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Home » Economy » PolicyCongress president Rahul Gandhi said Modi government's election bond scheme questioned

जिस चुनावी बांड से भाजपा को मिला सबसे ज्यादा गुमनामी चंदा, कांग्रेस उसे करेगी बंद

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मोदी सरकार की चुनाव बॉन्ड स्कीम को संदिग्ध बताया

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नई दिल्ली.  जिस चुनावी बांड की वजह से राजनीतिक दलों को गुमनाम स्रोतों से चंदा हासिल होता है, उसे कांग्रेस सत्ता में आने के बाद बंद करेगी। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने आज पार्टी का घोषणा पत्र जारी करते हुए यह ऐलान किया। ऐसा माना जा रहा है कि चुनावी बांड स्कीम की वजह से BJP को जमकर फायदा हुआ है जबकि कांग्रेस को नुकसान। यही नहीं, 
लोकसभा चुनाव से पहले चुनावी बांड की बिक्री में 62 प्रतिशत का जोरदार उछाल आया है। इसमें भी चंदे की ज्यादा राशि भाजपा को गई है। 

 

गांधी को चंदे के स्रोतों पर शक 

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने आज यहां लोकसभा चुनावों के लिए पार्टी का घोषणा पत्र ‘जन आवाज’ जारी करते हुए कहा कि निर्वाचन आयोग चुनाव में काले धन का उपयोग और मतदाता  को प्रभावित करने के तरीकों को रोक पाने में पूरी तरह से अप्रभावी रहा है। कांग्रेस स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव करवाने की बड़ी चुनौती से निपटने के लिए कारगर उपाय करेगी।  उन्होंने कहा कि मौजूदा चुनाव (निर्वाचक) बान्ड स्कीम संदिग्ध और अपारदर्शी है और यह सत्ताधारी दल के पक्ष में बनाई गई है। 

 

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बनेगा चुनाव कोष  

सत्ता में आने पर कांग्रेस इस योजना को बंद करेगी तथा एक राष्ट्रीय चुनाव कोष स्थापित करेगी जिसमें  कोई भी व्यक्ति योगदान कर सकता है। साथ ही कानून द्वारा निर्धारित मापदंडों के अनुसार मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को चुनाव के समय धन आवंटित किया जाएगा। गांधी ने कहा कि निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव के लिए कांग्रेस यह सुनिश्चित करगी कि ई.वी.एम. और वी.वी. पैट से छेडछाड न हो सके। मतगणना के दौरान कम से कम 50 प्रतिशत ई.वी.एम. तथा वी.वी.पैट का मिलान भौतिक गणना के साथ किया जाएगा।  राहुल ने कहा कि चुनाव के समय लोक प्रसारकों ऑल इंडिया रेडियों और दूरदर्शन पर राजनीतिक दलों को कानून द्वारा निर्धारित मापदण्डों के अनुसार निष्पक्ष रूप से और अधिक समय आवंटित किया जाएगा। 


 

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अकेले एसबीआई ने 1700 करोड़ के बांड बेचे 


पुणे के विहार दुर्वे द्वारा आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी के जवाब में एसबीआई ने बताया कि 2018 में उसने मार्च, अप्रैल, मई, जुलाई, अक्टूबर और नवंबर के माह में 1,056.73 करोड़ रुपये के बांड बेचे। जबकि इस साल जनवरी और मार्च में बैंक ने 1,716.05 करोड़ रुपये के चुनावी बांड बेचे। इस तरह चुनावी बांड की बिक्री में 62 प्रतिशत का इजाफा हुआ। 

 

 

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भाजपा को 705 और कांग्रेस को महज 198 करोड़ का मिला चंदा 


एडीआर ने पिछले चार साल में राजनीतिक दलों को मिले चंदे का विश्लेषण किया है। ताजा आंकड़ों के अनुसार बीजेपी का 92 फीसदी और कांग्रेस का 85 फीसदी चंदा कॉरपोरेट कंपनियों से आता है। एडीआर की रिपोर्ट के अनुसार, इन चार वर्षो के दौरान कॉर्पोरेट एवं व्यापारिक घरानों ने पांच राष्ट्रीय पार्टियों को कुल 956.77 करोड़ रुपये का चंदा दिया। 
वित्त वर्ष 2012-13 से 2015-16 के बीच चार वर्ष में भाजपा को 705 करोड़ जबकि कांग्रेस को 198 करोड़ रुपये का कॉर्पोरेट चंदा मिला। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) और माक्र्ससवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) को सबसे कम कॉर्पोरेट चंदा मिला है, जो क्रमश: चार फीसदी और 17 फीसदी है। एडीआर की इस रिपोर्ट में भाजपा, कांग्रेस, भाकपा, माकपा और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) को राष्ट्रीय पार्टी माना गया है। पार्टियों को सबसे ज्यादा चंदा 2014-15 में मिला, जिस साल लोकसभा के चुनाव हुए थे। चार साल के कुल कॉरपोरेट चंदे की 60 फीसदी राशि इसी एक साल में मिली। इस अवधि में सबसे ज्यादा 260.87 करोड़ रुपये का चंदा सत्य इलेक्टोरल ट्रस्ट ने दिया।

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