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Home » इकोनॉमी » पॉलिसीRBI has reduced printing of Rs 2,000 notes to a minimum

सरकार ने दी सफाई, 2000 रुपए के नोट की छपाई बंद नहीं हुई, जरूरत के मुताबिक होती है छपाई

देश में सर्कुलेटेड करेंसी में 35 फीसदी हिस्सेदारी 2000 रुपए के नोट की

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नई दिल्ली।  सरकार ने 2000 के नोट को बंद करने के मामले में अपनी सफाई दे दी है। मीडिया में 2000 रुपए के नोट की छपाई में कमी की रिपोर्ट चलने के बाद आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने कहा है कि 2000 के नोट की छपाई में कमी करने का सरकार का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने कहा है कि सिस्टम में 2000 रुपए के पर्याप्त नोट है और देश के बाजार में सर्कुलेशन में  जितने नोट है, उनमें 35 फीसदी हिस्सेदारी 2000 रुपए के नोट की है। उन्होंने कहा है कि जरूरत के मुताबिक 2000 रुपए के नोट की छपाई की जाती है।र

गुरुवार देर शाम से यह खबर मीडिया में चल रही थी कि 2016 में नोटबंदी के बाद जारी किए गए 2000 रुपए के नोट पर खतरा मंडरा रहा है। एजेंसी के हवाले से दी गई खबरों में कहा गया था कि वित्त मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी के मुताबिक 2000 रुपए के नोट की छपाई कम कर दी गई है और यह अपने न्यूनतम स्तर पर पहुंच गई है। इससे यह आशंका जताई जा रही है कि 2000 रुपए का यह नया नोट बैंकिंग सिस्टम से कभी भी गायब हो सकता है। हालांकि, अभी इसे बंद करने को लेकर कोई आधिकारिक फैसला नहीं हुआ है। नाम न छापने की शर्त पर एक बैंक अधिकारी ने भी कहा है कि आरबीआई ने बैंकों से 2000 रुपए का नोट ग्राहकों को नहीं देने को कहा है।

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चलन से बाहर होने लगे 2000 रुपए के नोट
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आंकड़ों के अनुसार, 2000 रुपए नोट चलन से भी बाहर होने लगे हैं। आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2018 तक देश में कुल 18,03 लाख करोड़ रुपए की करेंसी चलन में थी। इसमें 2000 रुपए के नोट का हिस्सा 37.3 फीसदी था। वहीं इससे ठीक एक साल पहले यानी मार्च 2017 के अंत में कुल करेंसी में 2000 रुपए के नोट की हिस्सेदारी 50.2 फीसदी थी। इसी प्रकार 2017 के अंत तक 2000 रुपए के कुल 328.5 करोड़ नोट चलन में थे जो 2018 के अंत में घटकर 336.3 करोड़ रुपए रह गए थे।

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पहले से ही थी बंद करने की योजना


वित्त मंत्रालय के शीर्ष अधिकारी के अनुसार, 2000 रुपए के नोट को जारी करने का मुख्य मकसद नोटबंदी के बाद पैदा होने वाली किल्लत को दूर करना था। इस नोट की लॉन्चिंग के समय ही तय कर लिया गया था कि इसकी छपाई को धीरे-धीरे कम कर दिया जाएगा। यही वजह है कि अब इसकी छपाई अपने न्यूनतम स्तर पर पहुंच गई है। देश की कुल नकदी में भी 2000 रुपए के नोटों की हिस्सेदारी भी बीते एक साल में कम हो गई है। 

एटीएम से भी गायब होने लगे 2000 रुपए के नोट


2000 रुपए के नोटों में कमी का असर एटीएम पर भी दिख रहा है। देश के करीब 50 फीसदी एटीएम से 2000 रुपए का नोट नहीं मिल रहा है। इसकी जगह पर 500 और 200 रुपए के नए नोट को चलन में लाया जा रहा है। नेशनल ऑर्गेनाइजेशन ऑफ बैंक वर्कर्स के वाइस प्रेसीडेंट अश्विनी राणा भी कह चुके हैं कि 2000 रुपए के नोटों की किल्लत के बाद बैंक 500 और 200 रुपए के नोटों को बढ़ावा दे रहे हैं। 

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