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आधार की अनिवार्यता पर SC में सुनवाई जारी, याचिकाकर्ता के वकील ने उठाए सवाल

आधार कार्ड की अनिवार्यता को लेकर सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ में सुनवाई चल रही है।

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नई दिल्‍ली. ..आधार कार्ड की अनिवार्यता को लेकर सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ में सुनवाई चल रही है। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस ए के सीकरी, जस्टिस डी वाई चंद्रचूड, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एएम खानविलकर की संवैधानिक पीठ ने आधार कार्ड की आनिवार्यता को लेकर बुधवार को सुनवाई की। सुनवाई का यह सिलसिला गुरुवार को भी जारी रहेगा। 


याचिकाकर्ताओं के वकील ने की बहस की शुरुआत 
बहस की शुरुआत करते हुए याचिकाकर्ताओं के वकील श्‍याम दीवान ने कहा कि आधार कार्ड को लेकर इस वक्त सुप्रीम कोर्ट में 27 याचिकाएं दाखिल हैं। सुप्रीम कोर्ट में पूरे आधार प्रोजेक्ट को ही चुनौती दी गई है। अगर सरकारी योजनाओं में भी आधार को विकल्प के तौर पर थोपा जाता है तो यह नागरिकों का संविधान नहीं बल्कि राज्य के संविधान जैसा होगा। 


उठाए कर्इ अहम सवाल 
सुनवाई के दौरान वकील श्याम दीवान ने कहा है कि आधार कार्ड की उपयोगिता चुनौती के दायरे में है।  इस प्रोजक्ट की कोई निश्चित अवधि नहीं है। यह एक लगातार और निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। आधार कार्ड में बायोमैट्रिक डेट से जुड़ी कई खामियां हैं और यह सिस्टम देश के लिए भरोसेमंद नहीं है। यह सिर्फ संभावनाओं के आधार पर चलता है। श्याम दीवान ने सुप्रीम कोर्ट में जिरह करते हुए सरकार से पूछा है कि आखिर आधार को इनकम टैक्स रिटर्न भरने, बैंक खाते और मोबाइल नंबर से लिंक करने की क्यों अनिवार्यता करने की बात कही जा रही है। इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल ये है कि‍ क्‍या आधार की वजह से कि‍सी की निजता का उल्‍लंघन होता है। 


बता दें, सुप्रीम कोर्ट यह रूलिंग पहले ही दे चुका है कि‍ निजता एक मौलि‍क अधि‍कार है। बीते 15 दिसंबर को मामले की सुनवाई के बाद सरकार ने बैंक खातों और मोबाइल नंबर सहित सभी सेवाओं और योजनाओं के साथ आधार को जोड़ने के लि‍ए समय सीमा  31 मार्च 2018 तक बढ़ा दी थी। आधार के खि‍लाफ जो याचि‍काएं दायर की गई हैं उनमें नि‍जता के उल्‍लंघन और डाटा प्रोटेक्‍शन को लेकर सवाल उठाए गए हैं। 

 

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आाधार की सुरक्षा को लेकर उठ चुके हैं सवाल 

कुछ दि‍न पहले ही अमेरि‍की व्‍हि‍सल ब्‍लोअर एडवर्ड स्‍नोडेन ने चेतावनी दी थी कि‍ आधार डाटाबेस का मि‍सयूज कि‍या जा सकता है। स्‍नोडेन ने यह बात ऐसे वक्‍त पर कही है जब आधार डाटा की सुरक्षा को लेकर कई तरह की खबरें आ रही हैं। इस बयान से एक दि‍न पहले यह खबर आई थी कि‍ महज 500 रुपए में आधार डाटा उपलब्‍ध है। इस रिपोर्ट को खारिज करते हुए यूआईडीएआई ने कहा कि‍ उनका सिस्टम पूरी तरह सिक्योर है और इसके मिसयूज को तुरंत पकड़ा जा सकता है। 


डाटाबेस में डाटा चोरी की बात उठी

अथॉरिटी ने अपने बयान में कहा था कि, 'बायोमीट्रिक डाटाबेस से डाटा चोरी का कोई मामला सामने नहीं आया है, यह पूरी तरह सुरक्षित है। सर्च फैसिलिटी पर उपलब्ध जानकारी के बिना बायोमैट्रिक्स का दुरुपयोग नहीं किया जा सकता।' यूआईडीएआई ने कहा था कि आधार नंबर कोई सीक्रेट नंबर नहीं है और आधार होल्डर की मर्जी पर किसी सेवा या सरकारी वेलफेयर स्कीम्स का फायदा लेने के लिए इसे अधिकृत एजेंसियों के साथ साझा किया जाता है।

 

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ममता सरकार आधार की अनिवार्यता के खिलाफ 

आधार को अनिवार्य बनाने के खिलाफ कई राजनीतिक दल हैं। पश्चिम बंगाल सरकार आधार के खिलाफ है और वह अपना रुख पहले ही जता चुकी है। बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आधार की अनिवार्यता के खिलाफ बेहद तल्ख टिप्पणियां की हैं। सुप्रीम कोर्ट में पश्चिम बंगाल सरकार की तरफ से दायर याचिका दायर की गई थी। हालांकि, शीर्ष कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। आधार लिंक अनिवार्यता के खिलाफ ममता सरकार ने शीर्ष कोर्ट में पिटीशन दायर की थी। इस मामले पर कोर्ट ने कहा था कि संसद द्वारा पारित कानून को राज्य सरकार किस आधार पर चुनौती दे सकते हैं?  

 

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