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Home » Economy » PolicyRBI enhanced collateral free agriculture loan from Rs 1 lakh to Rs 1.6 lakhs

RBI का बड़ा तोहफा, किसानों को जमीन गिरवी रखे बिना मिलेगा 1.60 लाख रुपए तक का लोन

मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद गवर्नर ने दी जानकारी

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नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने किसानों को बड़ी राहत दी है। RBI ने किसानों को बिना गारंटी मिलने वाले ऋण की अधिकतम सीमा एक लाख रुपए से बढ़ाकर एक लाख 60 हजार रुपए करने का फैसला किया है। केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समिति की गुरुवार को समाप्त तीन दिवसीय छठी द्विमासिक बैठक के बाद विकास एवं नियामक नीतियों पर जारी बयान में यह बात कही गई है।

 

अभी मिलता है एक लाख रुपए तक का लोन

आरबीआई ने अपने बयान में कहा है कि 2010 में एक लाख रुपए तक बिना गारंटी के कृषि ऋण की सीमा तय की गई थी। इस दौरान बढ़ी महंगाई और कृषि लागत के मद्देनजर इस सीमा को बढ़ाकर एक लाख 60 हजार रुपए करने का निर्णय लिया गया है। आरबीआई ने बताया कि वह जल्द ही इस संदर्भ में एक सर्कुलर जारी करेगा। इससे औपचारिक ऋण प्रणाली में छोटे तथा सीमांत किसानों की भागीदारी बढ़ेगी। 

 

ऋण संबंधी समस्याओं को दूर करने के लिए कार्य समूह का गठन

केंद्रीय बैंक ने कहा है कि पिछले वर्षों में कृषि ऋण उठाव अच्छा रहा है, लेकिन इसके बाद भी इसे लेकर कुछ समस्याएं हैं। मसलन, क्षेत्रीय असमानता तथा इसका दायरा। इन समस्याओं के अध्ययन तथा समाधान और इनसे जुड़े नीतिगत सुझावों के लिए आरबीआई की भीतर एक कार्य समूह का गठन किया है। 

रेपो रेट घटाकर 6.25 प्रतिशत किया


भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने चालू वित्त वर्ष की अंतिम मौद्रिक नीति समीक्षा में, गुरुवार को रेपो रेट को घटाकर 6.25 प्रतिशत कर दिया। रेपो रेट वह दर होती है जिस पर आरबीआई बैंकों को कर्ज देता है। आरबीआई ने कहा कि यह फैसला उभरती हुई व्यापक आर्थिक स्थिति के आकलन के आधार पर किया गया है।
 

मौद्रिक नीति की मुख्य बातें


- रेपो दर 6.50 प्रतिशत से घटाकर 6.25 प्रतिशत
- रिवर्स रेपो दर 6.25 प्रतिशत से घटाकर 6.0 प्रतिशत
- बैंक दर 6.75 प्रतिशत से घटाकर 6.50 प्रतिशत
- मार्जिनल स्टैंडिंग फैसेलिटी (एमएसएफ) 7.75 प्रतिशत से घटाकर 6.50 प्रतिशत
- नकद आरक्षित अनुपात चार प्रतिशत यथावत
वैधानिक तरलता अनुपात (एसएलआर) 19.25 प्रतिशत
- चालू वित्त वर्ष के विकास अनुमान को कम कर 7.2 प्रतिशत किया 
- अगले वित्त वर्ष में विकास दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान
- समिति की अगली और अगले वित्त वर्ष की पहली द्विमासिक बैठक दो से चार अप्रैल तक 
 

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