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Home » Economy » PolicySupreme court orders special allowance are the part of basic salary for epf computation

निजी कंपनियों की मनमानी पर सुप्रीम कोर्ट का डंडा, कर्मचारियों को होगा ज्यादा फायदा

मूल वेतन में जोड़े जाएंगे विशेष भत्ते

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने निजी कंपनियों पर शिकंजा कसते हुए कर्मचारियों को दिए जाने वाले विशेष भत्तों पर बड़ा फैसला दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इन विशेष भत्तों को मूल वेतन का ही हिस्सा माना जाए। कोर्ट ने यह आदेश विशेष भत्तों पर पीएफ कटौती से जुड़े एक सवाल पर दिया है। 

 

ये है पूरा मामला
कर्मचारियों को अपने मूल वेतन का 12 फीसदी हिस्सा सामाजिक सुरक्षा मद में देना होता है। इतना ही योगदान कंपनियों को करना होता है। ईपीएफओ का मानना है कि कंपनियां कम योगदान के चक्कर में कर्मचारियों का मूल वेतन कम करके विशेष भत्तों में ज्यादा सैलरी देती हैं। भविष्य निधि आयुक्त ने विशेष भत्तों को मूल वेतन में जोड़कर पीएफ कटौती करने का आदेश दिया था। इस फैसले को कई निजी कंपनियों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुनवाई के दौरान सवाल खड़ा हुआ कि एंप्लाइज प्रोविडेंट फंड एंड मिसलेनियस प्रोविजंस एक्ट-1952 के तहत पीएफ कटौती के लिए विशेष भत्तों को मूल वेतन से जोड़ा जाए या नहीं। इसी सवाल के जवाब में कोर्ट ने विशेष भत्तों को मूल वेतन में जोड़ने का आदेश दिया है। 

कर्मचारियों को होगा ज्यादा फायदा


मूल वेतन कम होने के कारण अभी पीएम में कम कटौती होती थी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद विशेष भत्तों को मूल वेतन में जोड़ने के बाद ज्यादा पीएफ कटौती होगी। उस कटौती के बराबर कंपनियों को भी अपना योगदान देना होगा। इससे कर्मचारियों के पीएफ खाते में ज्यादा राशि जमा होगी और रिटायरमेंट के बाद उन्हें ज्यादा राशि मिलेगी।

कंपनियों पर कड़ी कार्रवाई करेगी ईपीएफओ


सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने कंपनियों पर कड़ी कार्रवाई का फैसला किया है। ईपीएफओ का कहना है कि जो कंपनियां विशेष भत्तों को मूल वेतन में शामिल नहीं कर रहीं है, उनकी पहचान की जा रही है। 

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