Home » Economy » PolicyNo change in RBI repo rate - RBI monetary policy committee meet December, 2018

RBI ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया, नहीं कम होंगी ब्याज दरें

एसएलआर में 0.25 फीसदी की कटौती,बैंकों में बढ़ेगी नकदी

No change in RBI repo rate - RBI monetary policy committee meet December, 2018

नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक में उम्मीद के विपरीत आरबीआई ने दरों में कोई बदलाव नहीं किया। रेपो रेट 6.5 फीसदी के स्तर पर कायम रही। वहीं आरबीआई ने वित्त वर्ष 2018-19 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 7.4 फीसदी का अनुमान जाहिर किया है। लेकिन एसएलआर में 0.25 फीसदी की कटौती की गई। एसएलआर जिसे स्टैच्यूरी लिक्विडिटी रेशियो के नाम से जाना जाता है, के तहत बैंकों को फिक्स्ड अमाउंट आरबीआई के पास  रखना होता है। मौजूदा समय में यह दर 19.5 फीसदी है। इसमें कटौती होने से बैंकों में नकदी बढ़ेगी, जिससे उन्हें लोन देने में सहूलियत होगी। रेपो रेट में कमी नहीं होने से औद्योगिक जगत को  निराशा हाथ लगी है। औद्योगिक संगठनों को ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद थी। आरबीआई के इस फैसले से आम जनता को भी कोई लाभ नहीं मिलने जा रहा है। उनकी ईएमआई पहले की तरह ही बरकरार रहेगी।

रेपो रेट वह दर हाेती है जिस पर रिजर्व बैंक कमर्शियल बैंकों को कर्ज देता है। यह कमेटी की पांचवीं द्वैमासिक बैठक है जो 3 दिसंबर से चल रही थी। इसके नतीजे आज 2:30 बजे रिजर्व बैंक की वेबसाइट पर घोषित किए जाएंगे। इसके पहले अक्टूबर की बैठक में भी रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया था। यह 6.5 फीसदी ही रहा था।

 

काफी अहम थी यह बैठक

इस बैठक को काफी अहम माना जा रहा है क्योंकि हाल ही में सरकार और आरबीआई के बीच फंड ट्रांसफर को लेकर काफी लंबा विवाद चला है। इसके अलावा इस बैठक में आरबीआई द्वारा सरकार को अतिरिक्त मुनाफे का ट्रांसफर किए जाने के बारे में भी कोई फैसला लिया जाएगा। हर साल केंद्रीय बैंक RBI Act के तहत अपने अतिरिक्त मुनाफे को सरकार के हवाले कर देता है।

 

लिक्विडिटी क्राइसिस दूर करने पर चर्चा

इस बैठक में एक अहम चर्चा IL&FS के लोन 91,000 करोड़ रुपए के लोन डिफॉल्ट पर भी होगी। रिजर्व बैंक इस कंपनी के ऋण ने चुकाने से पैदा हुई लिक्विडिटी की कमी को दूर करने के लिए उपाय सुझा सकती है। इस दिसंबर में मनी मार्केट डेफिसिट के 1.44 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए मुश्किल स्थिति बन सकती है।

 

इंफ्लेशन टार्गेट घटने की उम्मीद

 

उम्मीद की जा रही है कि महंगाई लक्ष्य या तो घटाया जाएगा या फिर इसे 3.9 फीसदी की दर पर ही रखा जाएगा। इसमें कोई बदलाव नहीं होगा।

 

 

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