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भारत में GST के सही इंप्‍लीमेंटेशन पर हो सकता है काम, निकल सकता है हल: रघुराम राजन

राजन ने एक बार फिर दोहराया कि नोटबंदी सही तरह से सोचा गया और प्‍लान किया गया कदम नहीं था।

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न्‍यूयॉर्क. भारत में GST के प्रॉपर इंप्‍लीमेंटेशन पर काम किया जा सकता है और यह कोई हल न होने वाली समस्‍या नहीं है। यह बात पूर्व RBI गवर्नर रघुराम राजन ने कही है। वह बुधवार को कैंब्रिज में हार्वर्ड कैनेडी स्‍कूल में बोल रहे थे। हालांकि उन्‍होंने एक बार फिर दोहराया कि नोटबंदी सही तरह से सोचा गया और प्‍लान किया गया कदम नहीं था। 

 
नोटबंदी और GST दोनों को मोदी सरकार के महत्‍वाकांक्षी सुधार माना जाता है। इनके बारे में राजन का कहना है कि अच्‍छा होता अगर इन सुधारों को बेहतर तरीके से लागू किया गया होता। जीएसटी को लागू किया जाना और अच्‍छा परिणाम देता अगर इसे और बेहतर तरीके से लागू किया गया होता। लेकिन अभी भी यह कोई हल न हो सकने वाली समस्‍या नहीं है। इसे बेहतर बनाने पर काम किया जा सकता है। 
 
अभी राजन यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो के बूथ स्‍कूल ऑफ बिजनेस में फाइनेंस के कैथरीन डुसैक मिलर डिस्टिंगुइश्‍ड सर्विस प्रोफेसर हैं। बुधवार को वह लैवरेज, फाइनेंशियल क्राइसिस और इकोनॉमिक ग्रोथ बढ़ाने की पॉलिसी विषय पर 2018 एल्‍बर्ट एच जॉर्डन लेक्‍चर दे रहे थे। इस बीच उनसे भारत में GST और नोटबंदी जैसे बड़े सुधारों के खराब इंप्‍लीमेंटेशन को लेकर सवाल पूछा गया था। 
 

RBI से ली गई थी नोटबंदी पर राय 

नोटबंदी को लेकर राजन ने इस दावे को खारिज कर दिया कि नवंबर 2016 में नोटबंदी की घोषणा से पहले सरकार ने RBI से इस मामले में राय नहीं ली थी। उन्‍होंने कहा कि मैं स्‍पष्‍ट रूप से यह कह चुका हूं कि RBI से इस बारे में बातचीत की गई थी। हालांकि उन्‍होंने इस बात को भी दोहराया कि पुराने 500 और 1000 रुपए के नोट बंद किए जाने का कदम अच्‍छा आइडिया नहीं था। पहली बार इसके बारे में बात होने पर ही मैंने सरकार से यह कहा था। इसे न ही अच्‍छी तरह से सोचा गया और न ही अच्‍छी तरह से प्‍लान किया गया था। 
 
 

पहले से तैयार कर लेनी था डिमॉनेटाइज्‍ड अमाउंट जितनी करेंसी

आगे कहा कि कोई भी मैक्रो इकोनॉमिस्‍ट यही कहेगा कि अगर करेंसी का 87.5 फीसदी डिमॉने‍टाइज्‍ड किया जा रहा है तो यह सुनिश्चित करना बेहतर रहेगा कि उतने ही अमाउंट की करेंसी पहले से तैयार कर ली जाए। भारत ने ऐसा बिना तैयारी किया। इससे निगेटिव इकोनॉमिक प्रभाव दिखा, जिसमें लोगों के पास पैसे न होना, भुगतान न कर पाना और विशेषकर इन्‍फॉर्मल सेक्‍टर में इकोनॉमिक गतिविधि न हो पाना शामिल रहे। सरकार का इस कदम के पीछे मकसद था कि जिन लोगों ने टैक्‍स भरे बिना जो पैसा जमा कर रखा है वे रातोंरात सामने आ जाएंगे और उन्‍हें टैक्‍स देना होगा। राजन ने इस बात पर भी चिंता जताई कि नोटबंदी की वजह से कई लोगों ने अपनी नौकरी खो दी लेकिन इसकी अच्‍छे से गणना नहीं हो सकी क्‍योंकि ऐसा ज्‍यादातर इन्‍फॉर्मल सेक्‍टर में हुआ। 
 
आगे पढ़ें- नोटबंदी का लंबी अवधि प्रभाव दिखना बाकी 
 
 
 
 
 

नोटबंदी का लंबी अवधि में प्रभाव दिखना अभी बाकी

नोटबंदी के तुरंत के पॉजिटिव प्रभावों को लेकर राजन ने कहा कि इससे इकोनॉमी को हुए फायदे को बताने के लिए एक नई इकोनॉमिक थ्‍योरी ढूंढनी होगी। नोटबंदी के ज्‍यादातर समर्थक यही कहेंगे कि इस कदम का लाभ टैक्‍स भुगतान में बढ़ोत्‍तरी से दिखेगा। नोटबंदी का लंबी अवधि में प्रभाव दिखना अभी बाकी है। इसके तहत हो सकता है कि टैक्‍स पेमेंट बढ़े लेकिन जब तक सबूत नहीं मिलते इंतजार करना होगा। 
 

कुछ बैंकों का पुराना सिस्‍टम फ्रॉड रोकने में नाकाम 

बैंकों में NPA की समस्‍या और नीरव मोदी-PNB स्‍कैंडल पर राजन ने कहा कि यह चिंताजनक है कि कुछ भारतीय बैंकों का सिस्‍टम अभी भी बहुत पुराना है। यह सिस्‍टम फ्रॉड डीलर्स और उनकी मदद करने वाले इंप्‍लॉइज को रोकने में सक्षम नहीं है। NPA पर उन्‍होंने कहा कि बैड लोन्‍स हर बार फ्रॉड की वजह से हो, यह जरूरी नहीं। उनके क्रिएट होने के पीछे तर्कहीनता की अधिकता होना भी है। 
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