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9 लाख सीनियर सिटीजन ने छोड़ी सब्सिडी, रेलवे को हुई 40 करोड़ की बचत

3 महीने में 9 लाख से ज्यादा सीनियर सिटीजन ने रेलवे के 'गिव अप' स्कीम के तहत स्वेच्छा से टिकट सब्सिडी छोड़ी है।

रेलवे- 9 लाख सीनियर सिटीजन ने छोड़ी सब्सिडी, रेलवे को हुई 40 करोड़ की बचत

नई दिल्ली. 3 महीने में 9 लाख से ज्यादा सीनियर सिटीजन ने रेलवे के 'गिव अप' स्कीम के तहत स्वेच्छा से टिकट सब्सिडी छोड़ी है। जिससे रेलवे को करीब 40 करोड़ रुपए की बचत हुई है।

 

पिछले साल लॉन्च हुई इस स्कीम के तहत सीनियर सिटीजन के पास रेल टिकट पर पूरी रियायत का लाभ लेने या पूरी रकम छोड़ने का विकल्प मौजूद था। इस साल इसमें नया विकल्प जोड़ा गया जिसमें एक सीनियर सिटीजन 50 फीसदी तक सब्सिडी छोड़ सकता है। यह योजना सीनियर सिटीजन कैटगरी के तहत रेलवे पर से 1300 करोड़ रुपए की सब्सिडी के बोझ को कम करने के लिए शुरू की गई थी। 

 

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9.39 लाख यात्रियों ने छोड़ी सब्सिडी

22 जुलाई से 22 अक्टूबर के दौरान 2.16 लाख पुरुष और 2.67 लाख महिला ने पूरी सब्सिडी छोड़ी है, जबकि 2.51 लाख पुरुष और 2.05 लाख महिला ने 50 फीसदी तक सब्सिडी नहीं ली है। इस तरह तीन महीने में 60 साल से ऊपर सब्सिडी छोड़ने वाले यात्रियों की संख्या 9.39 लाख हो गई है। पिछले साल इस दौरान सिर्फ 4.68 लाख सीनियर सिटीजन ने सब्सिडी छोड़ी थी, जिसमें 2.35 लाख पुरुष और 2.33 लाख महिला शामिल हैं। 

 

 

मिनिस्ट्री के एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि एक साल में सब्सिडी छोड़ने वाले लोगों की संख्या दोगुनी हुई है। यह रेलवे के लिए अच्छी खबर है। इससे हमें सब्सिडी के जरिए हो रहे घाटे में कमी आएगी।

 

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सब्सिडी से 30000 करोड़ का होता है सालाना नुकसान

अब तक, रेलवे ट्रेन किराया का 43 फीसदी हिस्सा वहन करता है और यात्री किराए पर सब्सिडी से उसे सालाना 30,000 करोड़ रुपए का नुकसान होता है। जिसमें से 1600 करोड़ रुपए रियाती किराया के हैं।

रेलवे पैसेंजर ट्रांसपोर्टेशन पर होने वाले खर्च का सिर्फ 57 फीसदी ही रिकवर कर पाती है, जो सभी क्लास की टिकट बिक्री के माध्यम से प्राप्त होती है।

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