुत ही खूबसूरती से सजाया गया है। मेहरानगढ़ किले के अंदर चामूंडा देवी का मंदिर और म्यूजिम दोनों देख सकते हैं। यह 500 साल पुराना किला है।

इस किले की दीवारों की परिधि 10 किलोमीटर तक फैली है। इसकी ऊंचाई 20 फुट से 120 फुट तथा चौड़ाई 12 फुट से 70 फुट तक है। घुमावदार सड़कों से जुड़े इस किले के चार द्वार हैं। इस किले में नीता अंबानी अपना 50वां जन्मदिन सेलिब्रेट कर चुकी हैं।

सुपर हीट अंग्रेजी फिल्म ’डार्क नाइट’ के कुछ हिस्से भी इसी किले में फिल्माए गए थे। यह हॉलीवुड के लिए भी एक शानदार डेस्टिनेशन बन गया है।

 

यहां दिखते हैं रानियों के आत्मदाह के निशान

अंतिम संस्कार स्थल पर आज भी सिंदूर के घोल और चांदी की पतली वरक से बनी हथेलियों के निशान पर्यटकों को उन राजकुमारियों और रानियों की याद दिलाते हैं जिन्होंने जौहर या आत्मदाह किया था।

टाइमिंग : इस किले में आप  सुबह 9 बजे से शाम 5.30 बजे तक ही घूम सकते हैं। 

टिकट :  इस किले में घूमने के लिए प्रति व्यक्ति 100 रुपए खर्च करने पड़ते हैं। यह किला डिनर पार्टी के रूप में किराए पर भी दिया जाता है।

 

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ग्वालियर का किला

 

ग्वालियर शहर का सबसे बड़ा आकर्षण यहां ऊंची चट्टानों पर बना ग्वालियर का किला है। यह शहर के लगभग हर भाग से दिखाई देता है। भारत के दूसरे किलों की तुलना में मुगल बादशाह बाबर ने इसकी तुलना मोती से की थी। इस किले का निर्माण 15वीं शताब्दी में राजा मान सिंह तोमर ने करवाया था। यह किला गोपांचल के पर्वत पर लाल बलुए पत्थर से बना है। यह किला 100 मीटर ऊंचाई पर है। किले की बाहरी दीवार की चौड़ाई 200 मीटर की है।

 

यह जरूर देखें

तीन किलोमीटर स्क्वेयर में फैले इस किले के अंदर तीन मंदिर हैं। किले के पास ही सूरज कुंड है जिसका पानी पवित्र माना जाता है। इसके अलावा ग्वालियर किले के जहांगीर महल, करन पैलेस, शाहजहां महल और गुजरी महल भी देखने लायक हैं। यहां घूमने के लिए अक्टूबर से मार्च तक का समय बेस्ट माना जाता है।

टाइमिंग्स 
किला सुबह 6 बजे से लेकर शाम 5.30 बजे तक खुला रहता है। 

किराया : इस किले में घूमने के लिए आपको महज 50-100 रुपए के  टिकट लेने होंगे।

 

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हैदराबाद का गोलकुंडा किला :

 

आंधप्रदेश की राजधानी हैदराबाद से करीब 11 किलोमीटर की दूरी पर बने गोलकुंडा किला का निर्माण काकतिया शासकों ने करवाया था। इस शहर और किले का निर्माण ग्रेनाइट हिल से 120 मीटर की ऊंचाई पर किया गया है। यह विशाल चहारदीवारी से घिरा हुआ है। बताया जाता है कि आरंभ में यह मिट्टी से बना किला था लेकिन कुतुब शाही वंश के शासनकाल में इसे ग्रेनाइट से बनवाया गया था। इस किले में आठ द्वार चार सीढ़ियां हैं। इसके चाहरदीवारी पर 87 अर्द्ध बुर्ज है। प्रत्येक बुर्ज पर अलग अलग क्षमता वाले तोप लगे हैं। यह किला खुद में पूरा शहर था जिसे आप इस किले में महसूस कर सकते हैं। किले में बनी अन्य इमारतें हैं– हथियार घर, हब्शी कमान्स (अबीस्सियन मेहराब), ऊंट अस्तबल, तारामती मस्जिद, निजी कक्ष (किलवत), नगीना बाग, रामसासा का कोठा, मुर्दा स्नानघर, अंबर खाना और दरबार कक्ष देखने लायक है।

प्रवेश द्वार पर ताली बजाने की ध्वनि साफ तौर पर पहाड़ी के शिखर पर अवस्थित किले में भी सुनी जा सकती है। स्थान विशेष पर लगभग सभी पर्यटक ताली बजाते नजर आते हैं। मान्यता है कि प्रतिध्वनि की यह व्यवस्था किले की सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर की गयी थी। यहां शाम को होने वाली लाइट शो जरूर देखें।
टाइमिंग ; यह सुबह 9 बजे से शाम 7 बजे तक खुला रहता है।

टिकट के दाम : इस किले को देखने के लिए 70 रुपए का टिकट खरीदना होगा।

 

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महाराष्ट्र का सिंधुदुर्ग

 

यह किला मुंबई से 400 किलोमीटर दूरी पर समुद्र के बीच बनाया गया था। किले का निमार्ण शिवाजी ने किया था। यह किला अपनी खूबसूरती की वजह से पर्यटकाें के अपनी ओर आकर्षित करता है। सिंधुदुर्ग समुद्र के बीच एक छोटे टापू पर बना है।

टाइमिंग : इस किले पर आप सिर्फ सुबह 10 से 5.30 बजे तक ही जा सकते हैं।

टिकट : यहां प्रति व्यक्ति 50 रुपए का टिकट है।

 

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हिमाचल प्रदेश का कांगड़ा किला

 

यह किला हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में है। इसे कांगड़ा के शाही परिवार ने बनवाया था। यह दुनिया के सबसे पुराने किलों में से एक है। इसे नगरकोट या काट कांगड़ के नाम से जाना जाता है। यह किला धन संपत्ति के भंडार के लिए प्रसिद्ध था। बाणगंगा और मांझी नदियों के ऊपर कांगड़ किला 500 राजाओं की वंशावली के पूवर्ज राजा भूमचंद की त्रिगतरा भूमि की राजधानी थी।

टाइमिंग : यह सुबह 9 से शाम 6 बजे तक खुली रहती है।

टिकट : इस किले में प्रवेश के लिए आपको 150 रुपए प्रति व्यक्ति खर्च करने होंगे।

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