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राजस्व रिकार्ड में नाम बदलवा लेने से जमीन पर मालिकाना हक नहीं

न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे और न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी की पीठ ने कहा....

Revenue record entries can be challenged on the ground that it was made fraudulently

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में किसी भी जमीन के राजस्व रिकॉर्ड को लेकर बड़ा फैसला किया है। कोर्ट के मुताबिक, किसी भी जमीन के राजस्व रिकॉर्ड में नाम बदलवाने से व्यक्ति का उस जमीन पर कब्जा नहीं हो जाता और ना ही जिस व्यक्ति की जमीन है उसका अधिकार नहीं खत्म नहीं होगा। राजस्व रिकॉर्ड में नाम बदलवाने से सिर्फ व्यक्ति का नाम राजस्व रिकॉर्ड में डाला जाता है जिससे वह राजस्व का भुगतान कर सकता है। 

 

न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे और न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी की पीठ ने कहा....


लाइव लॉ में छपी खबर में कहा गया है कि न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे और न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी की पीठ ने बॉम्बे हाईकोर्ट के एक फ़ैसले के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई करते हुए यह बात कही। लाइव लॉ के मुताबिक, हाईकोर्ट का यह आदेश विवादित भूमि के राजस्व रिकॉर्ड के बारे में उत्पन्न विवाद से संबंधित है।

 

राजस्व रिकॉर्ड में नाम बदलने से ज़मीन पर उस व्यक्ति का अधिकार नहीं- पीठ


पीठ ने कहा, 'अदालत समय-समय पर इस बात को स्पष्ट करती आई है कि राजस्व रिकॉर्ड में नाम बदलने से ज़मीन पर उस व्यक्ति का अधिकार नहीं बनता है और न ही उस जमीन पर जिसका हक है उसका अधिकार खत्म होता है। इस बदलाव का कोई आनुमानिक महत्व भी नहीं है। इससे सिर्फ़ यह होता है कि जिस व्यक्ति के पक्ष में नामांतरण किया गया है वह इस ज़मीन का राजस्व चुका सकता है।' 


 

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