विज्ञापन
Home » Economy » PolicyQR Code Compulsory On Medicines From April 2020

अब मोबाइल से हो सकेगी असली-नकली दवाओं की पहचान, जानिए कब से मिलेगी यह सुविधा

देश में 4000 करोड़ रु. का है नकली दवाओं का बाजार

QR Code Compulsory On Medicines From April 2020

QR Code On Medicines: असली और नकली दवाओं में फर्क कर पाना अब बहुत आसान होने वाला है। अगर आपके पास मोबाइल फोन है तो आप खुद भी असली दवाओं की पहचान कर सकेंगे। इसके लिए सरकार जल्द ही क्यूआर कोड (QR Code) की व्यवस्था लागू करने जा रही है। फार्मास्युटिकल मंत्रालय के अनुसार, सरकारी अस्पतालों, जन औषधि केंद्रों पर मौजूद दवाओं पर अप्रैल, 2019 से क्यूआर कोड अनिवार्य है। बाजार में मौजूद अन्य दवाओं के लिए यह व्यवस्था अप्रैल, 2020 से लागू होने जा रही है।

नई दिल्ली.

असली और नकली दवाओं में फर्क कर पाना अब बहुत आसान होने वाला है। अगर आपके पास मोबाइल फोन है तो आप खुद भी असली दवाओं की पहचान कर सकेंगे। इसके लिए सरकार जल्द ही क्यूआर कोड (QR Code) की व्यवस्था लागू करने जा रही है। फार्मास्युटिकल मंत्रालय के अनुसार, सरकारी अस्पतालों, जन औषधि केंद्रों पर मौजूद दवाओं पर अप्रैल, 2019 से क्यूआर कोड अनिवार्य है। बाजार में मौजूद अन्य दवाओं के लिए यह व्यवस्था अप्रैल, 2020 से लागू होने जा रही है। इसके जरिए आप जैसे ही अपने फोन से किसी दवा पर मौजूद क्यूआर कोड को स्कैन करेंगे, आपके फोन पर उस दवा की सारी डिटेल आ जाएगी।

 

4000 करोड़ रु. का है नकली दवाओं का बाजार

एसोचैम के मुताबिक, भारत में नकली दवाओं का बाजार 4,000 करोड़ रुपए का है। यहां बिकने वाली दवाओं में से 25 फीसदी दवाएं नकली हैं। नकली दवाओं की बिक्री के मामले में भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, भारत में बिकने वाली दस में से एक दवा नकली है। इस क्यूआर कोड की नकल करना मुमकिन नहीं होगा, लिहाजा नकली दवाओं पर यह क्यूआर कोड नहीं लगाया जा सकेगा।

 

उपभोक्ताओं को मिलेगा फायदा

क्यूआर कोड से उपभोक्ताओं के साथ सीधे तौर पर कंपनियों को भी फायदा मिलेगा। नकल से हर साल कई हजार करोड़ रुपए का नुकसान देश में व्यापार करने वाली दवा कंपनियों को होता है। वहीं नकली दवाएं लोगों के स्वास्थ्य को और नुकसान पहुंचाती हैं। इस समस्या से निपटने के लिए ही क्यूआर कोड की व्यवस्था लागू की जाएगी। क्यूआर कोड में दवा की पूरी जानकारी छिपी होगी। इसमें बैच नंबर, सॉल्ट, कंपनी का नाम, कीमत, हेल्पलाइन नंबर, जारी करने की तिथि और खराब होने की तिथि शामिल होगी।

 

 

prev
next
मनी भास्कर पर पढ़िए बिज़नेस से जुड़ी ताज़ा खबरें Business News in Hindi और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट
विज्ञापन
विज्ञापन