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सर्वे में खुलासा, 53 फीसदी लोगों को सोशल मीडिया पर Fake News मिली

43 फीसदी लोगों ने माना, फेक न्यूज से प्रभावित हुए उनके जानकार

Survey claims fake news can affect loksabha election 2019
  • #DontBeAFool नाम से किया गया सर्वेक्षण
  • देशभर के अलग-अलग हिस्सों से ली गई राय

नई दिल्ली। देश में फेक न्यूज किस कदर पैर पसार चुकी है इसके खुलासा हाल ही में एक सर्वे में हुआ है। इस सर्वे के अनुसार, लोकसभा चुनावों के दौरान बीते 30 दिन में करीब 53 फीसदी लोगों को सोशल मीडिया के जरिए फेक न्यूज मिली है। यह एक ऑनलाइन सर्वे था जिसमें 18 से 25 साल के युवाओं से फीडबैक लिया गया।

सोशल मीडिया मैटर्स ने किया सर्वेक्षण
लोकसभा चुनाव 2019 पर फर्जी खबरों, गलत सूचनाओं के प्रभाव का पता लगाने के लिए सोशल मीडिया मैटर्स की ओर से द्वारा एक सर्वेक्षण किया गया था। यह एक ऑनलाइन सर्वेक्षण था और इसने विभिन्न आंकड़ों को इंगित किया है जिन पर ध्यान दिया जाना चाहिए क्योंकि चुनाव नजदीक हैं और जनसंख्या को एक राय बनाने के लिए प्रमाणित समाचार / संसाधनों की ज़रूरत है। भारत इस साल लोकसभा चुनाव 2019 कराने के लिए तैयार है और अनुमानित 90 करोड़ मतदाता अपने उम्मीदवारों को वोट देने से पहले नकली समाचारों के प्रभाव से जूझ रहे हैं। लोकसभा चुनाव 2019 में लगभग 9.4% पहली बार मतदाताओं की वृद्धि देखी जाएगी, जो नई सरकार के गठन में निर्णायक दर्शक होंगे। 54 % सैम्पल जनसंख्या में बातचीत करने वाले वर्ग की आयु 18-25 वर्ष है। यह सर्वे 56% पुरुषों, 43% महिलाओं और 1% ट्रांसजेंडरों द्वारा भरा गया है। #DontBeAFool फेक न्यूज पर भारत का पहला सर्वेक्षण है, जो यह समझने के लिए किया गया है कि क्या राय बनाने में फेक न्यूज़ का प्रभाव है या नहीं। इस सर्वे का मकसद मतदाता के पक्ष को समझने का है और ये जानने का कि वे चुनावों के दौरान गलतसूचना से प्रभावित होते हैं या नहीं। 

62 फीसदी का मानना है कि लोकसभा चुनाव फेक न्यूज से प्रभावित होगा
सर्वेक्षण में सामने आए सबसे आंकड़ों में से सबसे गंभीर यह है कि 62% सैम्पल का मानना है कि लोक सभा चुनाव 2019 फेक न्यूज के प्रसार से प्रभावित होगा। इस सर्वेक्षण की खोज देश भर के 628 मतदाताओं के नमूने के आकार पर आधारित है, जिन्होंने विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के माध्यम से फेक न्यूज की पहचान करने के अपने विचार और व्यक्तिगत अनुभव व्यक्त किए हैं।
 सर्वेक्षण बताता है कि 53% सैम्पल को विभिन्न चैनलों पर नकली समाचार / गलत जानकारी मिली थी। फेसबुक और व्हाट्सएप गलत सूचना के प्रसार के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले प्रमुख मंच हैं। सर्वेक्षण से संकेत मिलता है कि 96% सैम्पल जनसंख्या को व्हाट्सएप के माध्यम से नकली समाचार प्राप्त हुए हैं। 48% जनसंख्या इस बात से सहमत हुई कि उन्हें पिछले 30 दिनों में किसी न किसी माध्यम से फेक न्यूज प्राप्त प्राप्त हुई थी। 

गूगल-फेसबुक की मदद से कर रहे फेक न्यूज की पहचान
नागरिकों को इस बात की कम जानकारी है किसी समाचार आइटम को प्रमाणित करना है लेकिन हमारे सर्वेक्षण में यह सामने आया है कि 41% लोगों ने फेक न्यूज की पहचान करने के लिए Google, फेसबुक और ट्विटर की मदद ली। एक सकारात्मक आंकड़े के तहत आबादी के 54% लोगों ने यह जताया है कि वे कभी भी फेक न्यूज से प्रभावित नहीं हुए हैं। दूसरी ओर 43% ऐसे लोग हैं जिनके जानकार फेक न्यूज से गुमराह हुए हैं। यह सर्वे एक प्रयास है यह जानने का कि किन सोशल मीडिया प्लेटफार्मों, चैनलों के माध्यम से माध्यम से नकली समाचार का प्रसार हो रहा है, लोग कैसे इसकी पहचान कर रहे हैं और इस पर अंकुश लगाने के लिए क्या साधन अपनाए जा सकते हैं। इस सर्वे के परिणाम हमारे सैम्पल की प्रतिक्रियाओं से प्रभावित होते हैं और उसी के आधार पर हम एक निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि फर्जी समाचार और गलत सूचना एक मतदाता को गुमराह करने के प्रमुख रूपों में से एक हैं। 

फेक न्यूज के प्रसार में सोशल मीडिया की भूमिका महत्वपूर्ण
चुनावों के दौरान, कुछ समाचारों का प्रचलन बढ़ जाता है ताकि मतदाताओं को नेतृत्व प्रदान किया जा सके और उनका समर्थन प्राप्त किया जा सके। फर्जी खबरों के प्रसार में सोशल मीडिया की भूमिका महत्वपूर्ण है और इसलिए इसे खत्म करने के लिए उपयुक्त नियंत्रण होना चाहिए। बहुत सारे मतदाता पहली बार इस साल चुनाव में भाग लेंगे और यह महत्वपूर्ण है कि उन्हें कुछ संसाधनों से अवगत कराया जाए जहां वे समाचारों का सत्यापन कर सकते हैं।

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